केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को दोहराया कि सुरक्षा बल 31 मार्च, 2026 तक देश से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के अपने संकल्प को पूरा करेंगे। कटक में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 57वें स्थापना दिवस पर बोलते हुए अमित शाह ने नक्सलवाद के उन्मूलन में सीआईएसएफ की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सरकार 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित है और सीआईएसएफ ने इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चाहे ओडिशा हो, छत्तीसगढ़ हो या तेलंगाना, सीआईएसएफ ने नक्सलवाद के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शाह ने साफ तौर पर कहा कि मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि 31 मार्च, 2026 तक यह देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। हमारे सुरक्षा बल तिरुपति से पशुपति तक रेड कॉरिडोर बनाने और अपना वर्चस्व स्थापित करने का सपना देखने वालों को पूरी तरह से पराजित करेंगे। अमित शाह ने देश के लिए सीआईएसएफ कर्मियों के "वीरता और आत्मबलिदान" की सराहना करते हुए उनकी सेवा के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि 56 वर्षों में, सीआईएसएफ ने न केवल अपने मूल उद्देश्य को पूरा किया है, बल्कि हर तरह की चुनौतियों का सामना करते हुए खुद को रूपांतरित भी किया है। वीरता और बलिदान भारत के गौरवशाली इतिहास की पहचान हैं। इन गुणों को समर्पण के साथ जोड़ते हुए और आधुनिक हथियारों से लैस होकर, सीआईएसएफ ने हर तरह की चुनौतियों का सामना करने का साहस दिखाया है। मैं बल के सभी कर्मियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।
शाह ओडिशा के कटक जिले के मुंडाली स्थित खारवेला क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 57वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए थे। केंद्रीय गृह मंत्री का भुवनेश्वर हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने स्वागत किया, जब वे विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए राज्य पहुंचे थे। अमित शाह भुवनेश्वर में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) के परिसर में स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) का भूमि पूजन भी करेंगे। शाह भुवनेश्वर में 'नई न्याय संहिता' पर एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और एक मोबाइल फोरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाएंगे।
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पश्चिम एशिया में भड़की अमेरिका-इजराइल-ईरान जंग के सातवें दिन हालात और भयावह हो गए हैं। लगातार हो रहे हमलों और बंद होते हवाई रास्तों के बीच खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की बेचैनी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 12 हजार भारतीय नागरिकों ने अपने वतन लौटने के लिए भारत सरकार से मदद मांगी है और क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावासों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
हम आपको बता दें कि सबसे ज्यादा संकट संयुक्त अरब अमीरात में दिखाई दे रहा है। ईरान की तरफ से लगातार हो रहे हमलों के कारण वहां का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है और सामान्य उड़ान सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। इस कारण हजारों भारतीय यात्री वहां फंस गए हैं और उनके सामने घर वापसी का रास्ता लगभग बंद हो गया है।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इन फंसे हुए भारतीयों में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो थोड़े समय के लिए घूमने या किसी काम से संयुक्त अरब अमीरात गए थे। इनमें ऐसे यात्री भी शामिल हैं जो किसी अन्य देश जाने के लिए वहां रुके हुए थे। इसके अलावा कई छात्र भी इस संकट में फंस गए हैं क्योंकि ईरानी हमलों के बाद कई शिक्षण संस्थानों को बंद करना पड़ा है या पढ़ाई को ऑनलाइन माध्यम से चलाया जा रहा है।
यह भी बताया जा रहा है कि युद्ध शुरू होने के केवल दो दिन बाद ही करीब 22 हजार भारतीय नागरिकों ने भारत सरकार से संपर्क कर देश लौटने की इच्छा जताई थी। यह संख्या अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि खाड़ी क्षेत्र में बसे भारतीयों के सामने किस प्रकार की असुरक्षा और भय का माहौल पैदा हो गया है।
हालांकि पिछले तीन दिनों में कुछ अस्थायी और विशेष उड़ानों के जरिए करीब दस हजार भारतीयों को वापस लाया जा चुका है, लेकिन अभी भी हजारों लोग अलग अलग देशों में फंसे हुए हैं और उनके लिए सुरक्षित वापसी की व्यवस्था अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
रिपोर्टों में बताया गया है कि दोहा से भी करीब 850 भारतीय नागरिकों ने घर लौटने की मांग की थी। वहां का हवाई क्षेत्र पूरी तरह बंद होने के कारण उन्हें एक कठिन रास्ता अपनाना पड़ा। इन लोगों ने जमीन के रास्ते सऊदी अरब की सीमा पार की और फिर रियाद हवाई अड्डे से भारत के लिए उड़ान पकड़ी। यह पूरी प्रक्रिया बेहद कठिन और समय लेने वाली साबित हुई।
इसके अलावा दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे क्षेत्र के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों पर सामान्य उड़ान सेवाएं बंद रहने से हालात और उलझ गए हैं। कुछ उड़ानें संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह से संचालित की गई हैं, लेकिन उनकी संख्या बेहद सीमित है और उनसे सभी फंसे हुए यात्रियों को निकाल पाना लगभग असंभव नजर आ रहा है।
देखा जाये तो भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता संयुक्त अरब अमीरात ही बना हुआ है। इसका कारण वहां रहने वाले भारतीयों की विशाल संख्या है और साथ ही यह देश ईरान के हमलों की सीधी जद में भी रहा है। अनुमान के अनुसार केवल संयुक्त अरब अमीरात में ही तीस लाख से अधिक भारतीय नागरिक रह रहे हैं।
बताया जा रहा है कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई भारतीय अब जमीन के रास्ते देश छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग संयुक्त अरब अमीरात और ओमान की सीमा पर पहुंच रहे हैं ताकि ओमान के मस्कट हवाई अड्डे से भारत लौट सकें। लेकिन सीमा चौकियों पर भारी भीड़ और लंबी कतारों के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
इसी बीच, मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि ओमान में प्रवेश करने से पहले यात्रियों के पास वैध भ्रमण वीजा होना अनिवार्य है। बिना वीजा के सीमा पार करने की कोशिश करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हम आपको बता दें कि खाड़ी सहयोग परिषद के छह देशों- संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान और कुवैत में इस समय लगभग एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं। इस विशाल समुदाय की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार पर भारी दबाव बढ़ता जा रहा है।
दूसरी ओर, भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और कुशलता भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में हो रहे किसी भी नकारात्मक घटनाक्रम को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। बढ़ते संकट के बीच मोदी सरकार ने सहायता के लिए एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है ताकि फंसे हुए भारतीय नागरिकों को तुरंत मदद और जानकारी मिल सके। पिछले कुछ दिनों में विशेष उड़ानों के जरिए मुंबई, नई दिल्ली, अहमदाबाद और बेंगलुरु में यात्रियों को लाया गया है।
उधर, भारतीय दूतावास भी लगातार अपने नागरिकों से संपर्क बनाए हुए हैं और उन्हें सुरक्षा उपायों का पालन करने की सलाह दे रहे हैं। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास ने भी चेतावनी जारी कर कहा है कि संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले भारतीय पूरी सतर्कता बरतें और स्थानीय प्रशासन के दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।
बहरहाल, सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती जंग और हमलों के बीच हजारों भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए अब तक कोई व्यापक निकासी योजना घोषित नहीं की गई है। ऐसे में फंसे हुए भारतीयों की चिंता और गुस्सा दोनों लगातार बढ़ रहे हैं और वह अपने देश से जल्द और ठोस कदम की उम्मीद कर रहे हैं।
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