अमिरेकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जारी की साइबर नीति, तकनीकी संबंधों को बढ़ावा देने का किया दावा
वाशिंगटन, 7 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपित ट्रंप ने अमेरिका के लिए एक साइबर रणनीति जारी की है, जिसमें साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, प्रतिद्वंद्वियों से डिजिटल खतरों का मुकाबला करने और वैश्विक भागीदारों के साथ सहयोग को गहरा करने की एक व्यापक योजना की रूपरेखा दी गई है।
नई साइबर रणनीति में कहा गया है कि अमेरिका डिजिटल नेटवर्क की सुरक्षा और तकनीकी नेतृत्व को बनाए रखने के लिए सहयोगी देशों, उद्योग जगत और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा। यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका साइबरस्पेस में बेजोड़ बना रहे। योजना में नेटवर्क की सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के बीच अभूतपूर्व समन्वय का आह्वान किया गया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रणनीति में लिखा, पिछले एक साल में अमेरिका ने पूरी दुनिया को दिखाया है कि हमारे पास धरती पर सबसे शक्तिशाली और तकनीकी रूप से उन्नत सेना है। कोई भी इसके आस-पास भी नहीं है। हम वैश्विक साइबर मानदंडों को आकार देने और डिजिटल लचीलेपन को मज़बूत करने के लिए सहयोगियों और उद्योग जगत के साथ मिलकर काम करेंगे।
यह नीतिगत खाका ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर की सरकारें साइबर अपराध, जासूसी और डिजिटल तोड़फोड़ में हो रही वृद्धि का सामना कर रही हैं। शत्रुतापूर्ण तत्व और आपराधिक नेटवर्क व्यवसायों, सरकारों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को तेज़ी से निशाना बना रहे हैं।
ट्रंप ने कहा, हमारे साइबर उपकरण और ऑपरेटर दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं। हम उन्हें अपने विरोधियों को बाधित और भ्रमित करके, और उन्हें सुरक्षित पनाहगाह से वंचित करके अमेरिका की रक्षा करने के लिए सशक्त बना रहे हैं।
इस रणनीति में चेतावनी दी गई है कि साइबर अपराधी और विरोधी स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों, वित्तीय नेटवर्क, खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं और जल उपयोगिताओं को निशाना बना रहे हैं। इन हमलों से सेवाएं बाधित हो सकती हैं और भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
दस्तावेज़ में कहा गया है, हालांकि, साइबरस्पेस में स्वतंत्रता और सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि अमेरिकी साइबर नीति को निर्देशित करने के लिए छह प्रमुख नीतिगत स्तंभों की रूपरेखा दी गई है।
इनमें विरोधियों के व्यवहार को नियंत्रित करना, समझदारीपूर्ण विनियमन को बढ़ावा देना, संघीय नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना, तकनीकी श्रेष्ठता बनाए रखना और एक मजबूत साइबर कार्यबल का निर्माण करना शामिल है।
रणनीति में संघीय प्रणालियों के आधुनिकीकरण और उन्नत साइबर सुरक्षा उपकरणों को तैनात करने पर भी जोर दिया गया है। इनमें पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, ज़ीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित सुरक्षा प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
एक अन्य प्रमुख फोकस ऊर्जा ग्रिड, वित्तीय प्रणालियों, दूरसंचार नेटवर्क, अस्पतालों और जल उपयोगिताओं जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी सुरक्षित किया जाना चाहिए।
रणनीति कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और सुरक्षित डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में नवाचार के महत्व पर भी प्रकाश डालती है। ये प्रौद्योगिकियां नेटवर्क की सुरक्षा और अमेरिकी तकनीकी नेतृत्व को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
दस्तावेज में सेंसरशिप, निगरानी और सूचना के हेरफेर को सक्षम बनाने वाली विदेशी प्रौद्योगिकियों के खिलाफ भी चेतावनी दी गई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और बुनियादी ढांचे को लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए।
साइबर सुरक्षा वाशिंगटन के लिए एक केंद्रीय राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता बन गई है क्योंकि सरकारें और कंपनियां तेजी से परिष्कृत साइबर हमलों का सामना कर रही हैं। अमेरिका के लिए साइबर खतरों को निष्क्रिय करने के लिए त्वरित, सुविचारित और सक्रिय रूप से कार्रवाई करेंगे।
--आईएएनएस
ओपी/पीयूष
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ईरानी तेल नेटवर्क पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, 15 मिलियन डॉलर जब्त करने की प्रक्रिया शुरू
