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Israel Election Results: चुनाव समिति ने राष्ट्रपति को सौंपे नतीजे, धांधली के दावे खारिज

(हरिंदर मिश्रा) यरुशलम, चार नवंबर वोट चोरी और धांधली के आरोपों के बीच, इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) के अध्यक्ष नोम सोहलबर्ग ने चुनाव के नतीजे बुधवार को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंप दिए, जिससे नयी सरकार के गठन को लेकर विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनाव परिणामों पर संदेह जताने की कोशिशों के खिलाफ चेतावनी देते हुए, उच्चतम न्यायालय के न्यायधीश सोहलबर्ग ने कहा कि ऐसा करना इजराइल के लोकतंत्र के लिए “एक वास्तविक खतरा” है। उन्होंने कहा कि अगर चुनावी धांधली का संदेह साबित भी हो जाए, तो भी उसका असर इतना नहीं होगा कि नतीजों को अमान्य किया जा सके।

सोहलबर्ग ने यहां राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास पर आयोजित एक समारोह में कहा, “हाल के दिनों में, हमने ऐसी बातें सुनी हैं जो चुनाव परिणामों पर संदेह पैदा करने और उनकी वैधता को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। यह एक वास्तविक खतरा है।” उन्होंने कहा, “लोकतंत्र के आधारों में से एक यह है कि सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से हो सके। यह इस समझ से आता है कि मतदाताओं की इच्छा हम सभी के लिए बाध्यकारी है।” इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उनके गठबंधन सहयोगियों ने चुनावी धांधली का आरोप लगाया और मांग की कि चुनाव परिणामों के प्रकाशन पर रोक लगाई जाए।

सोहलबर्ग ने बताया कि बुधवार सुबह सीईसी सदस्यों के सामने आरोपों की जांच का सारांश पेश किया गया था, और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन संदेहों की गहन जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “फिलहाल ये केवल संदेह हैं, लेकिन अगर इनकी पुष्टि भी हो जाती है, तो भी इनका संभावित असर सीमित ही होगा। इसलिए, चुनाव परिणामों को प्रकाशित न करना... और नेसेट (संसद) का कार्यकाल, जो पहले ही समाप्त हो चुका है, उसे आगे बढ़ाना संभव नहीं है।” सोहलबर्ग ने कहा, “इसके अनुसार, हम अब चुनाव परिणामों की घोषणा कर रहे हैं।

अगर आगे कोई सबूत मिलता है, तो चुनाव परिणामों के खिलाफ अपील करने के लिए कानून में तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी।” उन्होंने अरब समुदायों में मतदान पर संदेह जताने के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “हमें अरब समाज में मतदान पर संदेह नहीं करना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे हमें इजराइली समाज के किसी अन्य समूह के मतदान पर भी संदेह नहीं करना चाहिए।” सोहलबर्ग ने कहा, “मतों की गिनती पूरी होने पर भी मतभेद खत्म होना जरूरी नहीं है, लेकिन नतीजे हम सभी पर लागू होते हैं।” इस बीच, हर्जोग ने कहा कि उन्हें शिन बेट सुरक्षा एजेंसी, पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारियों के काम पर “पूरा भरोसा” है, जो चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से संयम बरतने का अनुरोध करते हुए कहा, “चुनाव परिणामों पर बाहरी ताकतों के विध्वंसक प्रभाव की किसी भी आशंका की शिन बेट और पुलिस द्वारा गहन जांच की जानी चाहिए।” हर्जोग ने इजराइल के अरब समुदाय को “बदनाम” करने के खिलाफ भी चेतावनी दी।

उन्होंने हाल ही में सुनी गई नस्लवादी टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा, “... इजराइल के अरब समाज के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है। जीवन के हर क्षेत्र में देश के लिए उनके योगदान और मुख्यधारा में शामिल होने की उनकी इच्छा का मैं कद्र करता हूं।” उन्होंने कहा, “चुनाव खत्म हो चुके हैं। अब वास्तविकता का सामना करने का समय है।” राष्ट्रपति अब नेसेट के लिए चुने गए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे।

वे यह तय करेंगे कि पार्टियों के समर्थन के आधार पर सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए। हर्ज़ोग द्वारा चुने गए उम्मीदवार के पास गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन होंगे; यदि राष्ट्रपति को लगता है कि और समय की जरूरत है, तो वे 14 दिन का अतिरिक्त समय दे सकते हैं। सीईसी ने एक बयान में कहा, “समीक्षा में ऐसी किसी भी अनियमितता का कोई सबूत नहीं मिला, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर आंच आई हो या नतीजों पर कोई असर पड़ा हो।” न तो नेतन्याहू के गुट को और न ही प्रमुख प्रतिद्वंद्वी व विपक्ष के नेता आइजेनकोट के सहयोगियों के गुट को नयी सरकार बनाने के लिए जरूरी संसदीय बहुमत मिला है।

इससे इन दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच या फिर आइजेनकोट और कुछ अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावना बन गई है। अरब पार्टियों ने 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में नेसेट की 120 में से 19 सीटें जीतीं, जिससे वे संभावित किंगमेकर बन गई हैं। अगर इनमें से कोई भी नेता सरकार नहीं बना पाता है तो अगले साल की शुरुआत में देश में फिर से चुनाव कराए जाएंगे।

