अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को चेतावनी देने के बाद कि यदि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को रोकने का प्रयास करता है तो उसे भीषण सैन्य जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, अमेरिका और ईरान के बीच तीखी बयानबाजी छिड़ गई। इस पर ईरान के सर्वोच्च नेता के एक वरिष्ठ सलाहकार ने तुरंत और चुनौती भरा जवाब दिया। लारिजानी ने लिखा कि ईरान जैसा बलिदानी राष्ट्र तुम्हारी खोखली धमकियों से नहीं डरता। तुमसे बड़े भी ईरान को खत्म नहीं कर सके। सावधान रहें, कहीं खुद आपका सफाया न हो जाए। अतीत में ईरान पर ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का आरोप लग चुका है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान जलडमरूमध्य से तेल प्रवाह रोकने के लिए कोई भी कदम उठाता है तो अमेरिका पिछली कार्रवाइयों की तुलना में "बीस गुना अधिक कठोर" प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वाशिंगटन ईरानी संपत्तियों को इस तरह से निशाना बना सकता है जिससे देश के लिए पुनर्निर्माण करना "लगभग असंभव" हो जाएगा।
ईरान के हमले जारी
ईरान ने दबाव बनाने की नीति के तहत इजराइल और खाड़ी देशों पर नए हमले किए। इस युद्ध के चलते तेल की कीमतों में उछाल लाया है और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त अरब अमीरात के दुबई और बहरीन में सुबह मिसाइल हमले की चेतावनी वाले सायरन बजने लगे जबकि सऊदी अरब ने कहा कि उसने अपने तेल समृद्ध पूर्वी क्षेत्र में दो ड्रोन को नष्ट कर दिया। कुवैत के नेशनल गार्ड ने कहा कि उसने छह ड्रोन मार गिराए हैं। बाद में सुबह के समय, यरूशलम में भी सायरन बजने लगे और तेल अवीव में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं। इस बीच, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर क़लीबाफ़ ने एक्स पर चुनौती भरे लहजे में लिखा, हम निश्चित रूप से संघर्षविराम की तलाश में नहीं हैं। हमारा मानना है कि हमलावर के मुंह पर मुक्का मारा जाना चाहिए ताकि उसे सबक मिले और वह फिर कभी हमारे प्यारे ईरान पर हमला करने के बारे में न सोचे। खाड़ी क्षेत्र में इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों तथा ड्रोन से हमला करने के अलावा ईरान ऊर्जा अवसंरचना को भी निशाना बना रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है जिससे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं।
ब्रेंट क्रूड की कीमत में उछाल
अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमत बढ़कर लगभग 120 डॉलर तक पहुंच गई। हालांकि बाद में कीमत में थोड़ी नरमी आई और मंगलवार को भी यह लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल पर थी जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के समय की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध अल्पकालिक हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस्लामी गणराज्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करता है तो लड़ाई और तेज हो सकती है। इस युद्ध के कारण विश्व बाजारों में तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है और समूचे अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं। ईरान ने प्रभावी रूप से टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य का उपयोग करने से रोक दिया है जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का नौवहन मार्ग है, हिंद महासागर का प्रवेश द्वार है तथा इसके माध्यम से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का परिवहन किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, जलडमरूमध्य के पास व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में कम से कम सात नाविक मारे गए हैं। ट्रंप ने मंसोशल मीडिया पर पोस्ट कर चेतावनी दी: अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल के प्रवाह को रोकने वाला कोई भी कदम उठाता है तो अमेरिका उस पर अब तक की तुलना में बीस गुना अधिक जोरदार हमले करेगा।
IRG ने किया साफ, हम तय करेंगे युद्ध कब खत्म करना है
ईरानी सरकारी मीडिया में ट्रंप की टिप्पणियों के प्रकाशन के बाद सीधा जवाब देते हुए अर्द्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता अली मोहम्मद नाइनी ने कहा ईरान तय करेगा कि युद्ध कब खत्म करना है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद उनके पुत्र अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी चुना गया है। इसके एक दिन बाद ही तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। सर्वोच्च नेता के कार्यालय के विदेश नीति सलाहकार कमाल खराजी ने सोमवार को ‘सीएनएन’ को बताया कि ईरान एक लंबे युद्ध के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जब तक आर्थिक दबाव अन्य देशों को हस्तक्षेप करने और ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजराइली आक्रामकता को रोकने के लिए प्रेरित नहीं करता, तब तक उन्हें कूटनीति के लिए कोई गुंजाइश नहीं दिखती।