भाषा और पहनावे पर उड़ा मजाक, ऑडिशन में हुई बेइज्जती:सिद्धांत बोले, टाइम इंतजार से नहीं आता, मेहनत और धैर्य से खुद बनाना पड़ता है
हिंदी सिनेमा की दुनिया हर साल नए चेहरों से रोशन होती है, लेकिन चमकते सितारों की भीड़ में अपनी अलग पहचान बना पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। इस चमक-दमक के पीछे अनगिनत संघर्ष, असफलताएं और आत्मविश्वास की लंबी परीक्षा छिपी होती है। ऐसे ही संघर्षों से निकलकर सामने आए नामों में सिद्धांत चतुर्वेदी का नाम खास तौर पर लिया जाता है। बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड, बिना किसी बड़े गॉडफादर और बिना तैयार मंच के उन्होंने अपने दम पर वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना कई युवा कलाकार करते हैं। उनकी यात्रा आसान नहीं रही। ऑडिशन दर ऑडिशन रिजेक्शन झेलना, बार-बार यह सुनना कि वे हीरो जैसे नहीं दिखते और इंडस्ट्री में आउटसाइडर का टैग लग जाना, ये सब किसी भी नए कलाकार का आत्मविश्वास डिगा सकते थे। स्कूल के दिनों में उन्हें बुलिंग का सामना भी करना पड़ा, जिसने उनके व्यक्तित्व पर असर डाला, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। इसके बजाय, उन्होंने इन्हीं अनुभवों को अपनी ताकत में बदला। सिद्धांत की कहानी केवल एक अभिनेता के सफल होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जज्बे की कहानी है जो हर ठोकर के बाद इंसान को और मजबूत बनाता है। संघर्ष, धैर्य और खुद पर अटूट विश्वास के सहारे उन्होंने यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी आउटसाइडर अपनी जगह बना सकता है। आज की सक्सेस स्टोरी में आइए जानते हैं सिद्धांत चतुर्वेदी के करियर और निजी जीवन से जुड़ी कुछ और बातें.. साधारण घर में जन्म, बड़े सपने सिद्धांत चतुर्वेदी का जन्म 29 अप्रैल 1993 को उत्तर प्रदेश के बलिया में हुआ। बचपन में ही उनका परिवार मुंबई आ गया, जहां उनकी परवरिश हुई। उनके पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। घर में पढ़ाई-लिखाई को हमेशा प्राथमिकता दी जाती थी। अभिनय को करियर के रूप में चुनना परिवार के लिए शुरुआत में चौंकाने वाला था, लेकिन बेटे के जुनून को देखते हुए उन्होंने उनका साथ दिया। पढ़ाई और CA की तैयारी सिद्धांत ने अपनी स्कूली शिक्षा मुंबई से पूरी की। कॉलेज में उन्होंने बीकॉम में दाखिला लिया। इसके बाद पिता के पेशे से प्रेरित होकर उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की पढ़ाई शुरू की और इंटरमीडिएट स्तर तक पहुंचे। परिवार चाहता था कि वे एक सुरक्षित और स्थिर करियर चुनें। थिएटर और मंच से बढ़ता लगाव पढ़ाई के दौरान ही सिद्धांत का झुकाव थिएटर और मंच की ओर बढ़ने लगा। वे कॉलेज फेस्ट में परफॉर्म करते, स्टैंड-अप और स्पोकन वर्ड पोएट्री में हिस्सा लेते थे। मंच पर मिलने वाली सराहना ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और अभिनय के प्रति उनका जुनून मजबूत होता गया। ऑडिशन और शुरुआती संघर्ष मुंबई में ऑडिशन का दौर उनके लिए आसान नहीं था। कई बार उन्हें कहा गया कि वे टिपिकल बॉलीवुड हीरो जैसे नहीं दिखते। उनके घुंघराले बालों और हिंदी लहजे पर भी टिप्पणी की जाती थी। लेकिन इन सबके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अभिनय के सपने को आगे बढ़ाते रहे। स्कूल में भी उन्हें इसी वजह से चिढ़ाया गया था। लेकिन उन्होंने अपनी इसी पहचान को ताकत बना लिया। ब्रांड नहीं, काम से बनती है पहचान सिद्धांत चतुर्वेदी कहते हैं- जब मैंने अपना सफर शुरू किया था, तब बहुत कुछ समझ में नहीं आता था। क्या पहनना है, कहां जाना है, कौन-से ब्रांड के कपड़े या जूते पहनने से अच्छा माना जाएगा। मेरी पर्सनल स्टाइलिंग कभी भी ब्रांड-आधारित नहीं रही। स्कूल के दिनों में मुझे इस बात पर काफी चिढ़ाया गया कि मैं महंगी घड़ियां या जूते नहीं पहनता। लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत सही परवरिश दी। उन्होंने कहा, “इन चीजों से तुम्हारी पहचान नहीं बनेगी, तुम्हारा काम तुम्हारी पहचान बनेगा। जिस दिन तुम कुछ बन जाओगे, तुम खुद एक ब्रांड बन जाओगे।” वैलिडेशन की भीड़ में खुद को खोने का डर इंडस्ट्री में आने के बाद मैंने भी जैसा देश, वैसा भेष के