Success Story: 21 की उम्र में किसान के बेटे ने किया UPSC पास, अब IAS अभिषेक मीणा बने हरियाणा के यंगेस्ट कलेक्टर
IAS Success Story: राजस्थान के 21 वर्षीय अभिषेक मीणा ने पहले ही प्रयास में UPSC में 114वीं रैंक हासिल की। IIT दिल्ली से पढ़ाई करने के बाद वे हरियाणा के सबसे कम उम्र के जिला कलेक्टर (DC) बने हैं।
Video: जिन बेटियों को पढ़ाया-लिखाया, वही पिता की चिता तक न पहुंच सकीं; वीडियो कॉल पर दी अंतिम विदाई
हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग शिवचरण रामरतन गुप्ता का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे निधन हो गया। उनके निधन के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने तुरंत उनकी तीनों बेटियों को सूचना दी और अंतिम संस्कार में शामिल होने का आग्रह किया।
हालांकि, नेपाल, उत्तर प्रदेश और मुंबई में रहने वाली तीनों बेटियां समय पर सोनीपत नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता को अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने कई लोगों को भावुक कर दिया।
पत्नी के निधन के बाद वृद्धाश्रम में अकेले रह रहे थे
जानकारी के अनुसार, शिवचरण रामरतन गुप्ता मूल रूप से मुंबई में कपड़ा कारोबार से जुड़े थे। करीब दो वर्ष पहले वह अपनी पत्नी मीना के साथ सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रहने आए थे। कुछ समय पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो गया था, जिसके बाद वे वहीं अकेले रह रहे थे।
बीमारी के बाद हुई मौत
बताया जा रहा है कि लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे शिवचरण रामरतन गुप्ता ने मंगलवार तड़के अंतिम सांस ली। वृद्धाश्रम प्रबंधन ने उनके निधन की सूचना परिजनों को दी, लेकिन दूरी और समय की वजह से बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकीं।
What’s even the point of life if you can’t be there for your parents’ last rites ? video from Sonipat Imagine attending the funeral of the people who raised you stood by you your whole life through a video call. No one should ever have to go through this. pic.twitter.com/qrAqOYFWzT
— Nikhil saini (@iNikhilsaini) August 5, 2026
वीडियो कॉल के जरिए दी अंतिम विदाई
अंतिम संस्कार के दौरान तीनों बेटियां वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ी रहीं और उसी माध्यम से अपने पिता को अंतिम विदाई दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग भावुक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि, बेटियों के अंतिम संस्कार में शामिल न हो पाने के पीछे की व्यक्तिगत परिस्थितियों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस घटना को उन्हीं उपलब्ध तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
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