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अनुपम खेर@71; चेहरे पर लकवा मारा, फिर भी शूटिंग की:प्रोजेक्ट्स फ्लॉप हुए तो सिर्फ 400 रुपए बचे थे, रिकॉर्ड फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते

एक लड़का, जिसने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय की तालीम हासिल की और बड़े ख्वाबों के साथ मुंबई पहुंचा। उसे एक फिल्म में शानदार किरदार मिला और उसने छह महीने तक पूरी लगन और मेहनत से उसकी तैयारी की। तभी अचानक खबर आई कि उसका रोल किसी और को दिया जा सकता है। मायूस होकर उसने मुंबई छोड़ने का फैसला कर लिया और आखिरी दफा फिल्म के डायरेक्टर महेश भट्ट से मिलने गया। गुस्से में उसने उन्हें खरी-खोटी भी सुना दी। मगर उसकी सच्चाई, हिम्मत और जुनून देखकर महेश भट्ट ने फैसला किया कि यह किरदार वही निभाएगा। इसके बाद 28 साल की उम्र में उसने बुजुर्ग का रोल इतने शानदार तरीके से अदा किया कि उसे बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। बस, इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। जी हां, हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के मशहूर एक्टर अनुपम खेर की। आज अनुपम खेर के बर्थडे के खास मौके पर आइए उनकी जिंदगी को करीब से छूते हैं- पिता थे वन विभाग में क्लर्क 7 मार्च 1955 को शिमला (हिमाचल प्रदेश) में एक कश्मीरी पंडित परिवार में पैदा हुए अनुपम खेर के पिता पुष्कर नाथ खेर वन विभाग में क्लर्क थे, जबकि उनकी माता दुलारी खेर गृहिणी थीं। उनकी स्कूल की पढ़ाई शिमला के डी. ए. वी. स्कूल से हुई थी। अनुपम खेर के एक छोटे भाई राजू खेर हैं। अनुपम खेर की पहली किस का किस्सा अनुपम खेर ने शो आप की अदालत में बताया था कि ग्यारहवीं कक्षा में उन्हें अपने मोहल्ले में आई एक लड़की से प्यार हो गया था। वह लड़की अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ती थी और एक आर्मी ऑफिसर की बेटी थी। अनुपम खेर और उनके दोस्त विजय सहगल कई महीनों तक साइकिल से उसके पीछे-पीछे जाते रहे, लेकिन अनुपम मोहब्बत का इजहार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। छोटे शहर का माहौल था, जहां जज्बात दिल में रहते थे और अल्फाज होंठों तक आते-आते रुक जाते थे। करीब दो महीने बाद दोस्त के कहने पर उन्होंने लड़की से “आई लव यू” कह दिया, जिस पर लड़की ने जवाब में “मी टू” कहा। अनुपम खेर को उस समय अंग्रेजी ज्यादा समझ नहीं आती थी और वह “मी टू” का मतलब भी फौरन नहीं समझ पाए। बाद में दोस्त ने समझाया कि इसका मतलब है कि वह भी उनसे मोहब्बत करती है। इसके बाद उनके दोस्त ने उन्हें लड़की से “आई वांट टू किस यू” कहने की सलाह दी। उस दौर में ऐसा कहना बहुत बड़ी बात होती थी। एक महीने बाद उन्होंने हिम्मत कर यह भी कह दिया, जिस पर लड़की ने जवाब में कहा कि स्कूल के एनुअल फंक्शन के दिन वह उन्हें किस करेगी। हालांकि बाद में अनुपम खेर को ध्यान आया कि एनुअल फंक्शन में अभी आठ महीने बाकी थे। इसी दौरान दोस्त ने मजाक में उन्हें किस की प्रैक्टिस करने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने शीशे के गिलास से अभ्यास करना शुरू कर दिया, जिससे उनके होंठ कट गए और सूज गए। परिवार में किसी ने सूट नहीं पहना था कहानी में नया मोड़ तब आया जब लड़की ने शर्त रखी कि वह एनुअल फंक्शन में साड़ी पहनकर आएगी और