वाशिंगटन, 7 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका ने एक बड़े कदम के तहत लगभग 1.5 करोड़ डॉलर (15 मिलियन डॉलर) से अधिक की रकम जब्त करने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह पैसा ईरान के अवैध तेल वितरण नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल कर रहा था और इससे ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े संगठनों को मदद मिल रही थी।
अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया कि इस मामले में कोलंबिया जिले की अमेरिकी जिला अदालत में सिविल फॉरफीचर (संपत्ति जब्ती) से जुड़े मुकदमे दायर किए गए हैं। इन मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि 15.3 मिलियन डॉलर से अधिक की रकम ऐसे नेटवर्क को फंड करने के लिए इस्तेमाल की गई, जो अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ईरानी तेल की बिक्री और शिपिंग कर रहा था।
मुकदमे के अनुसार, यह पैसा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के तहत लगाए गए प्रतिबंधों के उल्लंघन को आसान बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। साथ ही यह धनराशि नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और उसकी कुद्स फोर्स (आईआरजीसी-क्यूएफ) जैसे संगठनों को प्रभाव और आर्थिक समर्थन देने से भी जुड़ी बताई गई है।
अमेरिका ने आईआरजीसी और आईआरजीसी-क्यूएफ दोनों को पहले ही विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मोहम्मद हुसैन शमखानी नाम का व्यक्ति कंपनियों और सहयोगियों का एक नेटवर्क चला रहा था, जो ईरानी तेल की बिक्री और शिपिंग करता था। आरोप है कि यह नेटवर्क तेल के असली स्रोत और ईरान से उसके संबंधों को छिपाने के लिए कई तरीके अपनाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क ने फर्जी कंपनियों, शिपिंग ऑपरेशनों और फ्रंट फर्मों का इस्तेमाल किया ताकि ईरानी पेट्रोलियम के असली स्रोत को छिपाया जा सके और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन आसानी से हो सके।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने जुलाई 2025 में शमखानी पर प्रतिबंध लगाए थे। ओएफएसी के मुताबिक, मोहम्मद हुसैन शमखानी, अली शमखानी के बेटे हैं, जो ईरान के सर्वोच्च नेता के एक शीर्ष राजनीतिक सलाहकार माने जाते हैं। अली शमखानी पहले ईरान की नेशनल डिफेंस काउंसिल के प्रमुख भी रह चुके हैं।
ओएफएसी ने इस पूरे ऑपरेशन को जहाजों, शिपिंग कंपनियों और फ्रंट कंपनियों के एक विशाल नेटवर्क के रूप में बताया है, जो दुनिया भर में तेल की बिक्री से अरबों डॉलर का मुनाफा कमा रहा था। एजेंसी के मुताबिक, यह नेटवर्क अक्सर ईरान और रूस के कच्चे तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से पैसा कमाता था, और इनका सबसे बड़ा खरीदार आमतौर पर चीन होता था।
ओएफएसी ने यह भी कहा कि यह नेटवर्क अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कई जटिल तरीकों का इस्तेमाल करता था ताकि इसका संबंध शमखानी परिवार, ईरान और रूस से सीधे तौर पर न जुड़ सके।
अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पामेला बॉन्डी ने कहा कि अमेरिका अपनी वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल प्रतिबंधित संगठनों की मदद के लिए बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि आरोपी ने कथित तौर पर आईआरजीसी को लाखों डॉलर की मदद पहुंचाई और अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया, जिसके लिए उसे अब भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
वहीं सहायक अटॉर्नी जनरल टाइसन ए. डुवा ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि ईरान से जुड़े नेटवर्क किस तरह अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि शमखानी और उसके सहयोगियों ने गुप्त तरीके से अमेरिकी वित्तीय संस्थानों का इस्तेमाल कर खुद को अमीर बनाने और ईरान से जुड़े आतंकी नेटवर्क को फायदा पहुंचाने की कोशिश की।
अधिकारियों के मुताबिक, जब्त की जाने वाली राशि में से करीब 12.97 मिलियन डॉलर वेलब्रेड कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनी वेलब्रेड ट्रेडिंग डीएमसीसी के लिए इस्तेमाल होने थे। आरोप है कि इन कंपनियों को शमखानी और उसके सहयोगियों ने इस तरह से संचालित किया ताकि उनका ईरान से सीधा संबंध सार्वजनिक रूप से सामने न आए।
इसके अलावा लगभग 2.4 मिलियन डॉलर सी लीड शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी सी लीड शिपिंग एजेंसी इंडिया प्राइवेट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले थे। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन कंपनियों को इस नेटवर्क के लिए शिपिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा था।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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