Responsive Scrollable Menu

Explainer: न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में शुभमन गिल के माथे पर दिखी रहस्यमयी डिवाइस, जानें इसका रोल और कैसे करता है काम

Shubman Gil: भारत और न्यूजीलैंड के बीच ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेले गए पहले वनडे मैच के दौरान क्रिकेट फैंस की नजरें सिर्फ बल्ले और गेंद पर नहीं, बल्कि भारतीय कप्तान शुभमन गिल के माथे पर भी टिकी थीं. मैच की शुरुआत और बल्लेबाजी के दौरान शुभमन गिल के दाहिने माथे पर एक छोटा गैजेट चिपका हुआ नजर आया. इसे देखकर सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई कि आखिर यह कोई पट्टी है, स्टिकर है या कोई नई तकनीक? आपको बता दें कि यह कोई साधारण स्टिकर नहीं, बल्कि एक बेहद आधुनिक और प्रीमियम हेल्थ-टेक वियरेबल डिवाइस है, जिसका नाम 'टेंपल' (Temple Device) है. आइए इस ऑर्टिकल में समझते हैं कि यह डिवाइस क्या है, यह कैसे काम करती है, इसे किसने बनाया है और खेल की दुनिया में इसका क्या महत्व है. 

क्या है 'टेंपल' डिवाइस? 

स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड या स्मार्ट रिंग के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा, जो हमारी कलाई या उंगलियों में पहनी जाती हैं. लेकिन 'टेंपल' इन सब से बिल्कुल अलग है. यह दुनिया का एक बेहद अनोखा हेड-वियर (सिर पर पहना जाने वाला) वेलनेस गैजेट है, जिसे सीधे चेहरे या माथे के किनारे पर मेडिकल-ग्रेड एडहेसिव टेप की मदद से चिपकाया जाता है. यह भारत की तरफ से खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा तकनीकी अविष्कार माना जा रहा है. यह डिवाइस इतनी प्रीमियम है कि इसके लॉन्च एडिशन की कीमत लगभग 85000 रुपये रखी गई है और यह गोल्ड, ब्लैक, ब्लू जैसे 6 आकर्षक रंगों में उपलब्ध है. 

कलाई छोड़ माथे पर क्यों लगाया जाता है यह गैजेट?

कलाई पर पहनने वाले आम फिटनेस ट्रैकर्स एक्सरसाइज या तेजी से दौड़ते समय सटीक डेटा नहीं दे पाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हाथ हिलने से कलाई की त्वचा और नसें भी हिलती हैं, जिससे सेंसर्स के लिए सही रीडिंग लेना मुश्किल हो जाता है. इसके विपरीत, हमारा माथा (टेंपल रीजन) एक मुख्य नस के ठीक ऊपर होता है, जहां की त्वचा और नसें दौड़ते-भागते समय भी बिल्कुल स्थिर रहती हैं. इसी वजह से माथे पर पहने जाने वाले इस डिवाइस से मिलने वाला डेटा आम स्मार्टवॉच की तुलना में कहीं ज्यादा सटीक होता है.

यह एडवांस्ड डिवाइस मुख्य रूप से ब्रेन फ्लो टेक्नोलॉजी पर काम करती है, जो सीधे आपके दिमाग की एक्टिविटी को ट्रैक करती है. इसमें लगे खास ऑप्टिकल सेंसर्स और लाइट की मदद से यह पल-पल मॉनिटर करता है कि आपके दिमाग तक खून और ऑक्सीजन का प्रवाह कैसे बदल रहा है. आसान शब्दों में कहें तो, यह ट्रैकर सिर्फ आपकी धड़कन ही नहीं मापता, बल्कि सीधे आपके दिमाग की कार्यप्रणाली और शारीरिक हलचल पर होने वाले उसके असर को सटीकता से बताता है.

क्रिकेटर और एथलीट्स के लिए कैसे मददगार है यह तकनीक?