अनुपम खेर को सूट पहनकर आना होगा। खेर ने बताया था कि उनके परिवार में पहले किसी ने सूट नहीं पहना था। जब उन्होंने घर पर सूट की मांग की तो परिवार हैरान रह गया। किसी तरह उन्होंने पिता को स्कूल के कार्यक्रम का बहाना देकर राजी किया और सूट सिलवाया। तय दिन पर दोनों ने रेलवे ब्रिज के नीचे मिलने का फैसला किया। किस करने से पहले वह और उनके दोस्त ने वहां के बल्ब तक तोड़ दिए ताकि कोई देख न सके। रात करीब साढ़े आठ बजे लड़की साड़ी में पहुंची और वह खुद नीले सूट में पहुंचे। दोनों के बीच कुछ देर खामोशी रही। जैसे ही वह किस करने के लिए आगे बढ़े, उसी समय लड़की के घर की लाइट जल गई और उसके पिता दरवाजे पर दिखाई दिए। घबराहट में लड़की ने अपना चेहरा मोड़ लिया और अनुपम खेर का पहला किस उसके होंठों की बजाय उसके कान पर जा लगा। इंटरव्यू में खेर ने कहा कि उनका पहला किस डिजास्टर साबित हुआ था। NSD से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुपम ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से संबद्ध गवर्नमेंट कॉलेज, संजौली में अर्थशास्त्र की पढ़ाई शुरू की। लेकिन बाद में भारतीय रंगमंच का अध्ययन करने के लिए उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में प्रवेश लिया और अपना पहले वाला कोर्स बीच में ही छोड़ दिया। बाद में उन्होंने 1978 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), नई दिल्ली से भी एक्टिंग की बारीकियां सीखीं। 28 साल की उम्र में बुजुर्ग का किरदार निभाया लंबे संघर्ष के बाद उन्हें फिल्म सारांश (1984) में एक शानदार भूमिका निभाने का मौका मिला, लेकिन कुछ दिनों बाद उनका रोल बदलने की बात होने लगी। हालांकि उनका कॉन्फिडेंस और इरादा देखकर फिल्म के डायरेक्टर महेश भट्ट ने वही रोल दिया जो उनको ऑफर किया गया था। इसके बाद अनुपम को फिल्म से एक शानदार पहचान मिली। इस फिल्म में उन्होंने बुजुर्ग पिता का किरदार निभाया, जबकि उस वक्त उनकी उम्र करीब 28 साल थी। फिल्म व्यावसायिक तौर पर बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन फिल्म समीक्षकों ने उनकी अदाकारी की जमकर तारीफ की। उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला और यह फिल्म उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इसके बाद उन्होंने विलेन, कॉमेडी और करेक्टर रोल में खुद को साबित किया। कर्मा, तेजाब और चालबाज जैसी फिल्मों में उनके नेगेटिव रोल चर्चा में रहे। वहीं राम लखन और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे में उनकी कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को खूब पसंद आई। 1990 और 2000 के दशक में वह लगातार सफल फिल्मों का हिस्सा रहे। हम आपके हैं कौन..!, कुछ कुछ होता है, ए वेडनसडे!, एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी और द कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया। उन्होंने 500 से अधिक फिल्मों में काम किया है। एक्टिंग के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार सहित कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। अमिताभ से प्रोफेशनलिज्म का सबक मिला था साल 1986 था और फिल्म आखिरी रास्ता की शूटिंग चल रही थी। उस दौर में चेन्नई की भीषण गर्मी के बीच अनुपम खेर को अमिताभ बच्चन से प्रोफेशनलिज्म का एक सबक मिला था। दरअसल, उन