जानें कौन हैं अब्दुल अल-सैयद, जिन्हे ट्रंप ने कहा था जिहादी, अब वही बने अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर
Abdul El Sayed US Senator: अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और पेशे से जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन राज्य से सीनेट चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया है. वह अमेरिकी सीनेट में कदम रखने वाले पहले मुस्लिम नेता बन गए हैं. अल-सैयद ने बेहद कड़े मुकाबले में रिपब्लिकन पार्टी के बड़े चेहरे माइक रोजर्स को शिकस्त दी. यह जीत सिर्फ अल-सैयद के लिए ही नहीं, बल्कि डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील धड़े के लिए भी बहुत मायने रखती है, क्योंकि मिशिगन देश का एक बेहद अहम चुनावी राज्य माना जाता है.
संघर्षों से भरा रहा राजनीतिक सफर
अल-सैयद की यह कामयाबी किसी चमत्कार से कम नहीं है. आठ साल पहले वह मिशिगन में गवर्नर पद की प्राइमरी रेस बड़े अंतर से हार गए थे. इसके बावजूद उन्होंने जनता के बीच काम करना नहीं छोड़ा. कभी किसी निर्वाचित पद पर न रहने वाले अल-सैयद ने जमीनी स्तर पर लोगों से सीधा संपर्क साधा. इस बार उन्होंने अगस्त में सत्ता पक्ष की पसंदीदा सांसद हेली स्टीवंस को कांटे के मुकाबले में हराया था. आम चुनाव के अंतिम पलों में स्टीवंस ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रोजर्स का साथ देने का ऐलान किया, लेकिन अल-सैयद ने तमाम मुश्किलों को पार करते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली.
"MICHIGAN, WE DID IT!"
— Fox News (@FoxNews) November 4, 2026
Abdul El-Sayed celebrates his projected U.S. Senate victory in Michigan, telling supporters he is “so proud and honored” to stand before them as senator-elect.
El-Sayed, who repeatedly used the phrase “inshallah,” meaning “God willing,” throughout the… pic.twitter.com/6hT7A1UDsc
स्वास्थ्य सेवा और आम जनता से जुड़े मुद्दे
अल-सैयद ने अपना पूरा प्रचार अभियान आम लोगों के सरोकारों पर केंद्रित रखा था. उन्होंने सभी के लिए सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवा की पुरजोर वकालत की. उनका साफ कहना था कि किसी भी बीमार इंसान को अस्पताल जाने से पहले जेब देखने की नौबत नहीं आनी चाहिए. इसके अलावा उन्होंने चुनावी व्यवस्था से बड़े उद्योगपतियों के भारी-भरकम पैसे के प्रभाव को खत्म करने का वादा किया. उन्होंने पूरे मिशिगन में बड़ी रैलियां कीं, जहां पारंपरिक रिपब्लिकन गढ़ों में भी भारी भीड़ उन्हें सुनने के लिए उमड़ी. इस जीत के बाद वह साल 1969 के बाद सीनेट पहुंचने वाले पहले डेमोक्रेटिक डॉक्टर भी बन गए हैं.
आरोपों और तीखे हमलों के बीच मुकाबला
यह चुनाव दोनों तरफ से तीखी बयानबाजी से भरा रहा. रिपब्लिकन नेताओं ने अल-सैयद की सोच को लेकर कड़ा रुख अपनाया और उनके खिलाफ आक्रामक प्रचार किया. विरोधियों की तरफ से उन्हें कट्टरपंथी साबित करने की भरपूर कोशिशें की गईं. दूसरी ओर, अल-सैयद के सामने अपनी पार्टी के सभी तबकों को साथ लेकर चलने की चुनौती भी थी. लेकिन उन्होंने अपनी सकारात्मक सोच और जनता के बुनियादी मुद्दों पर बात करके वोटरों का भरोसा जीत लिया.
डॉक्टर से सीनेटर बनने की दिलचस्प कहानी
मिशिगन में जन्मे और पले-बढ़े अल-सैयद के पिता मिस्र से आकर अमेरिका बसे थे. स्कूली दिनों में वह पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी आगे रहे. उन्होंने मिशिगन यूनिवर्सिटी से डिग्री ली, फिर कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट किया. स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में काम करते हुए उन्हें अहसास हुआ कि जब तक व्यवस्था और नीतियां नहीं बदलेंगी, तब तक आम लोगों को बीमार होने से नहीं बचाया जा सकता. इसी सोच ने उन्हें डॉक्टरी की प्रैक्टिस से राजनीति के मैदान में ला खड़ा किया.
भारत से भी है गहरा नाता
अल-सैयद की इस जीत की गूंज भारत में भी सुनाई दे रही है. इसका कारण उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू हैं, जो एक जानी-मानी मनोचिकित्सक हैं. सारा का परिवार भारत के कर्नाटक राज्य में मंगलुरु के पास स्थित भटकल शहर से जुड़ा है. सारा के दादा जुकाकू शमसुद्दीन मैसूर राज्य की सरकार में उप वित्त मंत्री रह चुके थे.