• प्रेशर हैंडल करने में मददगार: क्रिकेट जैसे खेल में जहां पलक झपकते ही फैसला लेना होता है, वहां यह डिवाइस खिलाड़ी के दिमाग पर पड़ने वाले प्रेशर और फोकस को मापती है. जब शुभमन गिल मैदान पर तेज गेंदबाजों का सामना करते हैं या कप्तान दबाव में फैसले लेते हैं, तब यह तकनीक उसका सटीक ग्राफ बताती है कि उनका दिमाग कितना तनाव झेल रहा है.

• एंट्रोपी स्कोर (दिमाग का माइलेज): यह इस डिवाइस का सबसे खास फीचर है, जो 1 से 250 के स्केल पर मापता है कि खिलाड़ी के शरीर और दिमाग को एक्टिव रहने के लिए कितनी दिमागी ऊर्जा खर्च करनी पड़ रही है. 1 का मतलब है कि खिलाड़ी पूरी तरह से शांत और आराम की स्थिति में है. जबकि 250 का मतलब है कि खिलाड़ी अपने चरम प्रदर्शन और पूरे फोकस पर है.

• फास्ट रिकवरी और बेहतर ट्रेनिंग: इस तकनीक की मदद से कोच और ट्रेनर्स को यह पता चल जाता है कि एक कड़े मैच या थका देने वाले प्रैक्टिस सेशन के बाद खिलाड़ी का दिमाग और शरीर कितनी जल्दी दोबारा चार्ज हो रहा है. इससे खिलाड़ियों की ट्रेनिंग को बेहतर बनाने और उन्हें चोट या भारी थकान से बचाने में मदद मिलती है. 

यह भी पढ़ें:  टीम इंडिया ने ऑकलैंड में तोड़ा न्यूजीलैंड का अजेय किला, 12 सीरीज के बाद कीवी टीम को देखना पड़ा यह दिन

क्या मैदान पर इसे पहनने के लिए ICC की अनुमति है?

जब शुभमन गिल इस डिवाइस को पहनकर लाइव मैच में कप्तानी और बल्लेबाजी करने उतरे, तो नियमों को लेकर भी सवाल उठे. आईसीसी के नियमों के अनुसार, खिलाड़ियों को मैदान पर ऐसे वियरेबल गैजेट्स या सेंसर पहनने की अनुमति होती है जो उनकी फिटनेस और शारीरिक डेटा (जैसे हार्ट रेट, बॉडी हीट या ब्रेन सिग्नल्स) को रिकॉर्ड करते हैं.

हालांकि, इसके लिए एक सख्त शर्त होती है. यह डिवाइस पूरी तरह से 'पैसिव' होनी चाहिए. यानी इसका इस्तेमाल मैच के दौरान मैदान के बाहर बैठे कोच से लाइव बातचीत करने, मैच से जुड़ी रणनीतिक सूचनाएं प्राप्त करने या किसी भी प्रकार की बाहरी मदद के लिए नहीं किया जा सकता. चूंकि 'टेंपल' डिवाइस सिर्फ खिलाड़ी के आंतरिक स्वास्थ्य और जैविक सिग्नल्स का डेटा स्टोर करती है, इसलिए इसे नियमों के दायरे में रहकर पहना जा सकता है.

खेल का भविष्य बदल रही है आधुनिक तकनीक

शुभमन गिल का मैदान पर यह नया प्रयोग दिखाता है कि आधुनिक क्रिकेट अब सिर्फ बल्ले और गेंद के हुनर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह डेटा और विज्ञान का खेल भी बन चुका है. जहां पहले सिर्फ खिलाड़ियों के रन और विकेट के आंकड़े देखे जाते थे. वहीं अब उनके दिमाग की फिटनेस, फोकस लेवल और तनाव झेलने की क्षमता को भी नंबर्स में मापा जा रहा है. 'टेंपल' डिवाइस आने वाले समय में खेल जगत में खिलाड़ियों के परफॉर्मेंस को एक नए स्तर पर ले जा सकती है.

