ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड लेनदेन वृद्धि में सरकारी बैंकों ने निजी बैंकों को पछाड़ा : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड लेनदेन वृद्धि में सरकारी बैंकों ने जनवरी में निजी बैंकों को पीछे छोड़ दिया है। इस दौरान क्रेडिट कार्ड से कुल ऑनलाइन लेनदेन में सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि सरकारी बैंकों के लिए यह दर 31.5 प्रतिशत और निजी बैंकों के लिए 2.7 प्रतिशत रही है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में दी गई।
केयरएज रिपोर्ट में कहा गया कि क्रेडिट कार्ड खर्च जनवरी 2026 में सालाना आधार पर 8.1 प्रतिशत बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी बैंकों ने बकाया कार्डों में साल-दर-साल आधार पर 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है - जो निजी बैंकों की तुलना में एक महत्वपूर्ण उछाल है।
कुल क्रेडिट कार्ड लेनदेन में डिजिटल भुगतान की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जिसमें ई-कॉमर्स का कुल लेनदेन में 61 प्रतिशत से अधिक का योगदान है।
रिपोर्ट में बताया गया गया कि समीक्षा अवधि में एसबीआई ग्रुप का कार्ड बेस सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 2.19 करोड़ पर पहुंच गया है।
वहीं, दूसरी तरफ विदेशों बैंकों की ओर से जारी किए गए क्रेडिट कार्ड में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है, क्योंकि उनकी रणनीतियां प्रीमियम ग्राहकों पर केंद्रित हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विवेकाधीन खरीदारी में साल के अंत में हुई बढ़ोतरी के बाद समग्र वृद्धि में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं।
महीने-दर-महीने आधार पर, खर्च में 2.3 प्रतिशत की गिरावट आई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उच्च आधार प्रभाव के कारण वार्षिक वृद्धि दर जनवरी 2025 में दर्ज की गई 13.8 प्रतिशत की वृद्धि से कम रही।
रिपोर्ट में कहा गया है, कुल बकाया क्रेडिट कार्डों की संख्या जनवरी 2025 में 10.9 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2026 में 11.7 करोड़ हो गई, जो कि सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत की वृद्धि और पिछले महीने की तुलना में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
इस बीच, जनवरी 2026 में कुल बकाया क्रेडिट कार्ड बैलेंस 2.95 लाख करोड़ रुपए रहा।
निजी क्षेत्र के बैंकों ने 7.6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ कार्ड जारी करने में अग्रणी भूमिका निभाना जारी रखा, जिसे मजबूत वितरण नेटवर्क और ई-कॉमर्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म के साथ सह-ब्रांडेड साझेदारी का समर्थन प्राप्त हुआ।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में अब तक क्रेडिट कार्ड पर खर्च में लगभग 13 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है और यह 19.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
गधा पालने का करें बिजनेस, सरकार दे रही 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी; ऐसे करें अप्लाई
देश में आजकल कई लोग पारंपरिक नौकरी के बजाय अपना खुद का कारोबार शुरू करने की ओर बढ़ रहे हैं. नई तकनीक, इंटरनेट और सरकार की विभिन्न योजनाओं की वजह से छोटे स्तर पर भी बिजनेस शुरू करना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है. खेती और पशुपालन से जुड़े कई ऐसे विकल्प सामने आए हैं, जिनसे लोग अच्छी कमाई कर सकते हैं. इन्हीं में से एक है गधा पालन, जिसे अब एक नए और लाभदायक बिजनेस के रूप में देखा जा रहा है.
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत गधा पालन को बढ़ावा
भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन हमेशा से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. हालांकि समय के साथ मशीनों और आधुनिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण गधे, घोड़े और ऊंट जैसे पशुओं की संख्या में तेजी से गिरावट आई है. इस समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत एक खास योजना शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य इन पशुओं का संरक्षण करना और उनके व्यावसायिक पालन को बढ़ावा देना है.
50 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी सरकार
सरकार की ओर से इस योजना के तहत गधा पालन शुरू करने वालों को बड़ी आर्थिक सहायता दी जाती है. अगर कोई व्यक्ति, समूह या संस्था गधा पालन का प्रोजेक्ट शुरू करना चाहती है तो उसे परियोजना लागत का लगभग 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है. इस सब्सिडी की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तक रखी गई है. यानी अगर किसी प्रोजेक्ट की लागत लगभग 1 करोड़ रुपये है, तो उसका आधा हिस्सा सरकार की ओर से दिया जा सकता है.
भारत में गधों की संख्या
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में गधों की संख्या तेजी से घट रही है. वर्ष 2019 की पशुधन जनगणना के अनुसार देश में केवल लगभग 1.23 लाख गधे ही बचे हैं, जो 2012 की तुलना में करीब 60 प्रतिशत कम हैं. इसी गिरावट को रोकने और इन पशुओं के संरक्षण के साथ-साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार ने यह योजना शुरू की है.
किन लोगों को मिल सकता है योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ व्यक्तिगत किसान, स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO), संयुक्त दायित्व समूह और निजी कंपनियां भी ले सकती हैं. वहीं राज्य सरकारों को गधों के प्रजनन केंद्र या ब्रीडिंग फार्म स्थापित करने के लिए 10 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जा सकती है.
कैसे करें ऑनलाइन आवेदन?
योजना का लाभ लेने के लिए प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है. इच्छुक उद्यमी राष्ट्रीय पशुधन मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर https://nlm.udyamimitra.in/ जाकर आवेदन कर सकते हैं. प्रक्रिया के तहत पहले बैंक से लोन लेना होता है, जिसके बाद सरकार सब्सिडी की राशि जारी करती है.
गधा पालन शुरू करने के लिए जरूरी नियम
योजना के तहत कुछ नियम भी तय किए गए हैं. एक यूनिट स्थापित करने के लिए कम से कम 50 मादा और 5 नर गधों का होना जरूरी है. इसके अलावा यह योजना मुख्य रूप से देशी नस्ल के गधों के लिए लागू होती है. इस योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी दो किस्तों में दी जाती है. पहली किश्त बैंक से लोन स्वीकृत होने के बाद मिलती है, जबकि दूसरी किश्त प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद दी जाती है.
क्यों शुरू की गई ये योजना?
इस योजना के जरिए सरकार न केवल गधों की घटती संख्या को रोकना चाहती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करना चाहती है. अगर सही तरीके से योजना का लाभ उठाया जाए तो गधा पालन किसानों और युवाओं के लिए एक लाभदायक व्यवसाय साबित हो सकता है.
यह भी पढ़ें- PM Kisan Yojana Update: 22वीं किस्त को लेकर बड़ी खबर, इस दिन खाते में आ सकते हैं पैसे, जानें लेटेस्ट अपडेट
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation




















