नेपाल के पूर्व पीएम ओली हारे, करीब 50 हजार मतों से बालेन शाह ने दी मात
काठमांडू, 7 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली झापा-5 सीट से हार गए हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के पूर्व मेयर और रैपर बालेन शाह ने उन्हें करीब 50 हजार मतों से परास्त किया। मतगणना जारी है और 165 सीटों पर शुरुआती रुझानों में आरएसपी जबरदस्त जीत की ओर अग्रसर है। नेपाल के निर्वाचन आयोग ने ये परिणाम घोषित किया है।
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के बालेन शाह और सीपीएन-यूएमएल के चेयरमैन ओली झापा-5 सीट से चुनाव लड़ रहे थे। यहां बालेन शाह को 68,348 वोट मिले, जबकि केपी शर्मा ओली को 18,734 वोट मिले। इस तरह शाह ने कुल 49,614 वोटों से हराकर बड़ी जीत हासिल की है। इसी सीट से 2017 और 2022 में उन्होंने सफलता अर्जित की थी।
द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, शाह की जीत ने पूरे देश का ध्यान खींचा है, क्योंकि आरएसपी ने पहले ही उन्हें पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था।
आरएसपी के वरिष्ठ नेता शाह ने ओली के खिलाफ चुनाव लड़ा। ओली ने 2022 के चुनाव में नेपाली कांग्रेस के खगेंद्र अधिकारी को 28,576 वोटों के अंतर से हराया था।
मई 2022 से काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के पूर्व मेयर रहे बालेन, जनवरी 2026 में इस्तीफा देकर राष्ट्रीय राजनीति में आए। काठमांडू के नरदेवी में एक मधेसी परिवार में जन्मे शाह, स्वर्गीय राम नारायण शाह के बेटे हैं, जो एक जाने-माने आयुर्वेदिक चिकित्सक थे।
राष्ट्रीय राजनीति में आने से पहले, शाह 2015 के गोरखा भूकंप के बाद बचाव कार्यों में सक्रिय थे। एक जाने-माने रैपर, गीतकार और म्यूजिक प्रोड्यूसर के तौर पर 2012 में उन्होंने अपना म्यूजिक करियर शुरू किया था।
शुरू में बिबेकशील पार्टी के साथ जुड़े शाह ने 2022 काठमांडू मेयर का चुनाव एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में जीता और बाद में 2025 के आखिर में आरएसपी में शामिल हो गए। 2026 के आम चुनावों में कैंपेन का नेतृत्व किया और खुद को नेपाल के प्रधानमंत्री पद के लिए एक प्रमुख दावेदार के रूप में स्थापित किया।
--आईएएनएस
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UPSC 2025 में 301वीं रैंक पर बड़ा घमासान! एक ही रोल नंबर, दो आकांक्षा सिंह; आखिर सही कौन?
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के फाइनल रिजल्ट में 301वीं रैंक को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि एक ही रोल नंबर पर दो अलग-अलग युवतियों ने दावा किया है कि वही इस रैंक की असली हकदार हैं. दोनों का नाम आकांक्षा सिंह है, लेकिन एक बिहार से हैं और दूसरी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से.
क्या है पूरा मामला?
रिजल्ट आने के बाद पहले खबर सामने आई कि बिहार के चर्चित व्यक्ति Brahmeshwar Singh की पोती आकांक्षा सिंह ने सिविल सेवा परीक्षा में 301वीं रैंक हासिल की है. इस खबर के सामने आते ही उनके घर पर जश्न शुरू हो गया. परिवार और आसपास के लोग उन्हें बधाई देने लगे. कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके इंटरव्यू भी सामने आए, जिनमें उन्होंने अपनी सफलता की कहानी बताई.
गाजीपुर से दूसरी आकांक्षा का खड़ा हो गया विवाद
कुछ समय बाद इस मामले ने नया मोड़ ले लिया. उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की एक दूसरी युवती, डॉ. आकांक्षा सिंह ने दावा किया कि असल में 301वीं रैंक उन्हें मिली है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि वह दिल्ली में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही थीं. उन्होंने बताया कि वह एक डॉक्टर हैं और उन्होंने All India Institute of Medical Sciences से गायनेकोलॉजी में मास्टर्स किया है.
और बन गया चर्चा का विषय
वीडियो में उन्होंने कहा, “मेरा नाम डॉ. आकांक्षा सिंह है और मुझे यूपीएससी 2025 में 301वीं रैंक मिली है. मुझे पता चला है कि एक और लड़की भी इस रैंक का दावा कर रही है. लेकिन असली सच्चाई एडमिट कार्ड के बारकोड से साफ हो जाएगी. फिलहाल मैं अपनी सफलता के इस पल का आनंद लेना चाहती हूं.” इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड की चर्चा शुरू हो गई. लोगों ने इन दस्तावेजों की तुलना करना शुरू कर दिया. जांच में कुछ अहम बातें सामने आईं.
कैसे खड़ा हुआ विवाद?
गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह के एडमिट कार्ड पर रोल नंबर 0856794 लिखा हुआ है. जब उनके एडमिट कार्ड पर मौजूद बारकोड को स्कैन किया गया, तो उसमें भी वही रोल नंबर दिखाई दिया. यानी एडमिट कार्ड पर लिखा रोल नंबर और बारकोड का नंबर एक-दूसरे से मेल खाते हैं.
दूसरी ओर बिहार की आकांक्षा सिंह के एडमिट कार्ड पर भी बाहर की तरफ रोल नंबर 0856794 लिखा हुआ है. लेकिन जब उनके एडमिट कार्ड के बारकोड को स्कैन किया गया तो उसमें अलग नंबर सामने आया. यहीं से इस विवाद ने और तूल पकड़ लिया.
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यूपीएससी का क्या है कहना?
प्रारंभिक जांच और सामने आए दस्तावेजों के आधार पर कई लोग मान रहे हैं कि गाजीपुर की डॉ. आकांक्षा सिंह का दावा ज्यादा मजबूत दिखाई देता है. वजह यह है कि उनके एडमिट कार्ड पर दिया गया रोल नंबर और बारकोड से मिलने वाला नंबर पूरी तरह एक जैसा है. हालांकि, इस पूरे मामले में अभी तक आधिकारिक रूप से Union Public Service Commission की तरफ से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है. ऐसे में अब सभी की नजर यूपीएससी की आधिकारिक जांच या स्पष्टीकरण पर टिकी हुई है.
जब तक आयोग की तरफ से स्थिति साफ नहीं की जाती, तब तक यह विवाद जारी रह सकता है. फिलहाल सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है कि आखिर 301वीं रैंक की असली हकदार कौन है.
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