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Prabhasakshi NewsRoom: पर्दे के पीछे से Iran की मदद और दुनिया के सामने चुप्पी, क्या ऐसे महाशक्ति बनेगा China?

पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच छिड़ा युद्ध अब वैश्विक सामरिक समीकरणों को प्रभावित करने लगा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा था कि चीन और रूस इस संघर्ष में ईरान का राजनीतिक और अन्य तरीकों से समर्थन कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद किस रूप में दी जा रही है, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ईरान को वास्तविक समय की सामरिक जानकारी और अन्य सहायता उपलब्ध करा सकता है।

हम आपको बता दें कि चीन के लिए ईरान केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण सामरिक सहयोगी भी है। चीन और ईरान दोनों वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने की नीति रखते हैं। इस कारण दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और सामरिक सहयोग लगातार बढ़ा है। चीन की ऊर्जा सुरक्षा में ईरान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन के कुल कच्चे तेल का लगभग 55 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है और इसमें 13 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईरान से मिलता है। ईरान चीन को रियायती दरों पर तेल उपलब्ध कराता है। अनुमान है कि 2021 से अब तक चीन ने ईरान से एक लाख चालीस अरब डॉलर से अधिक का तेल खरीदा है, जिससे अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा मिला। इसके अलावा चीन को कतर, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात से भी तरलीकृत प्राकृतिक गैस मिलती है। इसलिए पश्चिम एशिया की स्थिरता चीन की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत जरूरी है।

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चूंकि ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होरमुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है, इसलिए चीन के ऊर्जा जहाज इसी मार्ग से गुजरते हैं। युद्ध के कारण इस मार्ग में बाधा आने के चलते चीन की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान चाहे तो अन्य देशों की आपूर्ति रोककर चीन को विशेष छूट दे सकता है। इसलिए चीन इस संघर्ष में पूरी तरह निष्क्रिय रहने का जोखिम नहीं उठा सकता।

इसके अलावा, ईरान के ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रम में भी चीन की तकनीकी छाप दिखाई देती है। विशेषज्ञों के अनुसार कई दशकों से चीन ईरान को ऐसे उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराता रहा है जिनका उपयोग सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों में हो सकता है। हम आपको यह भी बता दें कि अमेरिका और इजराइल के हमले से ठीक पहले ईरान का चीन निर्मित सुपरसोनिक जहाज रोधी क्रूज मिसाइल खरीदने के लिए समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया था। इसके अलावा चीनी कंपनियों ने ईरान के दूरसंचार और निगरानी तंत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चेहरे पहचानने वाले कैमरे और इंटरनेट नियंत्रण प्रणाली के विकास में भी चीनी तकनीकी सहायता शामिल रही है।

देखा जाये तो यह युद्ध चीन की वैश्विक रणनीति के लिए भी एक चुनौती बन गया है। चीन लंबे समय से खुद को एक उभरती हुई जिम्मेदार महाशक्ति के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है। लेकिन अमेरिका और इजराइल के हमले ने यह भी दिखाया कि वैश्विक संकटों में निर्णायक सैन्य शक्ति अभी भी अमेरिका के पास है। यहां यह भी काबिलेगौर है कि चीन ने इस हमले की आलोचना जरूर की है, लेकिन वह सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बच रहा है। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि चीन आर्थिक और कूटनीतिक शक्ति तो रखता है, लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में अपने सहयोगियों की रक्षा करने की उसकी क्षमता अभी सीमित है।

इसके अलावा, ईरान का महत्व चीन की ताइवान नीति से भी जुड़ा हुआ है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और भविष्य में उसे अपने साथ मिलाने की नीति पर चलता है। वहीं ताइवान अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी हथियारों पर निर्भर है। यदि अमेरिका को पश्चिम एशिया में लंबे समय तक सैन्य संसाधन और धन खर्च करना पड़ता है तो ताइवान की सुरक्षा के लिए उपलब्ध अमेरिकी संसाधन कम हो सकते हैं। इस दृष्टि से चीन के लिए पश्चिम एशिया में अमेरिका का उलझे रहना रणनीतिक रूप से लाभकारी माना जाता है।

इस प्रकार ईरान का युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की नई दिशा तय करने वाला संकट बन गया है। आने वाले समय में यह संघर्ष अंतरराष्ट्रीय राजनीति, ऊर्जा बाजार और सामरिक गठबंधनों को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

