Allahabad High Court ने अवैध हिरासत पर लगाया ₹1.25 लाख का हर्जाना
प्रयागराज, दो नवंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पांच दिन तक अवैध पुलिस हिरासत में रखे गए एक व्यक्ति को 1.25 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना व्यक्ति को हिरासत में लेकर अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने ज्ञांती देवी और दो अन्य की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
याचिकाकर्ताओं ने देवरिया निवासी चंदन राजभर की रिहाई का अनुरोध किया था। अदालत ने अवैध हिरासत में रखे जाने के प्रत्येक दिन के लिए 25,000 रुपये की दर से मुआवजा देने का आदेश दिया और स्पष्ट किया कि मुआवजा मिलने के बावजूद राजभर पुलिस विभाग के खिलाफ नुकसान की भरपाई के लिए दीवानी मुकदमा दायर कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि यदि विभागीय जांच में जांच अधिकारी को दोषी पाया जाता है, तो उसके जानबूझकर किए गए कृत्यों के लिए उसे कड़ी से कड़ी सजा देने पर विचार किया जाना चाहिए।
मामले के विवरण के अनुसार, देवरिया के सलेमपुर थाने में 18 जुलाई, 2026 को भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 87 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि चंदन राजभर उसकी 18 वर्षीय बेटी को भगा ले गया था। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, राजभर और शिकायतकर्ता की बेटी ने बाद में बिहार के सिवान में एक दुर्गा मंदिर में विवाह कर लिया था और दोनों पुणे चले गए थे, जहां वे पति-पत्नी की तरह रह रहे थे।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 24 अगस्त की रात लड़की के पिता कुछ पुलिसकर्मियों के साथ पुणे में दंपति के घर पहुंचे, जहां पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया और 27 अगस्त की रात उन्हें संबंधित थाने लाया गया। राजभर को 28 अगस्त से दो सितंबर तक अवैध हिरासत में रखा गया और उसकी गिरफ्तारी से संबंधित दस्तावेज दो सितंबर को तैयार किए गए। राज्य सरकार के वकील ने बताया कि क्षेत्राधिकारी की ओर से 21 अक्टूबर को तैयार की गई जांच रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि जांच अधिकारी दीप नारायण यादव ने राजभर को जानबूझकर हिरासत में लिया और दो सितंबर तक उसे हिरासत में रखा।
इस रिपोर्ट के आधार पर देवरिया के पुलिस अधीक्षक ने 21 अक्टूबर को जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की।
Birth Centenary Celebrations- Day 3: नड्डा, पीयूष गोयल, अनुराग ठाकुर और डॉ. चिन्मय पंड्या ने दिया आत्मपरिवर्तन से राष्ट्र निर्माण का संदेश
अखिल विश्व गायत्री परिवार के तीन दिवसीय जन्मशताब्दी महोत्सव के अंतिम दिन इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, सांसद अनुराग सिंह ठाकुर और जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक डॉ. चिन्मय पंड्या ने देश-विदेश से आए हज़ारों गायत्री साधकों को संबोधित किया. सभी वक्ताओं के संबोधन का साझा सूत्र रहा - व्यक्ति का आत्मपरिवर्तन ही राष्ट्र निर्माण की नींव है. कार्यक्रम की शुरुआत देव संस्कृति विश्वविद्यालय की छात्राओं की भक्ति गीत और प्रज्ञागीत पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुति से हुई.
नड्डा: आत्मपरिवर्तन राष्ट्र निर्माण की आधारशिला
जे.पी. नड्डा ने गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और वंदनीया माताजी के आदर्शों को मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताया. उन्होंने तीन संकल्पों पर ज़ोर दिया:
1. व्यक्ति का आत्मपरिष्कार
2. परिवार में श्रेष्ठ संस्कारों का संवर्धन
3. अपनी सामर्थ्य और संसाधनों को समाज व राष्ट्र के कल्याण में लगाना
नड्डा ने कहा कि साधना का प्रभाव सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व में दिखना चाहिए. उनके अनुसार नारी शक्ति, युवा शक्ति और सामाजिक शक्ति की संगठित भागीदारी से ही राष्ट्र निर्माण संभव है.
पीयूष गोयल: GDP के साथ "ग्रॉस डोमेस्टिक कैरेक्टर" भी ज़रूरी
पीयूष गोयल ने कहा, "भारत को GDP बढ़ाना ही है, लेकिन साथ-ही-साथ आपका जो काम है ग्रॉस डोमेस्टिक कैरेक्टर बनाने का, ये भी उतना ही आवश्यक है." उन्होंने कहा कि ईमानदार व्यापार, पारिवारिक मूल्य और ज़िम्मेदार नागरिक ही 2047 के विकसित भारत की नींव रखेंगे. गायत्री परिवार की भूमिका पर उन्होंने कहा, "सरकार तो नीति बना सकती है, लेकिन समाज में जागरूकता लाना, ये ज़िम्मेदारी गायत्री परिवार ने भली-भाँति अपने हाथ में ली." उन्होंने नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ लड़ाई और महिला सशक्तिकरण में परिवार के काम की सराहना की.