दिनों अनुपम खेर फिल्म सारांश की कामयाबी के बाद खुद को बड़ा स्टार समझने लगे थे। शोहरत का असर था और थोड़ा सा गुरूर भी आ गया था। चेन्नई में 40-45 डिग्री तापमान था। उनके मेकअप रूम का AC खराब हो गया। इस बात पर उन्होंने प्रोडक्शन टीम पर काफी गुस्सा किया। जब वे सेट पर पहुंचे, तो मंजर कुछ और ही था। उन्होंने देखा कि अमिताभ बच्चन एक कोने में खामोशी से बैठे अपनी लाइनों की तैयारी कर रहे थे। हैरानी की बात यह थी कि इतनी सख्त गर्मी में भी उन्होंने भारी दाढ़ी, मूंछ, विग, जैकेट और यहां तक कि एक शॉल ओढ़ रखी थी। यह देख अनुपम से रहा नहीं गया और उन्होंने अमिताभ से तअज्जुब से पूछा, “सर, इतनी भीषण गर्मी में आपने यह सब पहन रखा है, क्या आपको गर्मी नहीं लग रही?” इस पर अमिताभ ने मुस्कुराते हुए बहुत ही गहरी बात कही, “अनुपम, गर्मी के बारे में सोचता हूं तो लगती है, नहीं सोचता तो नहीं लगती।” अमिताभ की इस एक लाइन ने अनुपम का नजरिया बदल दिया। उन्हें एहसास हुआ कि एक कलाकार को बाहरी सुख-सुविधाओं से ज्यादा अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। उस दिन के बाद से उन्होंने कभी भी सेट पर AC या पंखे के लिए कोई हंगामा नहीं किया। बैंक खाते में महज 400 रुपए बचे थे अनुपम खेर साल 2004 के आसपास एक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे थे। उनके बैंक खाते में उस वक्त महज 400 रुपए बचे थे और वे दिवालिया होने के कगार पर थे। समदिश के पॉडकास्ट में खेर ने बताया था कि उस दौर में वे एक बड़ा टीवी प्रोडक्शन हाउस खड़ा करने का ख्वाब देख रहे थे और खुद को टीवी टायकून के तौर पर स्थापित करना चाहते थे। अपने प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने भारी कर्ज लिया, लेकिन बढ़ते ब्याज ने हालात को और ज्यादा संगीन बना दिया। हालात यहां तक पहुंच गए कि उन्हें अपना घर और दफ्तर तक गिरवी रखना पड़ा। दिलचस्प बात यह रही कि उसी दौरान वे बड़े बैनर की फिल्मों में काम कर रहे थे, इसलिए बाहरी दुनिया को उनके इस संघर्ष और परेशानी का अंदाजा नहीं था। हालांकि, इस मुश्किल दौर के बाद उन्होंने दोबारा हौसले के साथ शुरुआत की और फिर कई फिल्मों में काम कर इस संकट से बाहर निकले। चेहरे के लकवे के बावजूद की फिल्म की शूटिंग जब अनुपम खेर का करियर बुलंदी पर था और वे करीब 150 फिल्मों में काम कर चुके थे, उसी दौरान अचानक उन्हें फेशियल पैरालिसिस हो गया। टीवी शो आप की अदालत में अनुपम खेर ने बताया था कि एक दिन वे अनिल कपूर के घर खाना खा रहे थे। तभी अनिल की पत्नी सुनीता ने उनसे कहा कि वे एक आंख से पलक नहीं झपका रहे हैं। पहले उन्हें लगा कि शायद यह थकान की वजह से है, लेकिन अगले दिन जब वे ब्रश कर रहे थे तो पानी अपने आप मुंह से बाहर टपकने लगा। नहाते वक्त साबुन आंख में चला गया। तब उन्हें एहसास हुआ कि मामला गंभीर है। वे फौरन फिल्ममेकर यश चोपड़ा के पास पहुंचे। यश चोपड़ा ने उन्हें डॉक्टर के पास भेजा। बॉम्बे हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन ने जांच के बाद बताया कि उन्हें फेशियल पैरालिसिस है और दो महीने तक पूरा आराम करने की सलाह दी। डॉक्टर ने दवाएं शुरू करने को कहा और काम से दूरी बनाने की हिदायत दी। इसी दिन फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ के सेट पर उनका पहला दिन था, जहां अंताक्षरी वाला मशहूर सीन शूट