बहरहाल, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग लंबे समय से चीन को दुनिया की सबसे प्रभावशाली शक्ति और स्वयं को वैश्विक नेतृत्व के केंद्र में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा रखते हैं। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक नीतियों और उनके फैसलों से दुनिया भर में जो उथल पुथल मची है, उसने चीन की रणनीति को कठिन स्थिति में ला दिया है। ईरान संकट के दौरान चीन ने खुले तौर पर निर्णायक भूमिका निभाने की बजाय सतर्क दूरी बनाए रखी और पर्दे के पीछे सीमित समर्थन देने की नीति अपनाई। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह धारणा मजबूत हुई है कि चीन अपने हितों की रक्षा के लिए खुलकर दोस्तों का साथ देने की बजाय चुप्पी साधने और परोक्ष तरीके से मदद करने वाला देश है। ऐसी छवि के साथ किसी भी राष्ट्र के लिए वास्तविक वैश्विक नेतृत्व हासिल करना आसान नहीं होता, क्योंकि महाशक्ति वही मानी जाती है जो संकट के समय निर्णायक भूमिका निभाने का साहस और क्षमता दोनों दिखाए। चीन को अमेरिका से सीखना चाहिए कि कैसे उसने रूस-यूक्रेन युद्ध में खुलकर यूक्रेन का साथ दिया।

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US-Israel-Iran War Day 10 Updates: तेहरान के ऑयल रिजर्व और इंफ्रास्ट्रक्चर को इजरायल ने हमलों से दहलाया, जहरीले धुएं के रिसाव से कैंसर का खतरा मंडराया

इजराइल ने मध्य पूर्व में अपने सैन्य अभियान का विस्तार करते हुए दक्षिणी लेबनान, बेरूत और ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें तेहरान स्थित एक तेल भंडारण सुविधा भी शामिल है, जहां से ऊंची-ऊंची लपटें उठती हुई दिखाई दीं, जो पूरे शहर के क्षितिज तक नज़र आ रही थीं। इस हमले ने संघर्ष को और भी गंभीर बना दिया है, क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि संघर्ष के दौरान ईरानी राजधानी में किसी नागरिक औद्योगिक स्थल को निशाना बनाए जाने का यह पहला मामला है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चेतावनी दी है कि युद्ध के अगले चरण में "कई अप्रत्याशित घटनाएँ" हो सकती हैं, जो आगे और सैन्य कार्रवाई का संकेत है। यह बढ़ता हुआ संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ जब इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरानी सैन्य बुनियादी ढांचे पर सिलसिलेवार हमले किए। तब से, इजराइल ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के प्रयास में ईरान, लेबनान और गाजा में सैकड़ों हवाई हमले कर चुका है। इजराइली अधिकारियों का कहना है कि मिसाइल उत्पादन सुविधाओं, रिवोल्यूशनरी गार्ड प्रतिष्ठानों और आंतरिक सुरक्षा कमान केंद्रों सहित हजारों ठिकानों पर हमले किए गए हैं। ईरान की राजधानी तेहरान में तेल भंडारों और बुनियादी ढांचे पर इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के बाद लगातार विस्फोट हो रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जहरीले धुएं और बहाव से कैंसर सहित कई जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

ईरान ने बहरीन में तेल रिफाइनरी पर हमला किया

संयुक्त अरब अमीरात की वायु रक्षा ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को रोका। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बहरीन की बापको तेल रिफाइनरी से घना धुआं उठता देखा गया। टाइम्स ऑफ इज़राइल के अनुसार, सरकार द्वारा पहले यह कहे जाने के बाद कि ईरानी ड्रोन हमले के परिणामस्वरूप सिट्रा क्षेत्र में चोटें और नुकसान हुआ है, रिफाइनरी धुएं से घिरी हुई थी। बापको बहरीन की मुख्य तेल रिफाइनरी और देश के ऊर्जा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण सुविधा है।

279 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारतीय विमानन कंपनियों ने रविवार को 279 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दीं। इस क्षेत्र में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण हवाई क्षेत्र बंद होने और प्रतिबंधों की वजह से उड़ान संचालन काफी हद तक बाधित हो गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रविवार को कहा कि खाड़ी में मौजूदा स्थिति के कारण कई क्षेत्रों में उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ है। मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, भारतीय घरेलू विमानन कंपनियों द्वारा पश्चिम एशिया से भारत के लिए आज कुल 49 उड़ानें निर्धारित थीं। आठ मार्च को भारतीय विमानन कंपनियों द्वारा संचालित होने वाली 279 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। एक अधिकारी ने बताया कि रविवार को मुंबई हवाई अड्डे पर कुल 66 उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिनमें 34 प्रस्थान और 32 आगमन उड़ानें थीं। इस बीच, एयर इंडिया यात्रियों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने के लिए 10 से 18 मार्च तक नौ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर 78 अतिरिक्त उड़ानें संचालित करेगी।

