शी चिनफिंग ने च्यांगसू प्रतिनिधिमंडल की विचार-विमर्श बैठक में भाग लिया
बीजिंग, 6 मार्च (आईएएनएस)। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव, चीनी राष्ट्रपति और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष शी चिनफिंग ने 5 मार्च को 14वीं चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा (एनपीसी) के चौथे सत्र में च्यांगसू प्रांतीय एनपीसी प्रतिनिधिमंडल की विचार-विमर्श बैठक में भाग लिया।
इस दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 15वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्यों और कार्यों को प्राप्त करने के लिए अधिक जटिल वातावरण का सामना करना और अधिक गहरे विरोधाभासों को दूर करना आवश्यक है। च्यांग्सू और अन्य प्रमुख आर्थिक प्रांत, जो सुधार और खुलेपन में अग्रणी हैं, उन्हें नई परिस्थितियों का अध्ययन करने, नई समस्याओं को हल करने और अनुभव संचित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
च्यांगसू प्रांतीय एनपीसी प्रतिनिधिमंडल की विचार-विमर्श बैठक जीवंत और उत्साहपूर्ण रही। छह प्रतिनिधियों ने नए औद्योगीकरण को बढ़ावा देने, तकनीकी नवाचार को औद्योगिक नवाचार के साथ एकीकृत करने, प्रमुख मूल प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान को मजबूत करने, सुंदर गांवों का निर्माण करने, बीज उद्योग की समस्याओं को हल करने और खेल भावना को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
सभी के भाषण सुनने के बाद, शी चिनफिंग ने अपना भाषण दिया, जिसमें उन्होंने सरकार की कार्य रिपोर्ट पर अपनी सहमति व्यक्त की और च्यांग्सू की वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए, आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 15वीं पंचवर्षीय योजना को लागू करने के लिए स्पष्ट आवश्यकताएं प्रस्तुत कीं।
शी चिनफिंग ने इस बात पर जोर दिया कि उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देने और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए नई गुणवत्ता वाली उत्पादक शक्तियों का विकास महत्वपूर्ण है। इस संबंध में च्यांग्सू की मजबूत नींव है, और उसे अग्रणी बनने का प्रयास करना चाहिए। च्यांगसू प्रांत को शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा प्रतिभा के एकीकृत विकास को बढ़ावा देना चाहिए और मौलिक नवाचार को मजबूत करने और प्रमुख मूल प्रौद्योगिकियों से निपटने में नई सफलताओं के लिए प्रयासरत रहना चाहिए, ताकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त किया जा सके।
शी चिनफिंग ने इस बात पर जोर दिया कि केवल स्थिर आर्थिक आधार और बाहरी झटकों का सामना करने की मजबूत क्षमता वाले प्रांत ही राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता को बनाए रख सकते हैं। च्यांग्सू को अपना आर्थिक लचीलापन बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। उसे अपनी आंतरिक क्षमताओं को मजबूत करना, राष्ट्रीय बाजार में पूरी तरह से एकीकृत होना और घरेलू आर्थिक चक्र को सुचारू बनाने में सहायता करनी चाहिए। साथ ही उसे उच्च स्तरीय खुलेपन का विस्तार करना, वैश्विक बाजार का व्यापक रूप से अन्वेषण करना और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चक्र से बेहतर ढंग से जुड़कर विभिन्न जोखिमों से बचाव करना चाहिए।
शी चिनफिंग ने कहा कि चीनी शैली का आधुनिकीकरण सभी लोगों के लिए साझा समृद्धि का आधुनिकीकरण है। च्यांग्सू प्रांत को नई परिस्थितियों में बेहतर जीवन के लिए जनता की नई अपेक्षाओं और आजीविका के नए स्वरूपों को सटीक रूप से समझना चाहिए और उच्च गुणवत्ता और पूर्ण रोजगार प्राप्त करने, शहरी और ग्रामीण निवासियों की आय बढ़ाने, और बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक गारंटी के स्तर को और बेहतर बनाने जैसे मुद्दों का सक्रिय रूप से समाधान करना चाहिए और साथ ही सभी लोगों के लिए सामान्य समृद्धि को बढ़ाने के प्रभावी तरीके तलाशना चाहिए।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पश्चिम एशिया संकट पर भारत का रुख संतुलित, क्षेत्रीय मुद्दों में बाहरी दखल से बचना चाहिए: पूर्व रॉ प्रमुख विक्रम सूद
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम एशिया में संकट को लेकर भारत एक समझदारी भरा और संतुलित रुख अपना रहा है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय संघर्षों का समाधान केवल वही देश कर सकते हैं, जो सीधे तौर पर उसमें शामिल हैं।
आईएएनएस से बातचीत में विक्रम सूद ने कहा कि बाहरी शक्तियों को क्षेत्रीय मुद्दों में अनावश्यक दखल देने से बचना चाहिए। मुझे लगता है कि हम यहां बहुत समझदारी से काम कर रहे हैं। पश्चिम एशिया की समस्याओं को हम हल नहीं कर सकते। यह काम उसी क्षेत्र के लोगों को खुद करना होगा। बेवजह हस्तक्षेप करने का कोई मतलब नहीं है।
पूर्व रॉ प्रमुख ने कहा कि खुफिया रणनीति के मामले में दीर्घकालिक सोच बेहद जरूरी है, खासकर ऐसे समय में जब नई तकनीकें वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को तेजी से बदल रही हैं।
उन्होंने कहा, “इंटेलिजेंस रणनीति पर सतही चर्चा नहीं की जा सकती। खुफिया तंत्र को आने वाले 20 साल बाद भी प्रासंगिक रहना होगा। इसे लगातार विकसित और प्रभावी बनाए रखना जरूरी है। सरकारों को यह भी सोचना होगा कि एआई और उससे जुड़ी तकनीकों के साथ आगे कैसे बढ़ना है।”
उन्होंने वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भारत के सामने कई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
सूद ने कहा कि एक महाशक्ति का प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अस्थिरता पैदा हो सकती है। वहीं चीन के साथ हमारे संबंध भी अभी सबसे अच्छे दौर में नहीं हैं।
भारत के प्रमुख भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक मंच रायसीना डायलॉग के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने इसे देश में आयोजित होने वाले सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक मंचों में से एक बताया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह आज देश में हो रहे सबसे अच्छे संवादों में से एक है। इसका दायरा बहुत व्यापक है और इसमें उठाए जाने वाले विषय महत्वपूर्ण और भविष्य से जुड़े हैं। मुझे खुशी है कि यह आयोजन हो रहा है और लोग इस पर ध्यान दे रहे हैं।”
--आईएएनएस
एएसएच/वीसी
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