होना था। खेर ने बताया था कि डॉक्टर की सलाह के बावजूद उन्होंने शूटिंग जारी रखने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि अगर वे डरकर घर बैठ जाएंगे तो जिंदगी भर बीमारी से डरते रहेंगे। जब वे सेट पर पहुंचे तो पहले सलमान खान और माधुरी दीक्षित को लगा कि वे मजाकिया अंदाज में एक्टिंग कर रहे हैं। बाद में उन्होंने पूरी टीम को अपनी हालत बताई, लेकिन साफ कहा कि वे काम करने के लिए तैयार हैं। अनुपम खेर ने कहा था कि जिंदगी कभी-कभी ऐसे इम्तिहान लेती है, जो इंसान को अपनी असली हिम्मत का एहसास कराते हैं। 'बेस्ट कॉमेडियन' कैटेगरी में पांच फिल्मफेयर जीते बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर के नाम फिल्मफेयर अवॉर्ड में ‘बेस्ट कॉमेडियन’ कैटेगरी में सबसे ज्यादा पांच बार जीतने का रिकॉर्ड है। उन्हें यह सम्मान राम लखन (1989), लम्हे (1991), खेल (1992), डर (1993) और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995) में शानदार एक्टिंग के लिए मिला था। खास बात यह थी कि उन्होंने 1992 से 1994 तक लगातार तीन साल यह अवॉर्ड जीतकर एक अलग मुकाम बनाया। इस कैटेगरी में उनके बाद एक्टर मेहमूद का नाम आता है, जिन्होंने चार बार यह पुरस्कार जीता। हालांकि, फिल्मफेयर ने 2007 के बाद ‘बेस्ट कॉमेडियन’ की अलग कैटेगरी खत्म कर दी थी। वेटर ने हॉलीवुड फिल्म का ऑडिशन रिकॉर्ड किया था अनुपम खेर को हॉलीवुड फिल्म सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक में काम करने का मौका मिला, जिसमें रॉबर्ट डी नीरो, ब्रैडली कूपर और जेनिफर लॉरेंस जैसे कलाकार थे और डायरेक्टर डेविड ओ. रसेल थे। फिल्म में एक हिंदुस्तानी किरदार की जरूरत थी, जिसके लिए अनुपम खेर को ऑडिशन देना था। दरअसल, उस वक्त अनुपम खेर राजस्थान के एक छोटे से गांव में शूटिंग कर रहे थे, इसलिए उनका स्काइप से ऑडिशन होना था। आज से करीब 15 साल पहले गांव में स्काइप की व्यवस्था अपने आप में एक चुनौती थी। किसी तरह कंप्यूटर लगाया गया, मगर ऑडिशन के वक्त आवाज काम नहीं कर रही थी। इसलिए उधर से मैसेज आया-“नेक्स्ट टाइम बी मोर प्रोफेशनल।” खेर को गुस्सा आया, जिस पर उन्होंने जवाब दिया, “गूगल सर्च मी।” इसके बाद तय हुआ कि टोरंटो में दोबारा ऑडिशन होगा। टोरंटो पहुंचकर अनुपम खेर पूरे एहतियात के साथ तैयार बैठे थे। दिल में ख्वाहिश थी कि रॉबर्ट डी नीरो के साथ काम करने का मौका मिलेगा। मगर किस्मत ने फिर इम्तिहान लिया। तकनीकी खराबी आ गई और उन्हें फोन पर कहा गया कि अगर सुबह तक लिंक नहीं मिला तो रोल हाथ से निकल जाएगा। तभी होटल के एक बांग्लादेशी वेटर अब्दुल को अनुपम खेर ने अपनी परेशानी बताई। उसने कहा कि उसके पास आईफोन 3 है, जिससे वह शूट करके लिंक भेज सकता है। इस तरह ऑडिशन रिकॉर्ड हुआ और उन्हें रोल मिल गया। रॉबर्ट डी नीरो ने अनुपम खेर से माफी मांगी थी इसके बाद शूटिंग के दौरान जब अनुपम खेर पहली बार रॉबर्ट डी नीरो से मिले तो उनके जज्बात काबू में नहीं रहे। उन्होंने उन्हें गणेश जी की खूबसूरत मूर्ति भेंट की, जिस पर रॉबर्ट डी नीरो की ओर से उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला, लेकिन फिल्म सेट पर रॉबर्ट डी नीरो पूरी तरह अपने किरदार में थे। एक सीन में उनका किरदार गुस्से में डॉक्टर बने अनुपम खेर को घर से बाहर निकाल देता है। रिहर्सल में उन्होंने सचमुच धक्का देकर