US Midterm Elections: अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में हिंदुओं का डंका, संसद और विधानसभाओं में जीते कई उम्मीदवार
US Midterm Elections: एक दिन पहले अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन्स हुए, जिसमें कई भारतवंशी उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया और अहम सीटों पर जीत हासिल की. खास बात है कि इन भारतवंशी उम्मीदवारों में अधिकांश हिंदू समुदाय से आते हैं. आसान भाषा में कहें तो मध्यावधि चुनावों में कई हिंदुओं ने जीत हासिल की है. आइये जानते हैं, अमेरिका में जीते प्रमुख हिंदू उम्मीदवारों के बारे में…
प्रतिनिधि सभा में जीते हिंदू उम्मीदवारों की लिस्ट
सुहास सुब्रमण्यम: डेमोक्रेटिक पार्टी के सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से लगातार दूसरी बार शानदार जीत दर्ज की. उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के डेव बेकविथ को करारी शिकस्त दी.
पिया डांडिया: फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार पिया डांडिया ने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी केसी असकर को हराकर इतिहास रच दिया है. पूर्व हाई स्कूल प्रिंसिपल पिया डांडिया की इस जीत से डेमोक्रेट्स ने इस सीट को अपने पाले में कर लिया.
रो खन्ना: कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जाने-माने भारतवंशी नेता रो खन्ना ने एक बार फिर अपनी सीट बरकरार रखी है.
प्रमिला जयपाल: वॉशिंगटन के 7वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से प्रमिला जयपाल ने भारी मतों के साथ अपनी सीट पर फिर से कब्जा जमाया है.
प्रांतीय और स्थानीय स्तर पर सफलताएं
संसद के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की सरकारों में भी भारतवंशियों और हिंदुओं का दबदबा देखने को मिला है. अरुणा मिलर ने एक बार फिर से मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद हासिल कर लिया है. उन्होंने गवर्नर वेस मूर के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. इसके अलावा जॉर्जिया स्टेट हाउस से ज्योति सिंह ने ऐतिहासिक जीत हासिल की. वहीं, पेंसिल्वेनिया से अरविंद वेंकट जैसे विभिन्न हिंदू उम्मीदवारों ने राज्य विधानमंडलों में भी सीटें बरकरार रखीं.
इन बड़े चेहरों को मिली हार
मिडटर्म इलेक्शन में जहां कई भारतवंशियों के घरों में खुशी का माहौल रहा, वहीं कुछ बड़े नामों को हार का सामना भी करना पड़ा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी और रिपब्लिकन पार्टी के चर्चित नेता विवेक रामास्वामी ओहायो के गवर्नर पद का चुनाव डेमोक्रेट एमी एक्टन से हार गए. यदि विवेक रामास्वामी यह चुनाव जीत जाते, तो वह अमेरिका के इतिहास के पहले हिंदू गवर्नर बनते. इसके अलावा, न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल पद की रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमातीरेड्डी भी अपनी प्रतिद्वंद्वी लेटिटिया जेम्स से चुनाव हार गईं.
जकार्ता में 20,000 से अधिक Indonesian Troops की तैनाती, राष्ट्रपति फोन टैपिंग मामले में जांच जारी
जकार्ता, चार नवंबर (एपी) इंडोनेशिया के राष्ट्रपति की कथित फोन टैपिंग की जांच के बीच, राजधानी जकार्ता में 20,000 से अधिक सैनिकों और कर्मियों को तैनात किया जा रहा है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रपति भवन ने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को निशाना बनाकर की गई कथित फोन टैपिंग को ‘‘देशद्रोह’’ माना जा सकता है क्योंकि संवेदनशील जानकारी लीक होने पर देश और राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
इस प्रकरण में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ, जनरल लिस्ट्यो सिगिट प्राबोवो भी शामिल हैं। आरोप है कि मंत्रिमंडल के सदस्यों, राजनेताओं, पत्रकारों, नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों की भी फोन टैपिंग की गई थी। गिरफ़्तारियों के बीच राजधानी में हज़ारों सैनिक तैनात किए गए हैं अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि यह तैनाती फोन टैपिंग की जांच से जुड़ी है या नहीं।
सैनिकों की तैनाती के पहले चरण की शुरुआत सोमवार को हुई, जिसमें जकार्ता में 2,100 जवानों को तैनात किया गया। नौसेना संचालन सहायक, वाइस एडमिरल यायान सोफियान के अनुसार, राजधानी के बाहर से सैनिकों को लाया जाना बुधवार से शुरू होना था, जिससे इसमें शामिल कुल कर्मियों की संख्या 20,980 हो जाएगी। इंडोनेशियाई सशस्त्र बलों के प्रवक्ता मेजर जनरल मुहम्मद नस ने कहा कि सैनिकों की यह आवाजाही राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के लिए एक सामान्य प्रक्रिया है।
राज्य सचिवालय मंत्री प्रासेत्यो हादी ने बुधवार को जकार्ता में राष्ट्रपति भवन में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रपति की फोन टैपिंग से राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई है। इंडोनेशियाई पुलिस ने मंगलवार देर रात बताया था कि उसने कथित फोन टैपिंग की जांच के सिलसिले में तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को हिरासत में लिया है।
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