केंद्र सरकार ने एलपीजी की जमाखोरी को रोकने के लिए सिलेंडर बुकिंग की अवधि बढ़ाई
नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। वैश्विक अस्थिरता के समय में दुनिया में बढ़ती प्राकृतिक गैस की कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया। इसकी वजह जमाखोरी को रोकना है।
अमेरिका, इजरायल- ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच बाजार में घबराहट में खरीदारी के संकेत मिलने के बाद केंद्र ने यह कदम उठाया है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि देश में एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है और स्टॉक को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के उपाय के रूप में एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग का समय बढ़ा दिया गया है।
यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंका से बुकिंग बढ़ने से मांग में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
एक अधिकारी ने बताया कि औसतन परिवार एक वर्ष में 14.2 किलोग्राम के 7-8 एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं और सामान्यतः उन्हें 6 सप्ताह से कम समय में सिलेंडर रिफिल कराने की आवश्यकता नहीं होती है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की जाएगी। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कंपनियां फिलहाल मौजूदा लागत दबाव को वहन करेंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार वैश्विक तेल बाजारों पर कड़ी नजर रख रही है, लेकिन फिलहाल खुदरा ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है।
इसके अतिरिक्त, केंद्र ने सोमवार को संसद को सूचित किया गया कि भारत के पास वर्तमान में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की कुल 74 दिनों की क्षमता है, जो भू-राजनीतिक संघर्ष जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में आपूर्ति में होने वाली रुकावटों से निपटने में सहायक हो सकती है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा को लिखित उत्तर में बताया, “सरकार ने 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) की कुल क्षमता वाली रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सुविधाएं स्थापित की हैं, जो भू-राजनीतिक संघर्ष जैसे अल्पकालिक आपूर्ति संकटों के लिए एक बफर के रूप में कार्य कर सकती हैं। यह लगभग 9.5 दिनों की कच्चे तेल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए है। इसके अतिरिक्त, देश में तेल विपणन कंपनियों के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की 64.5 दिनों की क्षमता है। इसलिए, कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण की वर्तमान कुल राष्ट्रीय क्षमता 74 दिनों की है।”
--आईएएनएस
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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई के घायल होने का दावा, ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए सच्चाई
Mojtaba Khamenei: ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई एक हमले में घायल हो गए हैं. यह दावा The Times of Israel की रिपोर्ट के हवाले से किया गया है. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वे किस हमले में घायल हुए हैं और ईरान की ओर से भी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. हमारे वरिष्ठ संवाददाता मधुरेंद्र कुमार ने ग्राउंड जीरो से इस दावे से जुड़ी सच्चाई बताई है.
जंग के बीच सुप्रीम लीडर बने मुजतबा खामनेई
दरअसल हाल ही में ईरान में 88 सदस्यीय Assembly of Experts ने मोजतबा खामनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना है. वे ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे हैं. बताया जाता है कि जंग और हमलों के बीच यह फैसला लिया गया, जिसे ईरान की आक्रामक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
मुजतबा खामनेई की उम्र करीब 56 साल बताई जा रही है और वे लंबे समय से ईरान की सत्ता और धार्मिक व्यवस्था में प्रभावशाली माने जाते हैं. सुप्रीम लीडर बनने के बाद उन्होंने देश की सुरक्षा और ताकत को मजबूत करने का संदेश दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान की नई नेतृत्व व्यवस्था मिडिल ईस्ट की राजनीति को और प्रभावित कर सकती है. फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि मुजतबा खामनेई की स्थिति क्या है और ईरान इस संकट से कैसे निपटेगा.
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