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ईरानी नौसेना के जहाज को कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति इंसानियत के आधार पर दी: एस. जयशंकर

नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच कोच्चि में ईरानी नौसेना के जहाज को डॉक करने की अनुमति देने के भारत के फैसले को लेकर बयान दिया।

रायसीना डायलॉग 2026 के 11वें संस्करण के आखिरी दिन उन्होंने कहा कि जहाज घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए थे।

नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग में विदेश मंत्री ने बताया कि कैसे भारत को ईरान की तरफ से उसके एक नौसेना के जहाज आईआरआईएस लवन को लेकर एक रिक्वेस्ट मिली थी। ईरानी नौसेना के जहाज ने इलाके में ऑपरेट करते समय तकनीकी समस्या की रिपोर्ट की थी।

आईआरआईएस लवन ने पिछले महीने इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लिया था। वह तकनीकी खराबी आने के बाद कोच्चि की ओर रवाना हुआ था। सरकार के मुताबिक श्रीलंका के दक्षिण में ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना से जुड़ी घटना से कई दिन पहले ईरान ने भारत से संपर्क किया था।

यह जहाज इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलान 2026 अभ्यास के लिए ईरान की नौसेना की तैनाती के हिस्से के तौर पर इस इलाके में मौजूद था। इस अभ्यास का आयोजन 15 फरवरी से 25 फरवरी के बीच हुआ था।

ईरानी साइड से तकनीकी खराबी की रिपोर्ट मिलने के बाद भारत ने 1 मार्च को डॉकिंग रिक्वेस्ट को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद जहाज कोच्चि के लिए रवाना हुआ और वहां डॉक किया, जिसके 183 क्रू मेंबर अभी शहर में नेवल फैसिलिटी में रह रहे हैं।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि जब ईरान ने आईआरआईएस लवन के लिए मदद मांगी तो भारत ने इंसानियत वाला रवैया अपनाया था।

उन्होंने कहा, “हमें ईरानी पक्ष से संदेश मिला कि एक शिप, जो शायद उस समय हमारी सीमा के सबसे पास था, हमारे पोर्ट में आना चाहता था। वे बता रहे थे कि उन्हें दिक्कतें आ रही हैं। यह 28 फरवरी की बात है। 1 मार्च को, हमने कहा कि आप आ सकते हैं और उन्हें आने में कुछ दिन लगे और फिर वे कोच्चि आए। बहुत सारे युवा कैडेट थे। वे पास की एक जगह पर उतर गए हैं। जब वे निकले और यहां आए, तो स्थिति बिल्कुल अलग थी। वे फ्लीट रिव्यू के लिए आ रहे थे और फिर वे एक तरह से गलत स्थिति में फंस गए।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि यह इंसानियत का काम था।”

ईरानी जहाज असल में क्षेत्रीय स्थिति बिगड़ने से पहले नौसेना इंगेजमेंट में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे। आईआरआईएस डेना, आईआरआईएस लवन और आईआरआईएस बुशहर जहाजों ने फरवरी की शुरुआत में विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा होस्ट किए गए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलान 2026 नौसेना के अभ्यास में हिस्सा लिया था।

आईआरआईएस डेना को लेकर डॉ एस. जयशंकर ने कहा, “दूसरे जहाजों के मामले में एक के साथ श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी और उन्होंने जो फैसला लिया, वह उन्होंने लिया और एक दुर्भाग्य से नहीं ले पाया। हमने कानूनी मुद्दों को छोड़कर, मानवता के नजरिए से इसे देखा। मुझे लगता है कि हमने सही काम किया।”

4 मार्च को ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना श्रीलंका में गाले के दक्षिणी तट से लगभग 40 नॉटिकल मील दूर इंटरनेशनल पानी में सफर करते समय यूनाइटेड स्टेट्स सबमरीन से दागे गए टॉरपीडो की चपेट में आ गया।

