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Explainer: रामलीला मैदान की रैली से विपक्ष ने क्या हासिल किया? 2027 से पहले INDIA गठबंधन की एकजुटता का कितना बड़ा संदेश...
INDIA Bloc: Rally राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी समेत विपक्ष के बड़े नेताओं का दिल्ली के रामलीला मैदान में जुटना महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं था.'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ निकला पैदल मार्च और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग विपक्ष की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसमें वह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बनाना चाहता है.
इस आयोजन का एक संदेश सत्ता पक्ष के लिए था, तो दूसरा अपने सहयोगी दलों और आगामी चुनावों की तैयारी कर रहे कार्यकर्ताओं के लिए था. बता दें 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में दिल्ली की इस रैली को केवल मौजूदा SIR विवाद के चश्मे से देखना पर्याप्त नहीं होगा. लेकिन ये विपक्ष के मजबूती से फिर खड़े होने का मौका है.
#WATCH | INDIA bloc mega rally | Delhi: Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, "I am telling you, poor Gyanesh Kumar cannot sleep at night. I feel bad that Gyanesh Kumar is scared and cannot sleep at night. But he has committed the biggest crime, trying to silence the voice and soul of… pic.twitter.com/0JY7o5IEdB
— ANI (@ANI) November 1, 2026
रामलीला मैदान से विपक्ष ने क्या संदेश देने की कोशिश की?
दरअसल, रविवार को विपक्षी नेताओं ने मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च किया. इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और दूसरे विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए. रैली का केंद्रीय मुद्दा SIR के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा.
सीईसी के हटने तक जारी रहेगा विपक्ष का विरोध
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटने से पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हुए हैं. राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र और वोट के अधिकार से जुड़ा सवाल बताया. खरगे ने कहा कि गठबंधन का विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते. अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के नाम गायब होने के मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार पर भी निशाना साधा.
क्या INDIA गठबंधन फिर से एकजुट होता दिख रहा है?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रामलीला मैदान में हुई इंडिया गठबंधन की इस रैली की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि यही है कि अलग-अलग राज्यों में अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं रखने वाले दल एक साझा मुद्दे पर एक मंच पर आए. कांग्रेस, वाम दलों, सपा और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की मौजूदगी ने यह दिखाने की कोशिश की गई कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल पर अलग-अलग आवाज उठाने के बजाय सामूहिक दबाव बना सकता है. बता दें 2024 लोकसभा चुनाव के बाद कई राज्यों में विपक्षी दलों के बीच मतभेद, नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर सवाल उठे हैं. ऐसे में यह रैली इसलिए भी अहम है क्योंकि आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में INDIA गठबंधन के सामने एकजुटता बनाए रखने की चुनौती होगी.
2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव पर इस रैली का क्या असर हो सकता है?
इस आयोजन का सबसे बड़ा चुनावी संदर्भ उत्तर प्रदेश है. 403 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में सपा और कांग्रेस दोनों INDIA गठबंधन के प्रमुख घटक हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने साथ चुनाव लड़ा था और राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 43 पर जीत दर्ज की थी. इस प्रदर्शन ने विपक्ष को यह भरोसा दिया कि साझा रणनीति से बीजेपी को चुनौती दी जा सकती है.
#WATCH | INDIA bloc mega rally | Delhi: Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, "Our religion says there is no enemy. We must not hate anyone. We must learn from everyone and work with love. We must protect the voice of every individual, the last person standing in the line, whether… pic.twitter.com/E7DiP3nfp2
— ANI (@ANI) November 1, 2026
पंजाब, उत्तराखंड और बाकी चुनावी राज्यों में विपक्ष को क्या फायदा हो सकता है?
2027 में चुनाव वाले पांच राज्यों में विपक्षी दलों की राजनीतिक स्थिति एक जैसी नहीं है. पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस प्रमुख विपक्षी ताकतों में शामिल है. उत्तराखंड में कांग्रेस बीजेपी को चुनौती देने की तैयारी में है. गोवा और मणिपुर में भी विपक्षी दलों के सामने स्थानीय समीकरण और संगठन की चुनौतियां हैं. ऐसे में दिल्ली की रैली से विपक्ष को एक साझा राष्ट्रीय मुद्दा मिला है.
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से विपक्ष को क्या हासिल होगा?
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग ने इस विरोध को एक स्पष्ट राजनीतिक लक्ष्य दिया है. इससे विपक्ष अपने आरोपों को सीधे चुनाव आयोग की जवाबदेही और निष्पक्षता के सवाल से जोड़ पा रहा है. यह मुद्दा केवल संसद या प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित न रहकर सड़क पर भी पहुंचा है. हालांकि, यहां बता दें कि राजनीतिक रैली में इस्तीफे की मांग उठने से मुख्य चुनाव आयुक्त का पद अपने आप खाली नहीं होता. संवैधानिक व्यवस्था में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है.
हम लगातार देख रहे हैं कि BJP 'वोट चोरी' कर रही है। उन्हें पता है कि वे बिना 'वोट चोरी' के नहीं जीत सकते।
— Congress (@INCIndia) November 1, 2026
बंगाल का चुनाव और वहां की तस्वीरें हमें आज भी याद हैं, जहां SIR और फोर्स के दम पर चुनाव चोरी कर लिया गया।
समाजवादी पार्टी ने एफिडेविट देकर 'वोट चोरी' के सबूत दिए, लेकिन… pic.twitter.com/2X9podzc5u
क्या इस रैली से विपक्ष को चुनावी फायदा मिलना तय है?
दरअसल, इसका जवाब अभी नहीं दिया जा सकता. रैली में बड़े नेताओं की मौजूदगी और कार्यकर्ताओं की भागीदारी विपक्ष के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त हो सकती है. इसके अलावा विपक्ष के सामने एक और परीक्षा है क्या वह SIR के मुद्दे के साथ रोजगार, महंगाई, किसान, शिक्षा और स्थानीय शासन जैसे सवालों को भी जोड़ पाएगा? अगर अभियान केवल एक मुद्दे तक सीमित रह गया तो उसका असर सीमित हो सकता है।
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