यह भी पढ़ें:  कब खेला जाएगा भारत-न्यूजीलैंड का दूसरा वनडे मैच? नोट कर लीजिए तारीख, समय और लाइव स्ट्रीमिंग समेत सभी डिटेल्स

Continue reading on the app

US Midterm Elections: अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में हिंदुओं का डंका, संसद और विधानसभाओं में जीते कई उम्मीदवार

US Midterm Elections: एक दिन पहले अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन्स हुए, जिसमें कई भारतवंशी उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया और अहम सीटों पर जीत हासिल की. खास बात है कि इन भारतवंशी उम्मीदवारों में अधिकांश हिंदू समुदाय से आते हैं. आसान भाषा में कहें तो मध्यावधि चुनावों में कई हिंदुओं ने जीत हासिल की है. आइये जानते हैं, अमेरिका में जीते प्रमुख हिंदू उम्मीदवारों के बारे में… 

प्रतिनिधि सभा में जीते हिंदू उम्मीदवारों की लिस्ट

सुहास सुब्रमण्यम: डेमोक्रेटिक पार्टी के सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से लगातार दूसरी बार शानदार जीत दर्ज की. उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के डेव बेकविथ को करारी शिकस्त दी.

पिया डांडिया: फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार पिया डांडिया ने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी केसी असकर को हराकर इतिहास रच दिया है. पूर्व हाई स्कूल प्रिंसिपल पिया डांडिया की इस जीत से डेमोक्रेट्स ने इस सीट को अपने पाले में कर लिया.

रो खन्ना: कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जाने-माने भारतवंशी नेता रो खन्ना ने एक बार फिर अपनी सीट बरकरार रखी है.

प्रमिला जयपाल: वॉशिंगटन के 7वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से प्रमिला जयपाल ने भारी मतों के साथ अपनी सीट पर फिर से कब्जा जमाया है.

प्रांतीय और स्थानीय स्तर पर सफलताएं

संसद के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की सरकारों में भी भारतवंशियों और हिंदुओं का दबदबा देखने को मिला है. अरुणा मिलर ने एक बार फिर से मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद हासिल कर लिया है. उन्होंने गवर्नर वेस मूर के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. इसके अलावा जॉर्जिया स्टेट हाउस से ज्योति सिंह ने ऐतिहासिक जीत हासिल की. वहीं, पेंसिल्वेनिया से अरविंद वेंकट जैसे विभिन्न हिंदू उम्मीदवारों ने राज्य विधानमंडलों में भी सीटें बरकरार रखीं.

इन बड़े चेहरों को मिली हार

मिडटर्म इलेक्शन में जहां कई भारतवंशियों के घरों में खुशी का माहौल रहा, वहीं कुछ बड़े नामों को हार का सामना भी करना पड़ा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी और रिपब्लिकन पार्टी के चर्चित नेता विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर पद का चुनाव डेमोक्रेट एमी एक्टन से हार गए. यदि विवेक रामास्वामी यह चुनाव जीत जाते, तो वह अमेरिका के इतिहास के पहले हिंदू गवर्नर बनते. इसके अलावा, न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल पद की रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमातीरेड्डी भी अपनी प्रतिद्वंद्वी लेटिटिया जेम्स से चुनाव हार गईं.

 

Continue reading on the app

  Sports

40 करोड़ दो वरना ऑक्शन में जाएंगे... आईपीएल नीलामी से पहले खिलाड़ियों ने बढ़ाई टीमों की टेंशन

40 Crore retention demand: आईपीएल के अगले मेगा ऑक्शन से पहले ट्रेड विंडो और रिटेंशन को लेकर टीमों की राह कठिन दिख रही है. कई टॉप खिलाड़ियों ने रिटेन होने के लिए 40 करोड़ की भारी-भरकम फीस की मांग रखी है. श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत के ऑक्शन में जाकर बड़ी रकम हासिल करने के बाद अन्य खिलाड़ी भी खुले बाजार का रुख कर सकते हैं. 150 करोड़ पर्स होने की संभावना से यह मांग पूरी होना असंभव तो नहीं, लेकिन टीमों के बजट का बड़ा हिस्सा दांव पर लग जाएगा. Thu, 5 Nov 2026 23:48:55 +0530

  Videos
See all

रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया SI सुजीत मोहंता | #viral #viralvideo #shortvideo #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-11-05T20:30:22+00:00

देश के जवानों की ओर से हैप्पी दिवाली | #viral #viralvideo #shortvideo #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-11-05T20:40:22+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers