ट्रंप की कुर्सी रहेगी सलामत, लेकिन कैसे छिन सकती है फैसले लेने की ताकत? मिडटर्म चुनाव के समझें मायने
अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं. इन चुनावों में अगर ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ता है तो उन्हें राष्ट्रपति पद छोड़ना नहीं होगा. हालांकि, संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत बढ़ने से उनकी सरकार के लिए अगले दो साल काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. विपक्ष ट्रंप प्रशासन के फैसलों पर सवाल उठा सकता है. सरकारी नीतियों और खर्च की जांच के साथ उनके करीबियों और कारोबारी हितों को लेकर भी पड़ताल की मांग उठ सकती है. इतना ही नहीं, ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश भी हो सकती है.
संसद में कमजोर हो सकती है ट्रंप की पकड़
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद मिडटर्म चुनाव कराए जाते हैं. इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक तिहाई सीटों पर मतदान होता है. इसके नतीजे तय करते हैं कि संसद के दोनों सदनों में किस पार्टी का दबदबा रहेगा. अगर डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो उन्हें कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों का नियंत्रण मिल सकता है. इसके बाद वे ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच कर सकते हैं. सरकारी अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाने, दस्तावेज मांगने और जरूरत पड़ने पर समन जारी करने जैसे अधिकारों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
ऐसी स्थिति में ट्रंप के लिए अपनी नीतियों को आसानी से लागू करना मुश्किल हो सकता है. उन्हें संसद में विपक्ष के सवालों और विरोध का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, चुनावी हार से राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकार खत्म नहीं होंगे. वे अपने अधिकार क्षेत्र में कार्यकारी आदेश जारी कर सकेंगे.
ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई का खतरा
मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स को बढ़त मिलने पर ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की चर्चा भी तेज हो सकती है. अमेरिकी संविधान के तहत प्रतिनिधि सभा को राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार है. इसके लिए सदन में साधारण बहुमत की जरूरत होती है. हालांकि, महाभियोग का प्रस्ताव पारित होने का मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति को तुरंत पद छोड़ना पड़ेगा. इसके बाद सीनेट में मुकदमे जैसी सुनवाई होती है. राष्ट्रपति को दोषी ठहराकर पद से हटाने के लिए सीनेट में दो तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है. इसलिए डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर भी लेते हैं तो ट्रंप को पद से हटाना आसान नहीं होगा. महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करना और राष्ट्रपति को पद से हटाना दो अलग-अलग बातें हैं.
ईरान के साथ युद्ध और सैन्य खर्च भी बन सकते हैं मुद्दा
ट्रंप के लिए ईरान के साथ जारी युद्ध भी राजनीतिक चुनौती बन सकता है. अगर डेमोक्रेट्स संसद में मजबूत होते हैं तो वे सैन्य कार्रवाई, युद्ध से जुड़े फैसलों और उस पर होने वाले खर्च को लेकर सरकार से जवाब मांग सकते हैं. रक्षा बजट और सैन्य अभियानों के लिए अतिरिक्त फंडिंग पर संसद में बहस तेज हो सकती है. डेमोक्रेट्स अतिरिक्त सैन्य खर्च को मंजूरी देने में अड़चन पैदा कर सकते हैं. इससे ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं होगा कि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार होते ही युद्ध के लिए मिलने वाली रकम अपने आप बंद हो जाएगी. विदेश नीति और सैन्य कार्रवाई से जुड़े कई अधिकार राष्ट्रपति के पास बने रहेंगे.
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एलन मस्क और उनकी कंपनियां भी आ सकती हैं जांच के दायरे में
मिडटर्म चुनाव का असर दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क पर भी पड़ सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ट्रंप से जुड़े कारोबार और सरकारी ठेकों की पड़ताल की मांग उठा सकते हैं. इस दायरे में मस्क की कंपनियां टेस्ला और स्पेसएक्स भी आ सकती हैं. इन कंपनियों को मिलने वाले सरकारी ठेकों, कारोबारी समझौतों और नियामक मामलों पर सवाल उठाए जा सकते हैं. इसके अलावा ट्रंप प्रशासन में सरकारी खर्च कम करने से जुड़ी संस्था DOGE में मस्क की भूमिका भी जांच और राजनीतिक बहस का विषय बन सकती है।हालांकि, फिलहाल मस्क की कंपनियों को लेकर किसी जांच में दोष साबित होने की बात सामने नहीं आई है. जांच के दायरे में किन कंपनियों या मामलों को शामिल किया जाएगा, इसे लेकर भी कोई अंतिम सूची तय नहीं है.
टैरिफ और विदेश नीति पर ट्रंप के पास रहेंगे अधिकार
मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बावजूद ट्रंप के सभी अधिकार खत्म नहीं होंगे. वे टैरिफ, व्यापार और विदेश नीति से जुड़े कई फैसले लेते रहेंगे. लेकिन घरेलू नीतियों, सरकारी बजट और बड़े खर्चों से जुड़े मामलों में उन्हें विपक्ष के साथ सहमति बनाने की जरूरत पड़ सकती है. अगर सीनेट में भी डेमोक्रेट्स का बहुमत हो जाता है तो ट्रंप के लिए नए अधिकारियों और न्यायाधीशों की नियुक्तियों को मंजूरी दिलाना मुश्किल हो सकता है. कुल मिलाकर, मिडटर्म चुनाव में हारने से डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रपति की कुर्सी नहीं जाएगी, लेकिन संसद में डेमोक्रेट्स का दबदबा बढ़ने पर उनकी सरकार की राह कठिन हो सकती है. उन्हें अपने फैसलों का जवाब देना पड़ सकता है और प्रशासनिक कामकाज से लेकर बजट तक कई मोर्चों पर विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है.
'रामायण' से डेब्यू करने जा रही रणबीर-आलिया की राहा, एक्टर ने खुद खास सीन का किया खुलासा
Raha Cameo in Ramayana: नितेश तिवारी की मच अवेटेड फिल्म 'रामायणम्: पार्ट वन' को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट बनी हुई है. फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभाते नजर आएंगे. वहीं साई पल्लवी माता सीता और यश रावण के किरदार में दिखाई देंगे. इन दिनों रणबीर कपूर फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं. इसी बीच एक्टर ने अपनी बेटी राहा कपूर को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने फैंस को हैरान कर दिया है. रणबीर ने बताया कि राहा कई बार फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर पहुंची थीं. धीरे-धीरे उन्हें भगवान राम की कहानी में दिलचस्पी होने लगी. इतना ही नहीं रणबीर ने ये भी खुलासा किया कि उनकी बेटी राहा ने फिल्म में एक छोटा सा कैमियो भी किया है.
'रामायणम्' के सेट पर कई बार पहुंची थीं राहा कपूर
रणबीर कपूर ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि फिल्म 'रामायणम्' की शूटिंग के समय उनकी बेटी राहा कई बार सेट पर आई थीं. उस दौरान राहा ने अपने पिता को भगवान राम का किरदार निभाते हुए करीब से देखा. फिल्म की कहानी और सेट का माहौल उनके लिए काफी खास बन गया था. धीरे-धीरे राहा को भी इस पौराणिक कहानी में दिलचस्पी होने लगी. रणबीर के मुताबिक, वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की कहानी का राहा पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है. वो भगवान राम की कहानियों से काफी जुड़ गई थीं. एक्टर के लिए ये अनुभव भी बेहद खास रहा क्योंकि उन्हें अपनी बेटी के साथ अपने काम की दुनिया को साझा करने का मौका मिला.
फिल्म में राहा कपूर ने भी किया छोटा सा कैमियो
रणबीर कपूर ने बातचीत के दौरान एक और दिलचस्प बात बताई. उन्होंने खुलासा किया कि उनकी बेटी राहा का भी फिल्म 'रामायणम्' में एक छोटा सा कैमियो है. राहा ने अपने पिता के साथ एक ऐसे शॉट में काम किया है, जिसमें साई पल्लवी और रवि दुबे भी मौजूद थे. इस तरह राहा के लिए ये सिर्फ अपने पिता की फिल्म के सेट पर जाने का अनुभव नहीं रहा, बल्कि उन्हें कैमरे के सामने आने का मौका भी मिला. रणबीर के इस खुलासे के बाद फैंस के बीच फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट और बढ़ गई है. अब दर्शक ये जानने के लिए भी एक्साइटेड हैं कि आखिर फिल्म में राहा किस सीन में नजर आएंगी.
रणबीर कपूर की जिंदगी की रोशनी हैं बेटी राहा
इंटरव्यू के दौरान रणबीर कपूर से उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी और रोशनी के बारे में भी पूछा गया. इस पर एक्टर ने बिना किसी देरी के अपनी बेटी राहा का नाम लिया. रणबीर ने बताया कि राहा की मौजूदगी उनकी जिंदगी को बेहद खूबसूरत बनाती है. एक्टर ने कहा, 'मेरे लिए, निश्चित रूप से मेरी बेटी. ये उनकी चौथी दिवाली है. दिवाली से दो दिन पहले यानी 6 नवंबर को उनका जन्मदिन है. इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि उसे ढेर सारा आशीर्वाद मिले और उसके आस-पास अच्छी एनर्जी और सकारात्मकता बनी रहे.'
राहा के जन्मदिन और फिल्म की रिलीज का खास कनेक्शन
रणबीर कपूर के लिए नवंबर का महीना इस बार बेहद खास होने वाला है. इसकी वजह सिर्फ उनकी फिल्म 'रामायणम्' की रिलीज नहीं, बल्कि उनकी बेटी राहा का जन्मदिन भी है. फिल्म 5 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है, जबकि राहा का जन्मदिन 6 नवंबर को है. यानी फिल्म की रिलीज के ठीक अगले दिन रणबीर और आलिया अपनी बेटी का चौथा जन्मदिन मनाएंगे.
गौरतलब है कि राहा का जन्म 6 नवंबर 2022 को हुआ था. रणबीर ने बताया कि 'रामायणम्' की शूटिंग के दौरान ही वो पिता बने थे. ऐसे में इस फिल्म से उनकी कई निजी यादें भी जुड़ी हुई हैं. एक तरफ पर्दे पर वो भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनकी बेटी भी इस कहानी और फिल्म के सफर का हिस्सा बन गई हैं.
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