घर में बनी शाकाहारी थाली की कीमत में फरवरी में नहीं हुआ बदलाव, मांसाहारी थाली 3 प्रतिशत सस्ती
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। क्रिसिल इंटेलिजेंस की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में घर पर पकाई गई शाकाहारी थाली की कीमत में सालाना आधार पर कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि मांसाहारी थाली की कीमत में 3 प्रतिशत की गिरावट आई।
रिपोर्ट में बताया गया कि फरवरी में आलू, प्याज और दालों की कीमत में कमी आने के बावजूद भी शाकाहारी थाली की कीमत यथावत रहने की वजह टमाटर की कीमत बढ़ना है।
अधिक आवक के कारण प्याज की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत की गिरावट आई।
आलू की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में 13 प्रतिशत की गिरावट आई, क्योंकि फसल कटाई के चरम पर पहुंच चुकी है और पिछले रबी सीजन के कोल्ड स्टोरेज स्टॉक की बिक्री जारी है।
चालू वित्त वर्ष में अधिक ओपनिंग स्टॉक के कारण दालों की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत की गिरावट आई।
रिपोर्ट में बताया गया कि घर पर थाली बनाने की औसत लागत की गणना उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत में प्रचलित कच्चे माल की कीमतों के आधार पर की जाती है। मासिक बदलाव आम आदमी के खर्च पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाता है।
मांसाहारी थाली की कीमत में गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण ब्रॉयलर की कीमतों में वार्षिक आधार पर अनुमानित 7 प्रतिशत की कमी है। ब्रॉयलर की कीमतें कुल मांसाहारी थाली की लागत का 50 प्रतिशत होती है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुष्पन शर्मा ने कहा, “टमाटर की कीमतों में उछाल का कारण रोपाई में देरी है, जिससे फसल के विकास और पैदावार पर असर पड़ा। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच मंडियों में फसल की आवक में वार्षिक आधार पर 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।”
निकट भविष्य में सब्जियों की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। टमाटर की कीमतें अप्रैल के मध्य तक पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहने की संभावना है और फिर मौसमी आवक बढ़ने और बाजार में फसल चक्रों के बदलाव के साथ इनमें मजबूती आएगी।
शर्मा ने कहा, आलू की कीमतें मार्च-अप्रैल के दौरान, यानी आवक के चरम मौसम में, कम रहने की संभावना है, जबकि प्याज की कीमतों पर अगले दो से तीन महीनों में दबाव पड़ सकता है, जब तक कि निर्यात में मजबूत वृद्धि न हो।
मध्य पूर्व में व्याप्त अनिश्चितताओं और संभावित व्यापारिक बाधाओं के कारण निकट भविष्य में बासमती चावल की मांग में नरमी आ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
भारत के बासमती चावल निर्यात में ईरान का हिस्सा लगभग 18 प्रतिशत है और अन्य मध्य पूर्वी देशों का 55-60 प्रतिशत हिस्सा है, इसलिए निर्यातक संभावित रसद संबंधी चुनौतियों को लेकर सतर्क हैं।
शर्मा ने कहा, हालांकि, गैर-बासमती चावल निर्यात, जो मुख्य रूप से अफ्रीकी देशों को जाता है, पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
--आईएएनएस
एबीएस.
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
Surya Grahan 2026: दिन में ही हो जाएगी रात! जानें साल के दूसरे सूर्य ग्रहण की तारीख, समय और सावधानी
Surya Grahan 2026: साल 2026 खगोल विज्ञान के लिहाज से काफी खास माना जा रहा है. इस वर्ष कई बड़ी खगोलीय घटनाएं देखने को मिल रही हैं. साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लग चुका है. अब लोगों की नजरें साल के दूसरे सूर्य ग्रहण पर टिकी हैं. यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगने वाला है. वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए यह एक बेहद रोमांचक घटना मानी जा रही है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह ग्रहण कर्क राशि में लगेगा. इस दौरान चंद्रमा सूर्य के सामने आ जाएगा और सूर्य का बड़ा हिस्सा ढक जाएगा. जिन जगहों पर यह पूरी तरह दिखाई देगा, वहां कुछ समय के लिए दिन में ही अंधेरा जैसा माहौल बन सकता है. इसलिए इसे बेहद खास और दुर्लभ खगोलीय घटना माना जा रहा है.
सूर्य ग्रहण 2026 का समय
12 अगस्त को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण काफी लंबी अवधि तक रहेगा. ग्रहण की शुरुआत 12 अगस्त 2026 रात 09 बजकर 04 मिनट पर होगा. ग्रहण समाप्त 13 अगस्त 2026 सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर होगा. यह ग्रहण मुख्य रूप से कंकणाकृति (Annular Solar Eclipse) होगा. कंकणाकृति ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के बीच आ जाता है, लेकिन सूर्य पूरी तरह नहीं ढकता. इससे सूर्य के चारों तरफ एक चमकती हुई अंगूठी जैसा नजारा दिखाई देता है.
किन देशों में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण पृथ्वी के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट दिखाई देगा. पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा इन जगहों पर देखने को मिल सकता है आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्से उत्तरी स्पेन इसके अलावा यूरोप के कई देशों में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा. इनमें फ्रांस, ब्रिटेन और इटली शामिल हैं. ग्रहण के दौरान कई दिलचस्प प्राकृतिक बदलाव भी देखे जा सकते हैं. जैसे तापमान में हल्की गिरावट और पक्षियों के व्यवहार में बदलाव.
क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
भारत के लोगों के लिए यह ग्रहण देखने का मौका नहीं होगा. दरअसल ग्रहण के समय भारत में रात होगी. इसलिए यहां यह खगोलीय घटना दिखाई नहीं देगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल तभी मान्य होता है जब ग्रहण किसी क्षेत्र में दिखाई दे. क्योंकि 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होगा. मंदिरों के पट बंद नहीं होंगे और रोजमर्रा के काम भी सामान्य तरीके से चलते रहेंगे.
सूर्य ग्रहण देखते समय रखें ये सावधानियां
सूर्य ग्रहण देखना हमेशा सावधानी के साथ ही चाहिए. इसे कभी भी सीधे आंखों से नहीं देखना चाहिए. ऐसा करने से आंखों की रेटिना को नुकसान हो सकता है. ग्रहण देखने के लिए सोलर फिल्टर वाले चश्मे, दूरबीन, साधारण धूप का चश्मा, काला कांच या एक्स-रे फिल्म का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए. ये आंखों को सुरक्षा नहीं देते. जो लोग इस ग्रहण को देखने के लिए विदेश यात्रा कर रहे हैं या ऑनलाइन देखेंगे, उनके लिए भी इन सावधानियों का पालन करना जरूरी है.
यह भी पढ़ें: खत्म हुआ साल का पहला चंद्र ग्रहण, अब तुरंत करें ये जरूरी काम, घर में आएगी सुख-शांति
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation














.jpg)