कार्नी और ट्रंप ने मध्य पूर्व और व्यापार पर उच्च स्तरीय वार्ता की

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की।
एक्स पर एक पोस्ट में कनाडाई नेता ने लिख मैंने आज दोपहर राष्ट्रपति ट्रंप से अर्थव्यवस्था, मध्य पूर्व में हो रहे घटनाक्रम और हमारे दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों सहित कई मुद्दों पर बात की और हम घनिष्ठ संपर्क में रहने पर सहमत हुए।"
यह उच्च स्तरीय राजनयिक पहल पिछले सप्ताह कार्नी की उन महत्वपूर्ण टिप्पणियों के बाद हुई है, जिनमें उन्होंने कहा था कि वे मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष में कनाडा की सैन्य भागीदारी से इनकार नहीं कर सकते। समाचार एजेंसी एएनआई ने अल जज़ीरा के हवाले से बताया कि ये टिप्पणियां उनके उस आकलन के बाद की गई थीं जिसमें उन्होंने ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों को "अंतर्राष्ट्रीय कानून के विपरीत" बताया था।

हिज़्बुल्लाह के लगातार रॉकेट हमलों के बीच इज़राइल में सायरन की गूंज

टाइम्स ऑफ़ इज़राइल के अनुसार, हिज़्बुल्लाह द्वारा रॉकेटों से लगातार हमले जारी रहने के कारण इज़राइल के किरयात शमोना और पास के लेबनान सीमावर्ती कस्बों में एक बार फिर हवाई हमले के सायरन सुनाई दिए।

ड्रोन हमले में इराक में दो अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाना बनाए गए

रॉयटर्स के अनुसार, इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में एरबिल हवाई अड्डे के पास स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने को ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बगदाद में सी-रैम रक्षा प्रणाली ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित एक अमेरिकी राजनयिक सुविधा को निशाना बनाने वाले रॉकेटों और ड्रोनों को भी रोका है।

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T20 World Cup 2026 Prize Money: विश्व विजेता बनने पर टीम इंडिया पर करोड़ों की बारिश, जानें प्राइज मनी पर लगेगा कितना टैक्स?

बीते रविवार को भारत ने आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर इतिहास रच दिया है। कप्तान सूर्यकुमार यादव की लीडरशिप में भारत की नेशनल टीम ने तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाई है। ये जीत ऐतिहासिक थी क्योंकि भारत ने लगातार दूसरी बार टाइटल को बचाया और पहली बार अपने घर में वर्ल्ड चैंपियन भी बना। इस जीत के बाद टीम को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल से एक बड़ी प्राइज मनी भी मिली लेकिन भारतीय टैक्स कानूनों के तहत इस प्राइज अमाउंट पर टैक्स भी लगेगा। 
 
टीम इंडिया पर करोड़ों की बारिश 
टी20 वर्ल्ड कप 2026 एडिशन के लिए आईसीसी ने 13.5 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड प्राइज पूल की घोषणा की थी। ये रकम 120 करोड़ भारतीय रुपये हो जाती है। ये रकम पिछले टूर्नामेंट के प्राइज पूल से लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा है। 

टूर्नामेंट चैंपियन के तौर पर भारत को तीन मिलियन डॉलर मिले। ये भारतीय करेंसी में लगभग 27.48 करोड़ रुपये होते हैं। वहीं रनर-अप टीम न्यूजीलैंड को 1.6 मिलियन डॉलर मिले, जो लगभग 14.65 करोड़ रुपये होते हैं। इस प्राइज मनी को आमतौर पर बोर्ड के अंदरूनी फैसलों के हिसाब से खिलाड़ियों कोचिंग स्टाफ और क्रिकेट बोर्ड में बांट दिया जाता है। 

भारतीय टैक्स कानून के तहत कॉम्पिटीशन से मिली प्राइज मनी दूसरे सोर्स से इनकम की कैटेगरी में आती है। इसी कारण से हर रकम पर एक फिक्स्ड रेट से टैक्स लगता है। इनकम टैक्स एक्ट 1961 के अनुसार ऐसी जीती हुई रकम पर सेक्शन 115BB के तहत टैक्स लगता है। ये प्राइज मनी पर 30 प्रतिशत का फ्लैट टैक्स रेट लगाता है। 
Mon, 09 Mar 2026 13:04:17 +0530

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