फुर्ती हो तो ऐसी! विराट ने दिखाई चीते जैसी तेजी, सिर्फ एक हाथ से कर डाला न्यूजीलैंड के बल्लेबाज का काम तमाम
Virat Kohli : टीम इंडिया के 37 साल के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने ऑकलैंड के मैदान पर एक हैरतअंगेज कैच लेकर सभी फैंस को अपना दीवाना बना दिया है. विराट कोहली ने न्यूज़ीलैंड बनाम भारत पहले ODI में अंशुल कंबोज की गेंद पर नाथन स्मिथ का एक हाथ से शानदार कैच लिया
WHAT A STUNNER CATCH BY VIRAT KOHLI.???? pic.twitter.com/APjxxkaAP5
— Tanuj (@ImTanujSingh) November 4, 2026
ट्रंप की कुर्सी रहेगी सलामत, लेकिन कैसे छिन सकती है फैसले लेने की ताकत? मिडटर्म चुनाव के समझें मायने
अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं. इन चुनावों में अगर ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ता है तो उन्हें राष्ट्रपति पद छोड़ना नहीं होगा. हालांकि, संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत बढ़ने से उनकी सरकार के लिए अगले दो साल काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. विपक्ष ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर सवाल उठा सकता है. सरकारी नीतियों और खर्च की जांच के साथ उनके करीबियों और कारोबारी हितों को लेकर भी पड़ताल की मांग उठ सकती है. इतना ही नहीं, ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश भी हो सकती है.
संसद में कमजोर हो सकती है ट्रंप की पकड़
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद मिडटर्म चुनाव कराए जाते हैं. इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक तिहाई सीटों पर मतदान होता है. इसके नतीजे तय करते हैं कि संसद के दोनों सदनों में किस पार्टी का दबदबा रहेगा. अगर डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो उन्हें कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों का नियंत्रण मिल सकता है. इसके बाद वे ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच कर सकते हैं. सरकारी अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाने, दस्तावेज मांगने और जरूरत पड़ने पर समन जारी करने जैसे अधिकारों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
ऐसी स्थिति में ट्रंप के लिए अपनी नीतियों को आसानी से लागू करना मुश्किल हो सकता है. उन्हें संसद में विपक्ष के सवालों और विरोध का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, चुनावी हार से राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकार खत्म नहीं होंगे. वे अपने अधिकार क्षेत्र में कार्यकारी आदेश जारी कर सकेंगे.
ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई का खतरा
मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स को बढ़त मिलने पर ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की चर्चा भी तेज हो सकती है. अमेरिकी संविधान के तहत प्रतिनिधि सभा को राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार है. इसके लिए सदन में साधारण बहुमत की जरूरत होती है. हालांकि, महाभियोग का प्रस्ताव पारित होने का मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति को तुरंत पद छोड़ना पड़ेगा. इसके बाद सीनेट में मुकदमे जैसी सुनवाई होती है. राष्ट्रपति को दोषी ठहराकर पद से हटाने के लिए सीनेट में दो तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है. इसलिए डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर भी लेते हैं तो ट्रंप को पद से हटाना आसान नहीं होगा. महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करना और राष्ट्रपति को पद से हटाना दो अलग-अलग बातें हैं.
ईरान के साथ युद्ध और सैन्य खर्च भी बन सकते हैं मुद्दा
ट्रंप के लिए ईरान के साथ जारी युद्ध भी राजनीतिक चुनौती बन सकता है. अगर डेमोक्रेट्स संसद में मजबूत होते हैं तो वे सैन्य कार्रवाई, युद्ध से जुड़े फैसलों और उस पर होने वाले खर्च को लेकर सरकार से जवाब मांग सकते हैं. रक्षा बजट और सैन्य अभियानों के लिए अतिरिक्त फंडिंग पर संसद में बहस तेज हो सकती है. डेमोक्रेट्स अतिरिक्त सैन्य खर्च को मंजूरी देने में अड़चन पैदा कर सकते हैं. इससे ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं होगा कि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार होते ही युद्ध के लिए मिलने वाली रकम अपने आप बंद हो जाएगी. विदेश नीति और सैन्य कार्रवाई से जुड़े कई अधिकार राष्ट्रपति के पास बने रहेंगे.
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एलन मस्क और उनकी कंपनियां भी आ सकती हैं जांच के दायरे में
मिडटर्म चुनाव का असर दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क पर भी पड़ सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ट्रंप से जुड़े कारोबार और सरकारी ठेकों की पड़ताल की मांग उठा सकते हैं. इस दायरे में मस्क की कंपनियां टेस्ला और स्पेसएक्स भी आ सकती हैं. इन कंपनियों को मिलने वाले सरकारी ठेकों, कारोबारी समझौतों और नियामक मामलों पर सवाल उठाए जा सकते हैं. इसके अलावा ट्रंप प्रशासन में सरकारी खर्च कम करने से जुड़ी संस्था DOGE में मस्क की भूमिका भी जांच और राजनीतिक बहस का विषय बन सकती है।हालांकि, फिलहाल मस्क की कंपनियों को लेकर किसी जांच में दोष साबित होने की बात सामने नहीं आई है. जांच के दायरे में किन कंपनियों या मामलों को शामिल किया जाएगा, इसे लेकर भी कोई अंतिम सूची तय नहीं है.
टैरिफ और विदेश नीति पर ट्रंप के पास रहेंगे अधिकार
मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बावजूद ट्रंप के सभी अधिकार खत्म नहीं होंगे. वे टैरिफ, व्यापार और विदेश नीति से जुड़े कई फैसले लेते रहेंगे. लेकिन घरेलू नीतियों, सरकारी बजट और बड़े खर्चों से जुड़े मामलों में उन्हें विपक्ष के साथ सहमति बनाने की जरूरत पड़ सकती है. अगर सीनेट में भी डेमोक्रेट्स का बहुमत हो जाता है तो ट्रंप के लिए नए अधिकारियों और न्यायाधीशों की नियुक्तियों को मंजूरी दिलाना मुश्किल हो सकता है. कुल मिलाकर, मिडटर्म चुनाव में हारने से डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रपति की कुर्सी नहीं जाएगी, लेकिन संसद में डेमोक्रेट्स का दबदबा बढ़ने पर उनकी सरकार की राह कठिन हो सकती है. उन्हें अपने फैसलों का जवाब देना पड़ सकता है और प्रशासनिक कामकाज से लेकर बजट तक कई मोर्चों पर विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है.
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