पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में कच्चे तेल और रसोई गैस की आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि गैस सिलेंडर को लेकर किसी तरह की घबराहट में अनावश्यक बुकिंग न करें।
मौजूद जानकारी के अनुसार पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा है कि फिलहाल रसोई गैस की आपूर्ति को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्राथमिकता दी जा रही है।
बता दें कि गैर घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाली गैस को भी जरूरी क्षेत्रों जैसे अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
गौरतलब है कि मंत्रालय ने राज्यों के प्रशासन और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर एक योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है ताकि उपलब्ध गैस की आपूर्ति निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सभी क्षेत्रों तक पहुंचाई जा सके।
मौजूद जानकारी के अनुसार सुजाता शर्मा ने बताया कि देश की गैस कंपनियों ने अब नए स्रोतों से तरलीकृत प्राकृतिक गैस के दो कार्गो खरीदे हैं जो भारत की ओर आ रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में गैस आपूर्ति को और मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
बता दें कि मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडर की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है और सामान्य परिस्थितियों में एक सिलेंडर की डिलीवरी का समय लगभग ढाई दिन के आसपास है। गौरतलब है कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण देश में रसोई गैस उत्पादन में लगभग पच्चीस प्रतिशत तक तेजी दर्ज की गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि कच्चे तेल की आपूर्ति अब होर्मुज जलडमरूमध्य के अलावा अन्य समुद्री मार्गों से भी सुनिश्चित की जा रही है। इसके कारण पहले जो आपूर्ति प्रभावित हुई थी, उसकी भरपाई अब काफी हद तक कर ली गई है।
इसी बीच सरकारी तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम ने भी कहा है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात और आयात में आई रुकावटों के कारण रसोई गैस की उपलब्ध मात्रा का सावधानीपूर्वक वितरण किया जा रहा है। बता दें कि कंपनी के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों की मांगों की समीक्षा एक संयुक्त समिति द्वारा की जा रही है।
गौरतलब है कि इस समिति में भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं जो जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर गैस आवंटन का फैसला कर रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार कंपनी ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि सरकार गैस आयात के लिए समुद्री मार्गों को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत के पर्यटन उद्योग पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। गोवा में होटल और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर रसोई गैस की संभावित कमी को लेकर चिंता व्यक्त की है।
मौजूद जानकारी के अनुसार गोवा के पर्यटन और यात्रा कारोबार का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को पत्र भेजकर कहा है कि यदि व्यावसायिक रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है तो राज्य के कई भोजनालय और होटल बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं।
बता दें कि संगठन ने अपने पत्र में कहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति की वैश्विक श्रृंखला प्रभावित हो रही है। इसके चलते देश में व्यावसायिक रसोई गैस की उपलब्धता धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है।
गौरतलब है कि सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर रसोई गैस की आपूर्ति कुछ जरूरी क्षेत्रों जैसे शिक्षा संस्थानों और अस्पतालों के लिए सुनिश्चित करने के कदम उठाए हैं। ऐसे में होटल और भोजनालयों के लिए मिलने वाली गैस आपूर्ति सीमित होने की आशंका जताई जा रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार पर्यटन संगठन का कहना है कि गोवा में अधिकांश रेस्तरां, समुद्र तट पर बने भोजनालय और खानपान सेवाएं रसोई गैस पर ही निर्भर हैं। यदि गैस की आपूर्ति बाधित होती है तो इन व्यवसायों को संचालन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
बता दें कि संगठन ने यह भी कहा है कि मौजूदा समय में उपलब्ध लगभग पच्चीस दिन का गैस भंडार पर्याप्त नहीं माना जा सकता। भले ही पश्चिम एशिया का संकट भौगोलिक रूप से दूर दिखाई देता हो, लेकिन इसका आर्थिक असर गोवा जैसे पर्यटन आधारित राज्य पर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि गोवा की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन उद्योग पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि होटल और भोजनालय प्रभावित होते हैं तो इससे कई सहायक व्यवसायों पर भी असर पड़ सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार पर्यटन संगठन ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस मामले में केंद्र सरकार के साथ तुरंत संवाद किया जाए और गैस आपूर्ति से जुड़े वितरकों और आपूर्ति नेटवर्क के साथ भी चर्चा की जाए।
संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाकर इस समस्या का समाधान निकालने के लिए एक ठोस योजना बनाई जाए। इसके साथ ही राज्य प्रशासन से यह भी आग्रह किया गया है कि जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाए ताकि रसोई गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी को रोका जा सके।
बता दें कि संगठन ने सरकार से यह भी मांग की है कि इस संकट के दौरान सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए रसोई गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
इस मामले पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने कहा कि घरेलू उपयोग के लिए रसोई गैस की किसी तरह की कमी नहीं है, हालांकि व्यावसायिक गैस आपूर्ति के मामले में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार के संपर्क में है और केंद्र द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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