प्रीति जिंटा की जगह ये पाकिस्तानी एक्ट्रेस होती शाहरुख खान की 'Zaara', इस वजह से ठुकराया ऑफर
Pakistani Actress Rejected Veer-Zaara Offer: हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्म वीरा-जारा रोमांटिक ट्रैजिक में सबसे बेहतरीन मूवी में से एक मानी जाती है. इस फिल्म में शाहरुख खान (Shahrukh Khan) और प्रीति जिंटा (Preity Zinta) लीड रोल में थे. उनकी जोड़ी लोग आज भी पसंद करते हैं. फिल्म के कई गाने आज भी लोगों की जबान पर रहते हैं. ये फिल्म 2004 की सबसे बड़ी हिट रही. इसी फिल्म को लेकर पाकिस्तान की एक एक्ट्रेस ने दावा किया है कि वो इस फिल्म में शाहरुख खान के अपॉजिट यानी प्रीति जिंटा का रोल अदा करने वाली थी लेकिन उन्होंने ये ऑफर ठुकरा दिया था. सोशल मीडिया पर इस एक्ट्रेस के बयान का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने बताया कि क्यों ये ऑफर छोड़ना पड़ा.
किस एक्ट्रेस को ऑफर हुआ था रोल?
हम जिस पाकिस्तानी एक्ट्रेस की बात कर रहे हैं, उनका नाम नादिया जमील (Nadia Jamil) है. पाकिस्तान के रमजान ट्रांसमिशन शो में बतौर गेस्ट पहुंचीं एक्ट्रेस ने बताया- 'मुझे वीर जारा फिल्म का ऑफर आया था जब यश जी ने मुझे इस फिल्म के लिए कॉल किया था मेरी नई-नई शादी हुई थी. हालांकि जब यश चोपड़ा के साथ बातचीत चल थी मैं प्रेग्नेंट नहीं थी लेकिन जब शूटिंग और कास्टिंग के लिए दोबारा कॉल आया था तो मेरा बड़ा बेटा राकाए, 3 महीने का था. उस वक्त जिस चीज की मुझे ज्यादा लत थी उसने मुझे खींच लिया.'
उन्होंने आगे बताया- 'घर वालों का पूरा सपोर्ट था लेकिन मैं कंन्फ्यूज थी कि मेरे पास दो ऑप्शन थे. पहला करियर बिल्ड करूं जो अच्छी चीज है. दूसरा, मैं किस किस्म की मां बनना चाहती हूं? लेकिन मैं ऐसी मां बनना चाहती थी जो अपने बच्चे के साथ समय बिताए. जब राकाए पैदा हुआ था उस वक्त मैं 30 साल की थी. मुझे अपने बच्चे से बहुत लगाव था और मैं क्लिर थी कि मैं राकाए के साथ समय बिताऊंगी.'
सोशल मीडया पर यूजर्स ने उठाए सवाल
सोशल मीडिया पर इस इंटरव्यू की क्लिप सामने आने के बाद लोग तारीफ के साथ सवाल भी कर रहे हैं. एक यूजर ने कहा- 'फिल्म 22 साल पहले आई थी, तो बेटा 24 साल का कैसे हुआ. ये सस्ता फेम लेने के लिए मनगढ़ंत कहानी बना रही है. इन्हें कोई नहीं जानता है.' वहीं कई लोगों का कहना है कि 'नादिया एक दमदार एक्ट्रेस हैं अगर वो प्रिति जिंटा के बदले होती तो किरदार के साथ पूरा न्याय करतीं.' नेटिजन्स ने उनकी तारीफ में कहा कि नादिया एक मंझी हुई एक्ट्रेस हैं अगर वो वीर-जारा में होती तो फिल्म में चार-चांद और लग जाते. बता दें कि वीर-जारा के मेकर्स की तरफ से किसी तरह की पुष्टि नहीं की गई कि उन्हें फिल्म का ऑफर मिला था.
नादिया जमील का फिल्मी करियर
नादिया जमील पाकिस्तान की फेमस एक्ट्रेस हैं उन्होंने अपना फिल्मी करियर 90 के दशक में शुरु किया था. नादिया की 2002 में 'रात चली है झूम के' फिल्म हिट रही. इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड मिला था. इसके अलावा नादिया कई सक्सेसफुल फिल्मों का हिस्सा रहीं हालांकि अब वो ज्यादातर टेलीविजन ड्रामा और शो होस्ट करती हुईं नजर आती हैं.
