मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार
नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति बाधित होने और वैश्विक बाजारों में हलचल मचने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की कीमतों में इस तेजी का बचाव करते हुए कहा कि यह ईरान के परमाणु खतरे का सामना करने की अस्थायी कीमत है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के बाद तेल की कीमतें जल्दी ही कम हो जाएंगी और दुनिया की सुरक्षा के लिए यह छोटी कीमत है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, क्योंकि मध्य पूर्व के बड़े तेल उत्पादकों ने उत्पादन कम कर दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति लगभग बंद जैसी स्थिति में है।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमत लगभग 20.75 प्रतिशत या 18.83 डॉलर बढ़कर 109.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 18 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर लगभग 109.48 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
यह तेजी 1980 के दशक की शुरुआत के बाद तेल वायदा कारोबार में सबसे बड़े साप्ताहिक उछालों में से एक मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में यह उछाल इसलिए आया है क्योंकि आशंका है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रह सकती है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और वैश्विक तेल तथा तरलीकृत प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि इस क्षेत्र में हमलों और धमकियों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही काफी धीमी हो गई है और कई जहाज इस इलाके से गुजरने से बच रहे हैं।
खाड़ी क्षेत्र के कुछ तेल उत्पादकों ने उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। भंडारण टैंक भरने लगे हैं और निर्यात मार्ग बंद होने के कारण कुछ कंपनियों को कुओं को बंद करना या उत्पादन धीमा करना पड़ रहा है।
इस स्थिति का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा है। एशियाई बाजारों में कारोबार शुरू होते ही शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखी गई। जापान का बेंचमार्क इंडेक्स लगभग 5 प्रतिशत गिर गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया का बाजार 7 प्रतिशत से अधिक टूट गया। दोनों अर्थव्यवस्थाएं आयातित तेल और गैस पर काफी हद तक निर्भर हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कुछ बाजार अनुमानों के अनुसार, इस साल के अंत तक कच्चा तेल 143 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
ऊर्जा इतिहासकार डेनियल येर्गिन ने कहा कि यह स्थिति रोजाना तेल उत्पादन के लिहाज से दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा व्यवधान बन सकती है।
इस संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी पड़ रहा है। वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कि क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर एशिया और यूरोप पर पड़ सकता है, क्योंकि ये क्षेत्र ऊर्जा के लिए फारस की खाड़ी से आने वाले आयात पर ज्यादा निर्भर हैं।
हालांकि अमेरिका अपने घरेलू तेल उत्पादन और बढ़ते ऊर्जा निर्यात के कारण कुछ हद तक सुरक्षित हो सकता है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। आमतौर पर ईंधन महंगा होने से परिवहन और खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं।
इतिहास में भी फारस की खाड़ी में तेल संकट ने बड़ी आर्थिक समस्याएं पैदा की हैं। 1973 के अरब तेल प्रतिबंध और 1979 की ईरानी क्रांति के समय भी तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था और वैश्विक मंदी जैसी स्थिति बन गई थी।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
Vastu Tips: सोने की दिशा बदलते ही बदल सकती है किस्मत, जानें वास्तु शास्त्र के सही नियम और तरीका
Vastu Tips: अक्सर लोग अपने करियर, सेहत और आर्थिक स्थिति को लेकर परेशान रहते हैं और इसके लिए कड़ी मेहनत करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे जीवन में छोटी-छोटी आदतें और वास्तु शास्त्र का गहरा संबंध होता है? वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु की दिशा और स्थान का महत्व बताया गया है. इसी में से एक जरूरी नियम है सोने की सही दिशा. गलत दिशा में सोने से न केवल हमारी नींद पर असर पड़ता है, बल्कि मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ता है. आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार सोने के सही दिशा के नियम क्या है.
किस दिशा की ओर सिर करके सोना सबसे शुभ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, सोते समय सिर दक्षिण दिशा की ओर पैर करके सोना शुभ माना जाता है, मान्यता है कि इस दिशा में सोने से शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है और अच्छी नींद आती है. इसके अलावा इससे मानसिक शांति और स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है, लेकिन जब हम सिर दक्षिण की ओर रखते हैं तो यह शरीर के चुंबकीय संतुलन के अनुरूप होता है जिससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
पूर्व दिशा की ओर सिर रखकर सोना
वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि अगर आप दक्षिण दिशा में नहीं सो पा रहे हैं तो पूर्व दिशा की ओर भी सिर करके सो सकते हैं. यह दिशा ज्ञान, सकारात्मकता और ऊर्जा की दिशा मानी जाती है. पूर्व दिशा में सिर रखकर सोने से एकाग्रता बढ़ती है. पढ़ाई करने वाले छात्रों को लाभ मिलता है.
उत्तर दिशा की ओर सिर रखकर सोना
इसके अलावा उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोना अशुभ माना गया है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, इससे शरीर की ऊर्जा असंतुलित हो सकती है. इसके कारण नींद में बाधा, तनाव और बेचैनी, सिर दर्द या थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. इसलिए कोशिश करें कि उत्तर दिशा की ओर सिर करके न सोएं.
पश्चिम दिशा की ओर सोने का क्या प्रभाव?
पश्चिम दिशा की ओर सिर रखकर सोना शुभ माना जाता है. यह न तो बहुत ज्यादा शुभ माना जाता है और न ही बहुत अशुभ. कुछ मान्यताओं के अनुसार, इस दिशा में सोने से काम में देरी, मानसिक बेचैनी जैसी स्थितियां बन सकती हैं. इसलिए इसे अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाने की सलाह दी जाती है.
सोते समय किन बातों का रखें ध्यान?
- बिस्तर साफ और व्यवस्थित रखें
- बीम के नीचे बिस्तर न लगाएं
- पैरों की दिशा दरवाजे की ओर न करें.
- सोते समय सिर के पास भारी सामान न रखें.
यह भी पढ़ें: Chaitra Maas 2026: चैत्र मास में भूलकर भी न करें ये काम, वरना जीवन में बढ़ सकती हैं परेशानियां, जानें नियम
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation















.jpg)