बाहर कर दिया। इसके बाद सीन बदलने की बातें होने लगीं। तब खेर ने हिम्मत दिखाते हुए कहा, “आठ लोग सीन में हैं, आपने सिर्फ एक का नजरिया सुना है। मेरे किरदार की भी बात है।” माहौल में सन्नाटा छा गया। दोबारा रिहर्सल हुई और सीन संतुलन के साथ शूट हुआ। जिसके बाद रात ढाई बजे डी नीरो ने उन्हें वैन में बुलाकर कहा, “आई एम सॉरी, आई वॉज़ सेल्फिश।” अनुपम खेर और किरण खेर की लव स्टोरी अनुपम खेर और किरण खेर की लव स्टोरी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। यह कहानी दोस्ती से शुरू होकर गहरे प्यार तक पहुंची। अनुपम की पहली शादी एक्ट्रेस मधुमालती कपूर से हुई थी। दोनों की मुलाकात नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में पढ़ाई के दौरान हुई। 1979 में परिवार की रजामंदी से उन्होंने शादी की, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। जिसके बाद एक साल के भीतर ही दोनों अलग हो गए। इसके बाद अनुपम खेर की जिंदगी में फिर से किरण आईं। दरअसल, अनुपम और किरण की पहली मुलाकात चंडीगढ़ में थिएटर के दिनों में हुई थी। दोनों रंगमंच से जुड़े थे और धीरे-धीरे बहुत अच्छे दोस्त बन गए। करीब दस साल तक उनकी दोस्ती कायम रही। वे एक-दूसरे के राजदार थे। किरण जानती थीं कि अनुपम किस लड़की को पसंद करते हैं और अनुपम को भी किरण की हर बात मालूम होती थी। लेकिन तब तक उनके बीच सिर्फ दोस्ती थी, प्यार का एहसास नहीं। समय बदला। किरण की शादी बिजनेसमैन गौतम बेरी से हो चुकी थी, लेकिन उनकी शादीशुदा जिंदगी खुशहाल नहीं थी। उधर अनुपम भी अपनी पहली शादी से अलग हो चुके थे। इसी बीच किरण एक नाटक के सिलसिले में कोलकाता गई थी। उस समय अनुपम एक फिल्म के लिए सिर मुंडवाए हुए थे। एक शाम जब वे किरण के कमरे से निकल रहे थे, तो अचानक दोनों की नजरें मिलीं। थोड़ी देर बाद अनुपम ने दरवाजा खटखटाया और साफ शब्दों में कहा, “मुझे लगता है मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं।” उस पल सब कुछ बदल गया। दोस्ती की जगह प्यार ने ले ली। किरण ने भी अपने दिल की आवाज सुनी। उन्होंने अपनी पहली शादी खत्म की और 1985 में अनुपम खेर से शादी कर ली। आज उनकी शादी को चार दशक से ज्यादा हो चुके हैं। अनुपम ने किरण के बेटे सिकंदर खेर को अपने बेटे की तरह अपनाया। अनुपम खेर के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स अनुपम खेर ने अपने करियर की 550वीं फिल्म ‘खोसला का घोसला 2’ की शूटिंग जनवरी में शुरू कर दी है। यह फिल्म 2006 की चर्चित कल्ट क्लासिक ‘खोसला का घोसला’ का सीक्वल है। फिल्म का निर्देशन उमेश बिष्ट कर रहे हैं, जबकि इसमें बोमन ईरानी भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। ________________________ बॉलीवुड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें.... अभिषेक बच्चन@50; नकली अंगूठी से ऐश्वर्या को किया प्रपोज:पैसे नहीं थे तो अवॉर्ड शो में पहनी पुरानी शेरवानी, विल स्मिथ का तोड़ा रिकॉर्ड अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के घर जन्मे अभिषेक की पहचान सिर्फ एक सुपरस्टार के बेटे तक सीमित नहीं रही। उम्मीदों, असफलताओं, आलोचनाओं और फिर सफलता के चक्र से गुजरते हुए उन्होंने अपनी खुद की पहचान बनाई और युवा, धूम, गुरु, सरकार जैसी फिल्मों में अपनी एक्टिंग से लोगों का दिल जीता। पूरी खबर पढ़ें....

