सऊदी अरब में एक आवासीय परिसर पर हुए मिसाइल हमले में किसी भी भारतीय की मौत नहीं हुई है। रियाद में भारतीय दूतावास ने सोमवार को यह जानकारी दी।
दूतावास ने कहा कि रविवार को इस घटना में घायल हुए एक भारतीय नागरिक का सरकारी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राहत की बात है कि कल शाम अल खर्ज में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना में किसी भी भारतीय की जान नहीं गई।’’
इसने बताया कि वह इस मामले में संबंधित सऊदी प्रशासन के संपर्क में है।
काउंसलर (सामुदायिक कल्याण) वाई साबिर ने रविवार रात अल खर्ज का दौरा किया और घटना में घायल हुए भारतीय नागरिक से मुलाकात की।
दूतावास ने कहा, ‘‘उसका (घायल व्यक्ति का) अल खर्ज के एक सरकारी अस्पताल में इलाज हो रहा है।’’
रविवार को सऊदी प्रशासन ने बताया था कि अल खर्ज में रखरखाव और सफाई से संबंधित एक कंपनी के आवासीय परिसर पर मिसाइल गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक भारतीय नागरिक था।
हालांकि, सऊदी प्रशासन ने मृतकों की पहचान नहीं बताई थी।
सोमवार को ‘सऊदी सिविल डिफेंस’ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘...सभी अंतिम प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, यह निर्धारित किया गया है कि दो मृतक बांग्लादेशी हैं, (11) घायल व्यक्ति भी बांग्लादेशी हैं और एक घायल व्यक्ति भारतीय है।’’
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी से ईरान पर संयुक्त हमला शुरू किया था। यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर नए समझौते के लिए दबाव बढ़ाने के बाद कई दिनों से की जा रही तैयारियों के बाद हुआ। ईरान की जवाबी कार्रवाई से युद्ध पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया।
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ईरान ने अपनी मिसाइलों पर ब्बैक या मुस्तबा लिख दिया गया है ल और इसके बाद ये मिसाइलें दागी जा रही है। ईरान के अंद इजरायल को लेकर एक अलग ही जोश पैदा हो गया है। वहां पर नए सुप्रीम लीडर का ऐलान हुआ है और उनका नाम है आयतुल्लाह सैयद मोजतबा को कमान सौंप दी गई है और इसके बाद से लगातार एक युद्ध का एक अलग ही माहौल हो गया। 19वां रमजान बहुत खास है ईरान के लिए भी और मुसलमानों के एक बड़े तबके के लिए और इसी पर नए सुप्रीम लीडर का ऐलान किया गया है। 19वें रमजान में शब-ए-कद्र (मुकद्दस रात) की तलाश शुरू होती है। यह दिन शिया मुसलमानों के लिए हजरत अली पर हमले की याद में 'गिलीम के जुलूस' (मातम) और इबादत के लिए बेहद अहम माना जाता है। ये 10 रातें बहुत अहम होती हैं। तो ये 19वीं रमजान पहली रात थी और 19वीं रमजान को इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि इसी दिन हजरत अली पर हमला हुआ था।
कर्बला में इमाम हुसैन का ये रोजा है वहां पर बड़े पैमाने पर लोग इकट्ठा थे और सब ने एक साथ जो है नारा हैदरी बुलंद किया या अली या अली और तस्वीरें में भी नजर आया। मतलब ये एक मैसेज है। हम ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं ना कहीं लोगों में एक नया जोश भर गया है। उन्हें एक नया लीडर मिल गया है और ये पूरा संकेत है। ये पैगाम है कि कर्बला फिर से तैयार हो रहा है। फिर से वो जज्बा बन गया है और हम नहीं झुकेंगे।
एक इंच भी कब्जा नहीं होने देगा ईरान
अमेरिका और इस्राइल के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दबाव के कारण ईरान ने पश्चिम एशिया के अपने पड़ोसी देशों से माफी मांगी है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ कहा कि उनका देश किसी भी हमले के सामने झुकेगा नहीं और अपनी जमीन का एक इंच भी कब्जा नहीं होने देगा। सरकारी मीडिया के अनुसार पेजेशकियान ने अस्पताल में घायल नागरिकों से मुलाकात के बाद कहा कि ईरान अपने ऊपर हमला करने वालों के खिलाफ मजबूती से खड़ा है और पूरी ताकत से जवाब देगा।
छह महीने तक लड़ने का दावा
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्ड्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि ईरान की सेना लंबे समय तक युद्ध लड़ने की क्षमता रखती है। अब तक 200 से ज्यादा अमेरिकी और इस्त्राइली ठिकानों पर हमले किए। मौजूदा रफ्तार से छह महीने तक युद्ध जारी रखने की क्षमता है। अब तक ज्यादातर पहली और दूसरी पीढ़ी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया। कहा कि युद्ध के अगले चरण में अधिक उन्नत और लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सुप्रीम लीडर के हाथों में कमान
ईरान की सर्वोच्च धार्मिक संस्था ने अगले सुप्रीम लीडर का चयन कर लिया है।
ट्रंप ने कहा है कि ईरान का अगला सुप्रीम लीडर उनकी मंजूरी के बिना ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा।
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