जीत के बाद डेट्रॉइट में समर्थकों से बात करते हुए अल-सैयद ने कहा कि वह जनता के उसी भरोसे और उम्मीद को साथ लेकर वाशिंगटन जा रहे हैं, जो मिशिगन के लोगों ने उन्हें दिया है. उन्होंने वादा किया कि वह सीनेट में आम जनता की आवाज पूरी मजबूती से उठाएंगे.
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रूस ने यूक्रेन के पावर ग्रिड पर किया बड़ा हमला, कई इलाकों में बिजली गुल, अबू धाबी बैठक से पहले बिगड़े हालात
Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच शांति की कोशिशों को एक बार फिर झटका लगा है. अमेरिका की मध्यस्थता में 10 और 11 नवंबर को अबू धाबी में दोनों देशों के बीच बातचीत होनी है. लेकिन इससे पहले रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं. इन हमलों में बिजली संयंत्रों और सबस्टेशनों को निशाना बनाया गया, जिससे राजधानी कीव समेत कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई. इस बीच जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने रूस से युद्धविराम और शांति समझौते के लिए गंभीरता से बातचीत करने की अपील की है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने रातभर में 289 ड्रोन, 17 बैलिस्टिक मिसाइल और 59 क्रूज मिसाइलें दागीं. इन हमलों का असर दक्षिण में काला सागर के तट पर स्थित ओडेसा से लेकर पश्चिमी यूक्रेन के रिव्ने तक देखने को मिला. यूक्रेन की सबसे बड़ी निजी बिजली कंपनी DTEK ने बताया कि उसके पांच में से तीन थर्मल पावर प्लांट बंद हो गए हैं.
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स्कूल पर हमले में 33 लोगों की मौत का दावा
जेलेंस्की ने बताया कि सोमवार को रूस ने जापोरिज्जिया इलाके के कोमिशुवाखा गांव में एक स्कूल को निशाना बनाया. इस स्कूल का इस्तेमाल लोगों को राहत सामग्री बांटने के लिए किया जा रहा था. जेलेंस्की के मुताबिक, हमले में कम से कम 33 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 50 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है.
वहीं, रूस ने दावा किया कि उसकी सेना ने कोमिशुवाखा और जापोरिज्जिया क्षेत्र की दो अन्य जगहों पर यूक्रेनी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्रवाई में 25 यूक्रेनी सैनिक मारे गए. इसके अलावा 15 सैन्य वाहन और एक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर स्टेशन भी नष्ट कर दिया गया.
मर्ज ने रूस से की बातचीत करने की अपील
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेलेंस्की ने कहा कि रूस के हमले दिखाते हैं कि वह मानवीय युद्धविराम को आगे बढ़ाने के बजाय सैन्य कार्रवाई जारी रखना चाहता है. वहीं, मर्ज ने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत शुरू करना जरूरी है और यूरोपीय देशों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि रूस को युद्धविराम और उसके बाद स्थायी शांति समझौते के लिए गंभीरता से बातचीत करनी चाहिए. हालांकि, उन्हें अभी तक मॉस्को की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है.
अबू धाबी में होगी शांति वार्ता
अमेरिका की मध्यस्थता में 10 और 11 नवंबर को अबू धाबी में शांति वार्ता प्रस्तावित है. इससे पहले यूक्रेन, अमेरिका, नाटो और यूरोपीय सहयोगी देशों के बीच भी बैठकें होंगी. यूरोपीय आयोग के मुताबिक, बुधवार को यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों के साथ एक बैठक होगी. इसमें यूक्रेन की सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक स्थिति से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी. जेलेंस्की ने बताया कि इस बैठक में यूक्रेन के लिए समृद्धि योजना (Prosperity Plan) और सुरक्षा गारंटी पर बात होगी. नाटो ने भी गुरुवार को आगे की बातचीत की जानकारी दी है.
बिजली और परमाणु सुरक्षा पर भी बढ़ा खतरा
रूसी हमलों से यूक्रेन की बिजली व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है. कीव के मेयर विताली क्लित्स्को ने शहर में बिजली की स्थिति को बेहद मुश्किल बताया. उन्होंने कहा कि रूस लगातार यूक्रेन की बिजली उत्पादन और सप्लाई व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है. हाल के हमलों के कारण कीव और आसपास के इलाकों में आपातकालीन बिजली कटौती करनी पड़ी है.
सर्दियों में बिजली संकट बढ़ने की आशंका
यूक्रेन के लोगों को आने वाली सर्दियों में बिजली और हीटिंग की समस्या बढ़ने का डर सता रहा है. पिछले साल रूसी हमलों के कारण लाखों लोगों को कई दिनों तक बिजली और गर्मी की सुविधा नहीं मिल पाई थी. इस बार भी कई शहरों में लंबे समय तक बिजली कटौती हो रही है. मध्य यूक्रेन के द्निप्रो शहर की रहने वाली 49 वर्षीय ओल्हा हिरिया ने कहा कि इस बार सर्दी काफी मुश्किल हो सकती है. उन्होंने बताया कि रूस लगातार बिजली और हीटिंग प्लांट को निशाना बना रहा है.
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