परंपरा और तकनीक के मेल का उदाहरण देते हुए गोयल ने करवा चौथ का किस्सा सुनाया - बारिश के कारण चाँद नहीं दिखा, तो फ़ेसटाइम कॉल पर चाँद दिखाकर उनकी पत्नी का व्रत खुलवाया गया. गुरुदेव के सूत्र "हम बदलेंगे, तो युग बदलेगा" का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि माता जी को सबसे अच्छी श्रद्धांजलि उनके दिखाए रास्ते को दिनचर्या में उतारना है.
पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने तीन भाषाओं में समझाया पसायदान
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ ने संत ज्ञानेश्वर की ज्ञानेश्वरी के पसायदान की व्याख्या की. उन्होंने कहा, "गायत्री परिवार की 6,000 शाखाएँ हैं, न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी. इसलिए ये 10 श्लोक प्रस्तुत करते हुए मैं तीन भाषाओं का उपयोग करूँगा — अपनी मातृभाषा मराठी; हिंदी, जिसे मैं हृदय की भाषा कहता हूँ; और अंग्रेज़ी, जिसे मैं काम की भाषा कहता हूं." उन्होंने कहा, "ज्ञानेश्वरी के अंत में पसायदान है, जिसे मैं आपको समझाना चाहूँगा. इसमें 10 श्लोक हैं."
अनुराग ठाकुर: संवेदनशीलता और मातृशक्ति का सम्मान
सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने सामाजिक संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा, शारीरिक स्वास्थ्य और मातृशक्ति के सम्मान को समाज की प्रगति के लिए आवश्यक बताया.
डॉ. चिन्मय पंड्या: सोच बदलेगी तो राष्ट्र का नव-निर्माण होगा
जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पंड्या ने गायत्री मंत्र को व्यक्तित्व निर्माण और जीवन परिवर्तन की शक्ति बताया. उन्होंने कहा कि राष्ट्र का नव-निर्माण बाहरी व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि व्यक्ति की सोच और भावनाओं में सकारात्मक बदलाव से होगा.
जन्मशताब्दी वर्ष आत्मजागरण और युग परिवर्तन का ऐतिहासिक अवसर है: डॉ. पंड्या
उन्होंने कहा, "वेद हों, पुराण हों, उपनिषद हों या अन्य पवित्र ग्रंथ-प्राचीन भारतीय ज्ञान की पूरी परंपरा एक ही दिशा की ओर संकेत करती है: पवित्र गायत्री मंत्र मानव चेतना के संपूर्ण रूपांतरण का उत्प्रेरक है." उन्होंने महाभारत का एक प्रसंग सुनाया. युद्ध के बाद जब युधिष्ठिर और बाकी पांडवों ने सब कुछ छोड़कर ध्यान के लिए जाने का आशीर्वाद माँगा, तो श्रीकृष्ण ने कहा, "हम अब कलियुग की दहलीज़ पर हैं. धर्मराज के नाते धर्म की रक्षा का दायित्व आप पर है. मेरी उपस्थिति में आप कलियुग नहीं देखेंगे. कलियुग की आहट जाननी हो तो चारों दिशाओं में जाइए, देखिए क्या मिलता है." पांचों पांडव अलग-अलग दिशाओं में गए और अलग-अलग अनुभव लेकर लौटे.
डॉ. पंड्या ने कहा, "जैसे-जैसे धर्म का पतन होगा, न्याय, नैतिकता, मूल्य, आदर्श और सत्यनिष्ठा भी एक-एक कर गिरेंगे, और ऐसा लगेगा मानो धर्म सदा के लिए बुझ गया है. ऐसे समय में नौ शब्दों और चौबीस अक्षरों वाला गायत्री मंत्र कहीं से प्रकट होगा और धर्म को पूरी तरह ढहने से बचाएगा."
समापन दिवस पर अंतर सिंह आर्य, रमनकांत, मनु गौड़ और टी.एस. कल्याणरमन समेत कई गणमान्य अतिथि, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न देशों से आए गायत्री साधक उपस्थित रहे. 31 अक्टूबर से शुरू हुए इस महोत्सव के पहले दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने माता जी की स्मृति में डाक टिकट जारी किया था और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विराट दीप यज्ञ में मुख्य अतिथि रहे थे.
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