श्रीलंकाई अधिकारियों के अनुसार, विशाखापत्तनम में नौसेना के अभ्यास से लौटते समय जहाज के डूबने के बाद समुद्र से 87 लाशें बरामद की गईं, जबकि 32 नाविकों को जिंदा बचा लिया गया। बाद में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस घटना की पुष्टि की।

इस घटना को लेकर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इंडियन ओशन रीजन (आईओआर) के रणनीतिक डायनामिक्स के बारे में सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर भी टिप्पणी की।

उन्होंने कहा, “इस पर सोशल मीडिया पर बहुत बहस चल रही है। सोशल मीडिया, अपने नेचर से, बहुत तीखे, गुस्से वाले, कभी-कभी बहुत ज्यादा विचारों को जाहिर करने का एक फोरम है। लोगों को यह कहने का हक है, लेकिन मेरा मतलब है, प्लीज हिंद महासागर की असलियत को समझें। डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से हिंद महासागर में है। यह कोई पिछले हफ्ते या पिछले महीने की बात नहीं है। यह बात कि जिबूती में विदेशी सेनाएं मौजूद हैं, इस सदी के पहले दशक की शुरुआत में हुई थी।”

--आईएएनएस

केके/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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महिला सशक्तिकरण के लिए एसबीआई ने शुरू किया 500 मिलियन डॉलर का सोशल लोन

नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने शनिवार को 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,597 करोड़ रुपए) की सिंडिकेटेड सोशल टर्म लोन फैसिलिटी की शुरुआत की है। यह लोन खास तौर पर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है।

बैंक के अनुसार, इस लोन में ग्रीनशू विकल्प भी शामिल है, और यह कदम बैंक के साथ-साथ वैश्विक ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस) फाइनेंसिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

एसबीआई ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सामाजिक प्रभाव को तेज करना, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और महिलाओं के बीच मौजूद असमानता को कम करने वाली पहलों का समर्थन करना है।

बैंक ने बताया कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 5 – लैंगिक समानता हासिल करना और सभी महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाना – को आगे बढ़ाने में योगदान देगी।

एसबीआई के चेयरमैन सीएस सेटी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इस ऐतिहासिक सोशल लोन की घोषणा करते हुए उन्हें गर्व हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम सतत विकास के लिए महिला सशक्तिकरण के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं होती, बल्कि सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने, महिलाओं को सशक्त बनाने और सभी के लिए समावेशी समाज बनाने से होती है।

यह एसबीआई का इस तरह का पहला बड़ा सोशल लोन ट्रांजैक्शन है और इसे वैश्विक स्तर पर महिलाओं से जुड़ा सबसे बड़ा लोन माना जा रहा है। इससे सतत वित्त (सस्टेनेबल फाइनेंस) के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका भी दिखाई देती है।

बैंक के अनुसार, इस लोन के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में लैंगिक समानता और समावेशी आर्थिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों और परियोजनाओं को समर्थन दिया जाएगा।

इस ट्रांजैक्शन में एमयूएफजी ने ओरिजिनल मैंडेटेड लीड अरेंजर, अंडरराइटर और बुक रनर के साथ-साथ एकमात्र सोशल लोन कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभाई है।

शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर एसबीआई का शेयर 1,139.80 रुपए पर बंद हुआ, जो 2.5 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

एसबीआई देश के सबसे बड़े होम लोन देने वाले बैंकों में से एक है और अब तक लगभग 30 लाख भारतीय परिवारों के घर खरीदने के सपने पूरे करने में मदद कर चुका है। इतना ही नहीं, बैंक का होम लोन पोर्टफोलियो 9 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है।

31 दिसंबर 2025 तक एसबीआई के पास 57 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का डिपॉजिट बेस था, जबकि सीएएसए अनुपात 39.13 प्रतिशत और कुल अग्रिम (लोन) 46.8 लाख करोड़ रुपए से अधिक था।

--आईएएनएस

डीबीपी/

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