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आईएसआई अफगानिस्तान में चीनी प्रोजेक्ट्स को बना रही निशाना, विशेषज्ञ ने दी चेतावनी
काबुल, 10 मार्च (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के एक प्रमुख सुरक्षा विशेषज्ञ ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अफगान इंटेलिजेंस एनालिस्ट और आतंक रोधी विशेषज्ञ अजमल सोहेल ने एक जानी-मानी अंतर्राष्ट्रीय मैगजीन को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) अफगानिस्तान में चीन के बुनियादी ढांचे और निवेश परियोजनाओं को निशाना बनाने की गतिविधियों में कथित तौर पर शामिल है।
काउंटर नार्को-टेररिज्म अलायंस जर्मनी के सह-संस्थापक और सह-अध्यक्ष सोहेल ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम इस्लामाबाद की इस चिंता को दिखाता है कि काबुल के साथ बीजिंग का बढ़ता जुड़ाव, जिसमें माइनिंग ऑपरेशन से लेकर विदेशी निवेश और संभावित ट्रांजिट कॉरिडोर शामिल हैं, पाकिस्तान के भू-राजनीतिक दबदबे को सीमित कर सकता है।
डिप्लोमैट पत्रिका को दिए साक्षात्कार में सोहेल ने कहा, हाल के समय में अफगानिस्तान में चीनी निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। उनका आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे आईएसआई सक्रिय है। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों का उद्देश्य अफगानिस्तान में चीन की आर्थिक मौजूदगी को कमजोर करना और क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन को प्रभावित करना हो सकता है।
उन्होंने कहा, यह स्ट्रैटेजी इस्लामाबाद की इस चिंता को दिखाती है कि काबुल के साथ बीजिंग का बढ़ता सीधा जुड़ाव, खासकर माइनिंग, विदेशी निवेश और संभावित ट्रांजिट रूट्स के जरिए, पाकिस्तान के भू-राजनीतिक असर को कम कर सकता है। चीनी प्रोजेक्ट्स को कमजोर करके, आईएसआई बीजिंग को यह याद दिलाना चाहती है कि पाकिस्तान रीजनल कनेक्टिविटी के लिए एक जरूरी चौकीदार (खासकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर) बना हुआ है।
अफगान विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में चीन के कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें खनन, सड़क निर्माण और ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन परियोजनाओं को क्षेत्रीय विकास और आर्थिक स्थिरता के लिए अहम माना जाता है, लेकिन सुरक्षा चुनौतियों के कारण इन प्रोजेक्ट्स के सामने लगातार खतरा बना हुआ है।
विश्लेषक का मानना है कि अफगानिस्तान में चीन की बढ़ती आर्थिक भागीदारी को लेकर क्षेत्रीय भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। ऐसे में इन परियोजनाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई है। हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में विदेशी निवेश से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कुछ मामलों में विदेशी कर्मचारियों को भी निशाना बनाया गया।
उन्होंने आगे कहा, इस डॉक्ट्रिन का एक हिस्सा विदेशी टूरिस्ट और इन्वेस्टर पर गुरिल्ला-स्टाइल हमलों को बढ़ावा देना है, जिसमें चीनी नागरिकों को सिंबॉलिक टारगेट के तौर पर चुना जाता है। इसका मकसद चीनी वेंचर्स के आसपास इनसिक्योरिटी पैदा करना और बीजिंग की अफ़गानिस्तान में इंडिपेंडेंटली ऑपरेट करने की क्षमता को मुश्किल बनाना है।
सोहेल ने बताया कि आईएसआई का फोकस अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में वखान कॉरिडोर पर है, जो पाकिस्तान को बायपास करते हुए चीन के लिए एक वैकल्पिक ट्रेड रूट के तौर पर काम कर सकता है।
उन्होंने द डिप्लोमैट को बताया, अगर चीन अफगानिस्तान के जरिए प्रत्यक्ष इंफ्रास्ट्रक्चर लिंक बनाने में कामयाब हो जाता है, तो एक स्ट्रेटेजिक बिचौलिए के तौर पर पाकिस्तान की भूमिका कमजोर हो जाएगी। इसलिए, आईएसआई की साजिश बीजिंग की निर्भरता को वापस पाकिस्तान की ओर मोड़ने, उसकी जियोइकोनॉमिक अहमियत को बनाए रखने और यह पक्का करने के लिए है कि सीपीईसी चीन की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के लिए मुख्य रास्ता बना रहे।
पाकिस्तान से वखान कॉरिडोर जा रहे हथियारों की खेप पकड़े जाने के बारे में पूछे जाने पर, सोहेल ने बताया कि तालिबान इंटेलिजेंस ने 21 फरवरी को तोरखम बॉर्डर पर लगभग 525 हथियारों और 27,000 राउंड गोला-बारूद का एक शिपमेंट रोका था। उन्होंने कहा कि ट्रकों में छिपाकर रखे गए हथियार, जो ओमारी रिफ्यूजी कैंप और आखिर में वखान कॉरिडोर जा रहे थे, तालिबान शासन के खिलाफ गुप्त ऑपरेशन में तेजी से बढ़ोतरी दिखाते हैं।
एक्सपर्ट ने बताया, इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स इस ऑपरेशन के लिए पाकिस्तान की आईएसआई और मिलिट्री इंटेलिजेंस को जिम्मेदार ठहराती हैं, जो अफगानिस्तान में तालिबान विरोधी ग्रुप्स और अलगाववादियों को हथियारों की सप्लाई का इंतजाम करती हैं। अफगानिस्तान इंडिपेंडेंस फ्रंट जैसे नए सक्रिय संगठन, साथ ही क्षेत्रीय समूह, आईएसकेपी, और दूसरे हथियारबंद गुटों को चीनी माइनिंग कंपनियों और विदेशी निवेशकों (खासकर वखान कॉरिडोर में) पर हमले करने के लिए हथियार दिए गए थे।
फिलहाल यह मुद्दा क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय निवेश से जुड़ी बहस को और तेज कर सकता है, क्योंकि अफगानिस्तान में स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए विदेशी निवेश को महत्वपूर्ण माना जाता है।
--आईएएनएस
केआर/
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