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Trump के चहेते कैंडि‍डेट्स की करारी हार, SIR पर सवाल उठाने वाली प्रमिला समेत इन भारतवंशियों ने किया कमाल

अमेरिका की राजनीति में भारतीय प्रवासियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिसका ताज़ा प्रमाण हालिया मिडटर्म चुनावों के नतीजों में देखने को मिला। मिड टर्म इलेक्शन में डॉनल्ड ट्रंप ने अपने चहेते कैंडिडेट्स के लिए पूरी ताकत लगा दी। खुद प्रचार किया, रैलियां की, जनता से उन्हें जिताने की अपील की। लेकिन 3 नवंबर को आए अमेरिकी टर्म चुनाव के नतीजों ने ट्रंप को बड़ा झटका दिया। टैक्स, ओहायो और दक्षिणी कैरोलना में उनके समर्थन वाले तीनों उम्मीदवार चुनाव हार गए। इनमें भारतीय मूल के विवेक रामस्वामी भी शामिल हैं। वहीं टेक्सेस में डेमोक्रेट जेम्स टेलरिको ने रिपब्लिकन केन पैक्स्टन को हराकर इतिहास रच दिया। दक्षिणी कैरोलना में एनी एंड्र्यूस ने रिपब्लिकन डार्लिन ग्राहम को शिकस्त दी। यह तीनों नतीजे इसलिए अहम हैं क्योंकि इन राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी की मजबूत पकड़ मानी जाती है और इन तीनों उम्मीदवारों को ट्रंप का समर्थन हासिल था। अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर बनकर इतिहास रचा, वहीं अमी बेरा और प्रमिला जयपाल ने भी संसद में अपनी पकड़ मजबूत की। इनमें प्रमिला जयपाल का नाम विशेष रूप से ध्यान खींचता है, जो भारत सरकार की विभिन्न नीतियों और प्रक्रियाओं पर अपनी मुखर टिप्पणियों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रही हैं।

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टैक्सेस की। इसे रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने यहां करीब 14% वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। इस बार यहां अमेरिकी सेनेट की सीट के लिए मुकाबला था। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टेलरिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्स्टन को हरा दिया। टेलरिको को करीब 56% वोट मिले। जबकि पैक्स्टन को करीब 43% वोट मिले। 37 साल के जेम्स टेलरिको टेक्सस की विधानसभा के सदस्य और पूर्व शिक्षक हैं। उन्होंने महंगाई, भ्रष्टाचार और राजनीति [संगीत] में अमीरों के बढ़ते प्रभाव को चुनावी मुद्दा बनाया। वहीं केन पैक्सन टैक्सेस के अटर्नी जनरल रह चुके हैं। उनके उम्मीदवारों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में भी मतभेद थे। उन पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। पैक्स्टन ने हार स्वीकार कर ली। ट्रंप को दूसरा बड़ा झटका ओहा में लगा। यहां ट्रंप के करीबी माने जाने वाले भारतीय मूल के विवेक रामस्वामी गवर्नर का चुनाव हार गए। उनके सामने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार एमी एक्सन थी। 2024 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी पेश की थी। बाद में ट्रंप का समर्थन करते हुए अपनी दावेदारी वापस ले ली। इसके बाद वह ट्रंप के करीबी नेताओं में गिने जाने लगे। इस चुनाव में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस  ने भी रामस्वामी के लिए प्रचार किया था। लेकिन एमी एक्सन ने उन्हें हरा दिया। एकन ओहायो की 20 साल में पहली डेमोक्रेटिक गवर्नर और इस पद पर चुनी जाने वाली पहली महिला बनी है। तीसरी हार दक्षिणी कैरोलना में हुई। यहां रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्लिंग ग्राहम को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एनी एंड्र्यूस ने हरा दिया। डार्लिंग ग्राहम को ट्रंप का समर्थन हासिल था। वह दिवंगत रिपब्लिकन सेनेटर लिंसे ग्राहम की बहन है। लिंसे ग्राहम की जुलाई 2026 में मौत के बाद उन्हें इस सीट पर नियुक्त किया गया था। बाद में उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी का प्राइमरी चुनाव भी जीता। 

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डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अमी बेरा ने कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराकर जीत दर्ज की है। 61 वर्षीय अमी बेरा अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना आठवां कार्यकाल शुरू करेंगे। चेन्नई में जन्मी प्रमिला जयपाल ने वॉशिंगटन के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है। 1965 में जन्मीं प्रमिला महज 16 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए अमेरिका चली गई थीं। उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए किया।अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने 14 अक्टूबर 2026 को भारत में चल रहे SIR पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत सरकार वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटाने की कोशिश कर रही है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर को हराया। वह जनवरी में नए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के गठन के साथ अपना कार्यकाल शुरू करेंगी। भारतीय मूल की अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में दोबारा जीत दर्ज की है। वह गवर्नर वेस मूर के साथ मिलकर अपना दूसरा कार्यकाल संभालेंगी। भारतीय मूल के प्रमुख अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत दर्ज की है। वे डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हैं। 50 वर्षीय रो खन्ना का निर्वाचन क्षेत्र सिलिकॉन वैली का अहम हिस्सा है। डेमोक्रेटिक सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है। 40 वर्षीय सुहास ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना दूसरा कार्यकाल पक्का किया।

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