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भारत-न्यूजीलैंड जहां साउथ अफ्रीका से हारे, वहीं फाइनल खेलेंगे:इकोनॉमी, रन-रेट में दोनों बराबर; पावरप्ले में कीवी, मिडिल ओवर्स में इंडिया आगे

टी-20 वर्ल्ड कप 7 फरवरी को 20 टीमों के बीच शुरू हुआ। 5 मार्च तक 2 फाइनलिस्ट टीमें मिल गईं, जिनके बीच 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खिताबी मुकाबला खेला जाएगा। न्यूजीलैंड ने कोलकाता और भारत ने मुंबई में सेमीफाइनल जीता। दोनों ही टीमें अहमदाबाद में 1-1 मैच साउथ अफ्रीका से हार चुकी हैं, अब इसी मैदान पर टाइटल की दावेदारी पेश करेंगी। भारत 2007 और 2024 में चैंपियन बन चुका है, वहीं कीवी टीम 2021 के बाद अब फाइनल में पहुंची है। टूर्नामेंट में दोनों टीमों का प्रदर्शन… भारत को इकलौती हार सुपर-8 स्टेज में मिली मेजबान भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप की शुरुआत अमेरिका के खिलाफ मैच से की। पावरप्ले में 4 विकेट गंवाने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 84 रन बनाए और टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाया। टीम ने फिर नामीबिया, पाकिस्तान और नीदरलैंड के खिलाफ आसान मुकाबले जीते। सुपर-8 स्टेज में होम टीम का पहला मैच साउथ अफ्रीका से अहमदाबाद में हुआ। पावरप्ले में विकेट गिरने के बावजूद प्रोटियाज टीम ने 187 रन बना दिए। भारत 111 ही बना सका। इस हार के बाद भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 256 रन बनाकर कमबैक किया। टीम ने फिर वेस्टइंडीज के खिलाफ 197 रन चेज कर सेमीफाइनल में जगह बना ली। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भारत ने 253 रन बना दिए, लेकिन ये स्कोर भी जीत के लिए काफी नहीं लग रहा था। इंग्लैंड के युवा बैटर जैकब बेथेल ने शतक लगाया और टीम को जीत के करीब पहुंचाया। हालांकि, भारत ने 7 रन के करीबी अंतर से हाई-स्कोरिंग मैच जीता और फाइनल में एंट्री कर ली। हर स्टेज में 1-1 मैच हारा न्यूजीलैंड न्यूजीलैंड ने ग्रुप स्टेज में अफगानिस्तान को हराकर टूर्नामेंट शुरू किया। टीम ने फिर UAE को 10 विकेट से हरा दिया। चेन्नई में दोनों मैच खेलने के बाद टीम अहमदाबाद में साउथ अफ्रीका से भिड़ने चली गई। जहां प्रोटियाज टीम ने 8 विकेट से मुकाबला जीत लिया। न्यूजीलैंड ने फिर चेन्नई में कनाडा को हराया और सुपर-8 में एंट्री कर ली। सेकेंड राउंड में न्यूजीलैंड का पाकिस्तान के खिलाफ पहला ही मैच बारिश के कारण बेनतीजा हो गया। टीम फिर कोलंबो में होम टीम श्रीलंका के खिलाफ स्ट्रगल कर रही थी। पावरप्ले और मिडिल ओवर्स में खराब प्रदर्शन के बाद डेथ ओवर्स में 70 रन बनाकर टीम ने 168 रन बना दिए। श्रीलंका 107 रन ही बना सका। होम टीम को हराने के बाद टीम इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी सुपर-8 मैच हार गई। सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए टीम श्रीलंका पर डिपेंड हो गई। श्रीलंका ने अपने आखिरी मैच में पाकिस्तान को 7 रन से हराया और बेहतर रन रेट के कारण न्यूजीलैंड ने क्वालिफाई कर लिया। सेमीफाइनल में टीम ने साउथ अफ्रीका के 170 रन का टारगेट 