मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच कतर ने फोर्स मेज्योर की चेतावनी दी, तेल और गैस की आपूर्ति रुकने का खतरा
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष कुछ दिनों तक और जारी रहता है तो खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातकों को ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित करना पड़ सकता है। इससे तेल और गैस की आपूर्ति रुक सकती है और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
दरअसल अगर कोई तेल कंपनी किसी युद्ध या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल की सप्लाई नहीं कर पाती, तो वह फोर्स मेज्योर घोषित कर सकती है और उसे अनुबंध के उल्लंघन का दोष नहीं माना जाएगा।
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में साद अल-काबी ने कहा कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो खाड़ी क्षेत्र के सभी निर्यातकों को आने वाले दिनों में फोर्स मेज्योर घोषित करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी, उन्हें कानूनी रूप से भारी जिम्मेदारी और नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टैंकर और अन्य जहाज जलडमरूमध्य से गुजरने में असमर्थ रहते हैं, तो अगले दो से तीन हफ्तों में कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं प्राकृतिक गैस की कीमतें चार गुना तक बढ़कर 40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) तक जा सकती हैं।
इस सप्ताह ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में करीब 20 प्रतिशत और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) में लगभग 25 प्रतिशत की तेजी देखी गई है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 89 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा था, जबकि डब्ल्यूटीआई 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दोनों बेंचमार्क अप्रैल 2024 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर हैं।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादक कतर इस सप्ताह फोर्स मेज्योर घोषित कर चुका है, जब ईरानी ड्रोन हमले में उसके रस लाफान एलएनजी संयंत्र को नुकसान पहुंचा। यह संयंत्र कतर का सबसे बड़ा एलएनजी प्लांट है और हमले के बाद हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अगर हमले तुरंत बंद भी हो जाएं, तब भी निर्यात संचालन सामान्य होने में हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है, क्योंकि लॉजिस्टिक्स में गंभीर बाधाएं आई हैं। उन्होंने बताया कि कतर के 128 एलएनजी कैरियर जहाजों में से फिलहाल केवल छह या सात ही कार्गो लोड करने के लिए उपलब्ध हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में कम से कम 10 जहाजों पर हमले हुए हैं और बीमा कंपनियों ने प्रीमियम काफी बढ़ा दिया है। इसके चलते शिपिंग कंपनियां इस इलाके से जहाज भेजने में हिचक रही हैं।
इस बीच ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई है। इन हमलों में बहरीन के एक तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया।
डीबीएस बैंक की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भले ही ईरानी नौसेना के युद्धपोत सीधे तौर पर बड़ा खतरा न हों, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों के कारण शिपमेंट धीमे पड़ सकते हैं। इससे बीमा, शिपिंग लागत और ऊर्जा कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारतीय रेलवे की माल ढुलाई से आय फरवरी में 3 प्रतिशत बढ़कर 14,572 करोड़ रुपए हुई
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे की माल ढुलाई से आय फरवरी में सालाना आधार पर 2.97 प्रतिशत बढ़कर 14,571.99 करोड़ रुपए हो गई है। यह जानकारी शुक्रवार को सरकार की ओर से दी गई।
पिछले वर्ष के इसी महीने में माल ढुलाई से प्राप्त आय 14,151.96 करोड़ रुपए थी।
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस महीने माल ढुलाई में पिछले वर्ष के फरवरी महीने के 132.48 मिलियन टन (एमटी) की तुलना में 3.96 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 137.72 मिलियन टन (एमटी) हो गई।
ट्रांसपोर्ट आउटपुट, जिसे नेट टन किलोमीटर (एनटीकेएम) में मापा जाता है, फरवरी 2026 में 4.18 प्रतिशत बढ़कर 76,007 मिलियन एनटीकेएम हो गया, जो एक वर्ष पहले 72,955 मिलियन एनटीकेएम था।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस महीने माल ढुलाई मुख्य रूप से कोयला, लौह अयस्क, तैयार इस्पात, उर्वरक, सीमेंट और कंटेनर कार्गो जैसी प्रमुख वस्तुओं द्वारा संचालित थी।
दैनिक माल ढुलाई में, लौह अयस्क की लोडिंग 0.529 मीट्रिक टन से बढ़कर 0.675 मीट्रिक टन हो गई (27.6 प्रतिशत की वृद्धि), जबकि कच्चा लोहा और तैयार इस्पात की लोडिंग 0.284 मीट्रिक टन से 20.8 प्रतिशत बढ़कर 0.343 मीट्रिक टन हो गई।
सरकार ने यह भी बताया कि इस्पात संयंत्रों के लिए कच्चे माल (लौह अयस्क को छोड़कर) की लोडिंग 0.096 मीट्रिक टन से बढ़कर 0.141 मीट्रिक टन हो गई, जो 46.9 प्रतिशत की वृद्धि है।
मंत्रालय के अनुसार, उर्वरक की लोडिंग 10.2 प्रतिशत बढ़कर 0.184 मीट्रिक टन हो गई, जबकि खनिज तेल और कंटेनर एक्जीक्यूटिव एंड इम्पोर्ट (ईएक्सआईएम) यातायात में 17.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
मासिक संचयी आंकड़ों से प्रमुख वस्तुओं में भी मजबूत वृद्धि देखी गई।
कंटेनर यातायात की बात करें तो, इस माह के दौरान आयातित माल ढुलाई में 5.6 प्रतिशत और घरेलू कंटेनर यातायात में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच, भारतीय रेलवे ने 1,503.8 मीट्रिक टन माल ढुलाई की, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 1,456.07 मीट्रिक टन से 3.28 प्रतिशत अधिक है।
सरकार के अनुसार, इस अवधि के दौरान माल ढुलाई राजस्व 1.61 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि एनटीकेएम (न्यूनतम किलोग्राम) में मापी गई माल ढुलाई 1.62 प्रतिशत बढ़कर 840,000 मिलियन एनटीकेएम हो गई।
--आईएएनएस
एबीएस/
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