Solar Panel Benefits: AC-कूलर के मौसम में कैसे घटेगा बिजली बिल? जानिए सोलर पैनल लगाना कितना फायदेमंद है
Solar Panel Benefits: गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोगों के घरों में एसी और कूलर चलने लगते हैं. इससे बिजली की खपत तेजी से बढ़ जाती है और महीने के अंत में आने वाला बिजली बिल भी काफी ज्यादा हो जाता है. यही वजह है कि आजकल बहुत से लोग अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने के बारे में सोच रहे हैं.
लेकिन कई लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि क्या सोलर पैनल लगाने से सच में बिजली का बिल कम होता है या यह सिर्फ प्रचार का तरीका है. अगर आप भी अपने घर में सोलर सिस्टम लगाने की योजना बना रहे हैं तो उससे पहले इसके काम करने का तरीका और फायदे समझ लेना जरूरी है.
सोलर पैनल कैसे काम करते हैं?
सोलर पैनल सूरज की रोशनी से बिजली बनाते हैं. पैनल में फोटोवोल्टिक (PV) सेल लगे होते हैं, जो सूर्य की ऊर्जा को बिजली में बदलने का काम करते हैं. यह बिजली इन्वर्टर के जरिए घर में इस्तेमाल होने वाली बिजली में बदल जाती है. इस बिजली से घर के पंखे, लाइट, टीवी, फ्रिज और अन्य उपकरण आसानी से चलाए जा सकते हैं. अगर पैनल ज्यादा बिजली बनाते हैं तो कुछ सिस्टम में अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भी भेजा जा सकता है.
क्या सोलर पैनल से बिजली का बिल कम होता है?
सोलर पैनल लगाने का सबसे बड़ा फायदा यही है कि इससे बिजली का बिल कम हो सकता है. दिन के समय जब सूरज की रोशनी होती है, तब घर की जरूरत की बिजली सोलर पैनल से ही मिलने लगती है. ऐसे में बिजली कंपनी से कम बिजली लेनी पड़ती है. जब बिजली की खपत ग्रिड से कम होगी तो जाहिर है कि बिल भी कम आएगा. अगर सही क्षमता का सोलर सिस्टम लगाया जाए तो कई घरों में बिजली बिल काफी कम हो जाता है.
सरकार भी दे रही है सब्सिडी
सोलर पैनल लगाने में शुरुआती खर्च थोड़ा ज्यादा होता है, लेकिन इसे कम करने के लिए सरकार भी मदद करती है. केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारें सोलर सिस्टम लगाने पर सब्सिडी देती हैं. पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. इस योजना का मकसद ज्यादा से ज्यादा घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में अब तक करीब 20 लाख से ज्यादा रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं. इससे लाखों परिवारों को बिजली बिल में राहत मिल रही है.
लंबे समय तक मिलता है फायदा
सोलर पैनल एक बार लगाने के बाद कई सालों तक बिजली बनाते रहते हैं. आमतौर पर इनकी उम्र 20 से 25 साल तक मानी जाती है. इस दौरान सिर्फ थोड़ी बहुत मेंटेनेंस की जरूरत होती है. यानी अगर शुरुआत में थोड़ा निवेश किया जाए तो लंबे समय में बिजली के बिल में अच्छी बचत हो सकती है. यही वजह है कि अब शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों और गांवों में भी लोग सोलर पैनल लगाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
सोलर सिस्टम लगाने से पहले क्या ध्यान रखें?
अगर आप सोलर पैनल लगवाने की सोच रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सबसे पहले अपने घर की बिजली खपत का अंदाजा लगाएं. उसी के हिसाब से सही क्षमता का सोलर सिस्टम लगवाना चाहिए. इसके अलावा अच्छी कंपनी के पैनल और भरोसेमंद इंस्टॉलेशन एजेंसी चुनना भी जरूरी है. सही तरीके से लगाया गया सोलर सिस्टम ही बेहतर बिजली उत्पादन कर सकता है.
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वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश सरकार का बड़ा फैसला, देशभर के विश्वविद्यालय किए बंद
ढाका, 9 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। मौजूदा संकट को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने पूरे देश में विश्वविद्यालयों को बंद करने का आदेश जारी किया है।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, विश्वविद्यालयों में छुट्टियां पवित्र ईद-उल-फितर की छुट्टियों के अंत तक जारी रहेंगी, जैसा कि विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर में निर्धारित है।
बांग्लादेश के बंगाली डेली अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, “वैश्विक संकट से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बिजली और ऊर्जा की बचत करना आवश्यक है। इसके लिए सभी सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बिजली और ऊर्जा के उपयोग में जिम्मेदारी और दक्षता दिखानी होगी।”
शिक्षा मंत्रालय ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए 11 बिंदुओं वाले निर्देशों को लागू करने का भी आह्वान किया है। इनमें वाहनों के उपयोग को सीमित करना भी शामिल है।
यह संकट पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से पैदा हुआ है, जो 28 फरवरी से और बढ़ गया है। उस दिन संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल, अमेरिकी हितों और उन कई खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे वेस्ट एशिया में लड़ाई से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में तनाव बना हुआ है, बांग्लादेश को इसके नतीजे महसूस होने लगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सप्ताह के अंत में ढाका, चट्टोग्राम और अन्य स्थानों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। संभावित कमी के डर से वाहन चालक ईंधन भरवाने के लिए दौड़ पड़े।
द डेली स्टार के एडिटोरियल में कहा गया, “कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं, जहां चालक अपने टैंक भरवाने के लिए घंटों इंतजार कर रहे थे। देश ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है, खासकर मध्य पूर्व से आने वाले फ्यूल ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) पर। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से परिवहन, उद्योग और घरों के लिए आपूर्ति में बाधा की चिंता बढ़ गई है।”
इसमें आगे कहा गया, हमारे कच्चे तेल के इंपोर्ट का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जरूरी रास्ते से गुजरता है। हालांकि, ज्यादातर रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट दूसरे एशियाई सप्लायर से लिए जाते हैं, लेकिन ग्लोबल एनर्जी फ्लो में अनिश्चितता ने कंज्यूमर की चिंता बढ़ा दी है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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