इजरायल ने युद्ध में घातक केमिकल का किया इस्तेमाल, पूरा गांव तबाह, सैकड़ों लोग तड़प-तड़पकर मरे
ईरान के बाद लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को इजरायल ने जमकर निशाना बनाया है. यहां पर उसने घातक हमले किए हैं. इस दौरान इजरायल पर आरोप है कि उसने जंग में 'गैरकानूनी' रूप से सफेद फॉस्फोरस का प्रयोग किया है. मानवाधिकार संगठन ह्युमन राइट्स वॉच के हवाले से बताया गया है कि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के एक गांव पर व्हाइट फॉस्फोरस वाले गोले दागे हैं. फॉस्फोरस का उपयोग जंग में विवादित माना गया है.
ह्यूमन राइट्स वॉच ने कुछ तस्वीरें जारी की है. इसे वेरिफाई करके कहा गया कि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर गांव के रिहायशी इलाकों में आर्टिलरी का उपयोग करके व्हाइट फॉस्फोरस को दागा है. इससे पहले इजरायली सेना गांव के लोगों को दक्षिणी लेबनान के दर्जनों दूसरे लोगों को खाली करने की चेतावनी दी. ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि इलाके में कितना नुकसान हुआ है.
सफेद फॉस्फोरस क्या है?
सफेद फॉस्फोरस (White Phosphorus) एक खतरनाक रासायनिक है. यह मोम जैसा पीला या सफेद दिखाई देता है. इसमें लहसुन जैसी गंध होती है. इस रसायन के हवा में संपर्क में आने के बाद यह खुद-ब-खुद जलने लगता है. इससे 815 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ सकता है.
मानव शरीर के लिए 50 से 60 डिग्री का तापमान जानलेवा बन जाता है. यह बर्दाश्त के बाहर हो जाता है. जब सफेद फॉस्फोरस मानव शरीर पर गिरता है तो गंभीर प्रभाव होता है. यह त्वचा को गहराई तक जला देता है. हड्डियों तक पहुंच जाता है. इसके साथ दर्दनाक घाव बना देता है. इसे ठीक करना बहुत कठिन है. सफेद फॉस्फोरस के जलने से निकला धुआं सांस में जाकर फेफड़ों पर असर करता है. इससे सांस लेने में काफी तकलीफ होती है. मौत भी हो सकती है.
लोगों सांस लेने में दिक्कत होती है
ह्यूमन राइट्स का कहना है कि इंटरनेशनल कानून के तहत व्हाइट फॉस्फोरस का उपयोग पूरी तरह से गैरकानूनी है. आबादी वाले क्षेत्र में इस गर्म केमिकल को डाला गया. इससे इमारतों में आग लगने का डर होता है. इससे शरीर की हड्डियां तक गल जाती हैं. इस दौरान बचे लोगों को इंफेक्शन का खतरा होता है. लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है. ह्यूमन राइट्स वॉच के लेबनान रिसर्चर रामजी कैस के अनुसार, इजराइली सेना का रिहायशी इलाकों में व्हाइट फॉस्फोरस का गैर-कानूनी उपयोग काफी चिंताजनक है.
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कच्चे तेल में तेजी का असर! सेंसेक्स 1,352 अंक गिरकर बंद; निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपए डूबे
मुंबई, 9 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,352.74 अंक या 1.71 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,566.16 और निफ्टी 422.40 अंक या 1.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,028.05 पर बंद हुआ।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व ऑटो और बैंकिंग शेयरों ने किया। निफ्टी ऑटो 4.10 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 3.97 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल 2.81 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 2.78 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 2.60 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 2.39 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 2.37 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 2.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। केवल निफ्टी आईटी 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट हुई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,127.85 अंक या 1.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ 56,265.50 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 366.70 अंक या 2.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 16,132.20 पर था।
बाजार में उतार-चढ़ाव दर्शाने वाले इंडिया विक्स में भी सत्र के दौरान उछाल देखा गया और यह 17.50 प्रतिशत की तेजी के साथ 23.36 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, एमएंडएम, एसबीआई, इंडिगो, टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, टाइटन, बजाज फिनसर्व, एचयूएल, पावर ग्रिड और बजाज फाइनेंस लूजर्स थे। दूसरी तरफ, सन फार्मा, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक गेनर्स थे।
बाजार में गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केट कैप 8 लाख करोड़ रुपए कम होकर 441 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पहले 449 लाख करोड़ रुपए था।
बाजार में बड़ी गिरावट की वजह कच्चे तेल में तेजी के माना जा रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत में सोमवार को 26 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई है और यह 119 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
कच्चे तेल में कमी की वजह ईराक और कुवैत जैसे देशों की ओर से आउटपुट में कमी करना है। इससे पहले कतर ने एलएनजी के उत्पादन में कमी का ऐलान किया था।
भारतीय बाजार में कमजोरी की एक वजह डॉलर का मजबूत होना है। दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स इस साल के अब तक के सबसे उच्चतम स्तर 99.70 तक पहुंच गया है। डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपए में भी कमजोरी देखी जा रही है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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