12.5 ओवर में ही चेज कर लिया। स्ट्राइक रेट में आगे न्यूजीलैंड न्यूजीलैंड ने दोनों मेजबान देशों में अपने मैच खेले। भारत के मुकाबले श्रीलंका में रन बनाना मुश्किल होता है, इसके बावजूद कीवी टीम ने भारत से बेहतर रन रेट और स्ट्राइक रेट से स्कोर किया। कीवी टीम का बैटिंग औसत भी भारत के 27.31 के मुकाबले 41.68 रहा। न्यूजीलैंड के 2 ही बैटर्स खाता नहीं खोल सके, जबकि भारत के बैटर्स 11 बार टूर्नामेंट में खाता नहीं खोल पाए। टीम इंडिया ने बाउंड्री लगाने में जरूर न्यूजीलैंड को पीछे छोड़ दिया। भारत ने 88 छक्के और 128 चौके लगाए। कीवी टीम 57 सिक्स और 109 चौके ही लगा पाई। भारत ने टूर्नामेंट में 3 बार 200 प्लस का स्कोर भी बनाया, जबकि कीवी टीम का बेस्ट स्कोर 183 रन ही है। हालांकि, ये स्कोर भी रन चेज में आया था। न्यूजीलैंड के स्पिनर्स भारत से बेहतर न्यूजीलैंड ने 7 पारियां खेलीं, इनमें टीम को 41 विकेट मिले। 18 स्पिनर्स और बाकी पेसर्स ने लिए। दूसरी ओर टीम इंडिया ने 8 पारियों में 59 विकेट लिए। 23 स्पिनर्स और बाकी पेसर्स को मिले। न्यूजीलैंड के स्पिनर्स ने 7.5 की इकोनॉमी से रन खर्च किए, जबकि भारत के स्पिनर्स ने 8.3 की इकोनॉमी से रन लुटाए। ओवरऑल इकोनॉमी में भी न्यूजीलैंड ने भारत से बेहतर परफॉर्म किया। मिडिल ओवर्स में स्ट्रॉन्ग है टीम इंडिया अलग-अलग फेज में बैटिंग देखें तो टीम इंडिया ने पावरप्ले में औसतन 58 रन बनाने में 2 विकेट गंवाए हैं। हालांकि, टीम 2 बार 80 प्लस भी बना चुकी है, लेकिन ये स्कोर नामीबिया और जिम्बाब्वे के खिलाफ रहे। 7 से 16 ओवर के बीच भारत जरूर स्ट्रॉन्ग रहा, टीम ने औसतन 93 रन बनाने में 3 विकेट गंवाए। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 123 रन टीम का बेस्ट स्कोर रहा। डेथ ओवर्स में टीम इंडिया कमजोर रही। आखिर के 4 ओवर्स में औसत स्कोर 44 रन ही रहा। टीम 3 बार ही 60 प्लस रन बना सकी और एक बार भी 70 का स्कोर पार नहीं कर पाई। न्यूजीलैंड पावरप्ले में बहुत स्ट्रॉन्ग न्यूजीलैंड को फिन एलन और टिम साइफर्ट की ओपनिंग जोड़ी ने मजबूत शुरुआत दिलाई। टारगेट का पीछा करते हुए अक्सर दोनों प्लेयर्स ने फिफ्टी पार्टनरशिप की और मिडिल ओवर्स में ही मैच खत्म कर दिया। शुरुआती 6 ओवर में टीम ने औसतन 62 रन बनाने में 1 विकेट गंवाया। 84 रन टीम का बेस्ट स्कोर रहा, जो उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ सेमीफाइनल में बनाया। मिडिल ओवर्स में न्यूजीलैंड ने विकेट जरूर औसतन 2 ही गंवाए, लेकिन टीम का औसत स्कोर भी 89 तक ही पहुंच सका। हालांकि, टीम कनाडा के खिलाफ इस फेज में 116 रन बना चुकी है। डेथ ओवर्स में न्यूजीलैंड की हालत भारत से भी कमजोर है, टीम का औसत स्कोर 39 रन ही रहा। हालांकि, टीम को 4 बार ही आखिरी 4 ओवर में बैटिंग का मिला, ज्यादातर मौकों पर मैच 16वें ओवर से पहले ही खत्म हो गया। प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की रेस में सैमसन भारत के लिए ईशान किशन, कप्तान सूर्यकुमार यादव और संजू सैमसन टॉप-3 स्कोरर रहे। ईशान और सूर्या ने 8-8 मैच खेले, लेकिन संजू ने 4 ही मैचों में 2 फिफ्टी लगाकर 232 रन बना दिए। उन्हें ICC ने