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ चल रही यह जंग जल्द ही खत्म हो सकती है। लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर ईरान ने हॉर्नुज स्टेट में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश की तो अमेरिका और बड़ा हमला कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ चल रही जंग बहुत जल्द खत्म हो सकती है। ट्रंप ने पिछले 10 दिनों से चल रही इस जंग को शॉर्ट टर्म एक्सकरशन यानी कि छोटा सा सैन्य अभियान बताया। फ्लोरिडा के डोरल शहर में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि 28 फरवरी से अब तक अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान के 5000 ठिकानों पर हमला कर चुका है। ट्रंप के मुताबिक इसी दिन ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामिनई की मौत हो गई थी। यानी कि 28 फरवरी को जो हमला ईरान पर हुआ था। जिसके बाद यह टकराव और तेज हो गया।
ट्रंप का कहना है कि भले ही उन्हें लगता है कि यह लड़ाई जल्द खत्म हो सकती है, लेकिन ईरान ने हॉर्मूज स्टेट में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश की तो अमेरिका उससे भी बड़ा हमला कर सकता है। दरअसल हॉर्मोज स्टेट दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में से एक है। जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। इस रास्ते में तनाव बढ़ने की वजह से तेल की कीमतों में भी भारी उछाल आया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रंट क्रूड की कीमत एक समय $19 प्रति बैरल तक पहुंच गई। ट्रंप ने बातचीत में यह भी कहा कि मैं किसी आतंकी सरकार को दुनिया को बंधक बनाने और तेल की सप्लाई रोकने की इजाजत नहीं दूंगा। अगर ईरान ऐसा करता है तो उसे बहुत ज्यादा कड़ा जवाब मिलेगा। आगे उन्होंने कहा कि अमेरिका खाड़ी में चलने वाले तेल टैंकरों को सुरक्षा देने के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा दे रहा है और जरूरत पड़ी तो अमेरिकी सुरक्षा भी साथ चलेगी। ट्रंप के मुताबिक अमेरिका और इजराइल अभी भी ईरान के ड्रोन और मिसाइल ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने छोटा सा अभियान चलाया क्योंकि कुछ लोगों को हटाना जरूरी था। कई मायनों में हम जीत चुके हैं लेकिन अभी पूरी जीत नहीं मिली है। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से फोन पर यूक्रेन और मिडिल ईस्ट के हालात पर बात की।
वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारियों का कहना है कि जब तक ईरान क्षेत्र के देशों पर हमले करता रहेगा और इज़रायल ईरानी ठिकानों पर अपनी कार्रवाई जारी रखेगा, तब तक अमेरिका के लिए इस संघर्ष से पूरी तरह पीछे हटना मुश्किल होगा। इससे पहले भी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा था कि इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की वजह से ही अमेरिका ने ईरान की ओर ताबड़तोड़ हमले करने का सोचा था। अमेरिका का मानना था कि अगर इज़रायल ईरान पर हमला करता है, तो ईरान इसे अमेरिकी सेना के खिलाफ हमला मानकर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। रूबियो ने कहा हमें पहले से पता था कि इज़रायल कोई कार्रवाई करने वाला है। और हमें यह भी पता था कि अगर हम पहले ही कार्रवाई नहीं करते और उनके हमले शुरू होने का इंतज़ार करते, तो हमें ज्यादा नुकसान और हताहतों का सामना करना पड़ता। उन्होंने आगे कहा कि हमें विश्वास था कि उन पर हमला होगा और उसके बाद वे तुरंत हमारे ऊपर भी हमला कर सकते थे। इसलिए हम चुपचाप बैठकर वार झेलने के लिए तैयार नहीं थे।
लेकिन इस मामले से परिचित लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में ट्रंप के सलाहकारों ने उन्हें इस संघर्ष से बाहर निकलने की योजना तैयार करने की सलाह दी है। उनका मानना है कि लंबा चलता युद्ध जो अब अपने 10वें दिन में पहुंच चुका है, अमेरिकी राष्ट्रपति को मिल रहे समर्थन को कमजोर कर सकता है। एक हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग 53% अमेरिकी मतदाताओं ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विरोध किया है। ट्रंप के कुछ सलाहकारों ने यह भी चेतावनी दी है कि मिडटर्म चुनाव नजदीक आ रहे हैं और इस बीच तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ट्रंप के बाहरी आर्थिक सलाहकार स्टीफन मूर ने वॉल स्ट्रीट जनरल से कहा कि जब गैस और तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो बाकी चीज़ों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। पहले से ही महंगाई और खर्च लोगों के लिए चिंता का विषय हैं, ऐसे में यह स्थिति और बड़ी चुनौतियां पैदा कर सकती है।
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