प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की रेस में भी रखा है। क्योंकि सैमसन भारत के दोनों नॉकआउट मैचों में प्लेयर ऑफ द मैच रहे। अगर वे फाइनल में भी मैच जिताऊ पारी खेलते हैं तो इस अवॉर्ड को जीत सकते हैं। वरुण को 13 विकेट, बुमराह की इकोनॉमी कमाल गेंदबाजी में भारत के लिए मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती 8 मैचों में 13 विकेट ले चुके हैं। एक और विकेट लेते ही वे टूर्नामेंट के टॉप विकेट टेकर बन जाएंगे। वरुण ने ग्रुप स्टेज के 4 मैचों में 9 विकेट लिए, लेकिन बाद के 4 मुकाबलों में वे 4 विकेट ही ले सके। उनकी इकोनॉमी भी बेहद खराब रही। सेमीफाइनल में तो वरुण ने 4 ही ओवर में 64 रन खर्च कर दिए। जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या ने जरूर अपनी इकोनॉमिकल बॉलिंग से टीम को संभाले रखा। बुमराह ने महज 6.62 की इकोनॉमी से 10 विकेट झटक लिए। वहीं हार्दिक ने 9 से कम की इकोनॉमी से 8 विकेट अपने नाम किए। एलन-साइफर्ट में टॉप स्कोरर बनने की जंग न्यूजीलैंड के दोनों ओपनर फिन एलन और टिम साइफर्ट टूर्नामेंट में छाए रहे। एलन ने सेमीफाइनल में 33 गेंद पर सेंचुरी लगाई, वे 289 रन बनाकर टूर्नामेंट के तीसरे टॉप स्कोरर हैं। 95 रन बनाकर वे टॉप स्कोरर भी बन सकते हैं। दूसरी ओर साइफर्ट 3 फिफ्टी लगाकर 274 रन बना चुके हैं। रचिन की इकोनॉमी बुमराह के बराबर ऑलराउंडर रचिन रवींद्र ने बैटिंग से ज्यादा काम स्पिन गेंदबाजी में किया है। उन्होंने 8 मैचों में महज 6.88 की इकोनॉमी से रन खर्च करते हुए 11 विकेट झटक लिए। सेमीफाइनल में 2 अहम विकेट लेने वाले मैट हेनरी के नाम भी 9 विकेट हैं। मिचेल सैंटनर और लॉकी फर्ग्यूसन ने भी दोनों बॉलर्स का बखूबी साथ दिया है। भारत की स्ट्रेंथ और वीकनेस न्यूजीलैंड की स्ट्रेंथ और वीकनेस

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उत्तर प्रदेश को एक बार फिर 6 नई परियोजनाओं की सौगात मिली है। दरअसल, यहां मार्ग कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति की बैठक में 6 लाख परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। इस परियोजनाओं के तहत उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में यह … Sat, 07 Mar 2026 08:50:26 GMT

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Iran Israel War Live Update: परमाणु हमला करेगा ईरान? |Khamenei | Netanyahu | Trump |Iran America War #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-07T05:07:56+00:00

Donald Trump ने साफ कहा कि Iran से कोई बातचीत नहीं होगी | #middleeastwar #iranusconflict #trump #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-07T05:02:15+00:00

Iran की राजधानी तेहरान में भीषण हवाई हमले | #middleeastwar #tehran #airstrike #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-07T05:12:57+00:00

Iran Israel War Update: ईरान की सड़क पर लाखों लोग, अचानक मच गया बवाल! | Khamenei | Iran America War #tmktech #vivo #v29pro
2026-03-07T05:00:42+00:00
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