चक्कर में बहुत कुछ आजमाया। लेकिन फिर महसूस हुआ कि मैं खुद को खो रहा हूं। बस भीड़ में घुलने की कोशिश कर रहा हूं, वैलिडेशन ढूंढ़ रहा हूं। पार्टियों में पहुंच तो गया, लेकिन सबसे बड़ा दुख यह था कि वहां टैलेंट की कदर नहीं होती। वहां अंक इस बात पर मिलते हैं कि आप क्या पहन रहे हैं, कहां से आए हैं और किस लहजे में बात कर रहे हैं। शुद्ध हिंदी बोलने पर लोग ऐसे देखते हैं, जैसे कुछ समझ ही नहीं पा रहे हों। स्टार फैक्टर से बड़ा है टैलेंट फिर मैंने खुद को वापस खींचा और कहा-मैं सिद्धांत चतुर्वेदी हूं, बलिया से हूं और वही रहूंगा। यह पूरी एक यात्रा रही है। एक बार एक बेहद प्रतिभाशाली युवा अभिनेता के बारे में चर्चा हो रही थी। एजेंसी ने कहा, “उसमें स्टार फैक्टर नहीं है।” जब पूछा गया क्यों, तो जवाब मिला, “अंग्रेजी और प्रेजेंटेशन की कमी है।” मैं सोच में पड़ गया-जिस देश की 60 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और जिनके हाथों पर हमारी अर्थव्यवस्था टिकी है, वहां आज भी हम वही सोच बेच रहे हैं, जिससे आजादी मिले दशकों हो चुके हैं? टैलेंट ही सबसे बड़ा फैक्टर होना चाहिए। और आज वही कलाकार शानदार काम कर रहा है। एड फिल्मों और छोटे प्रोजेक्ट्स से शुरुआत फिल्मों से पहले सिद्धांत ने कुछ विज्ञापन फिल्मों (एड फिल्म्स) में भी काम किया। यह उनके लिए कैमरे के सामने सहज होने की पहली सीढ़ी थी। उन्होंने कई छोटे ब्रांड्स और डिजिटल कैंपेन के लिए काम किया। इन अनुभवों ने उन्हें ऑडिशन की प्रक्रिया समझने और इंडस्ट्री के कामकाज से परिचित कराया। वेब सीरीज से पहला बड़ा मौका सिद्धांत को पहला बड़ा ब्रेक वेब सीरीज ‘इनसाइड एज’ से मिला। इस सीरीज में सिद्धांत चतुर्वेदी ने प्रशांत कनौजिया नामक एक नौसिखिया तेज गेंदबाज का रोल किया था। यह रोल छोटा, लेकिन लेकिन प्रभावशाली था। यहीं से इंडस्ट्री की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने खुद बताया था कि वे हर छोटे रोल को अपनी आखिरी उम्मीद की तरह निभाते थे। यह मंच उनके लिए अभिनय की प्रयोगशाला साबित हुआ। बॉलीवुड में पहला बड़ा ब्रेक, गली बॉय बनी टर्निंग पॉइंट सिद्धांत के करियर की टर्निंग पॉइंट बनी फिल्म ‘गली बॉय’। सिद्धांत इस फिल्म के लिए ऑडिशन देने पहुंचे थे और निर्देशक जोया अख्तर ने उनकी परफॉर्मेंस से प्रभावित होकर उन्हें एमसी शेर का रोल दिया। फिल्म में रणवीर सिंह और आलिया भट्ट मुख्य भूमिकाओं में थे,लेकिन सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद सिद्धांत ने गहरी छाप छोड़ी। उनका डायलॉग- “अपना टाइम आएगा नहीं, लाना पड़ता है।” युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इस किरदार की तैयारी के लिए सिद्धांत ने मुंबई के स्ट्रीट रैपर्स के साथ समय बिताया और रैप संस्कृति को करीब से समझा। ‘बंटी और बबली 2’ से मुख्यधारा में पहचान ‘गली बॉय’ की सफलता के बाद सिद्धांत को कई बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने लगे। उन्होंने ‘बंटी और बबली 2’ में सैफ अली खान और रानी मुखर्जी जैसे अनुभवी कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई, लेकिन सिद्धांत की मौजूदगी ने उन्हें मुख्यधारा के युवा स्टार के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। ‘गहराइयां’ में ग्रे शेड्स वाला किरदार फिल्म ‘गहराइयां’ में सिद्धांत ने दीपिका पादुकोण के साथ काम किया। रिलेशनशिप ड्रामा पर आधारित इस फिल्म में उनका किरदार ग्रे शेड्स लिए हुए था, जिसने उनके अभिनय के नए आयाम दर्शकों के सामने रखे। सिद्धांत का मानना है कि हर फिल्म के साथ खुद को तोड़कर फिर से गढ़ना ही एक अभिनेता की असली चुनौती और पहचान है। कॉमेडी से सोशल ड्रामा तक का सफर हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘फोन भूत’ में सिद्धांत ने कैटरीना कैफ के साथ काम किया और अपने कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद सिद्धांत का नाम धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म ‘धड़क 2’ से भी जुड़ा। यह फिल्म सामाजिक मुद्दों की पृष्ठभूमि पर आधारित है। हाल ही में सिद्धांत की फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ भी रिलीज हुई है, जिससे उनके करियर में एक और नया अध्याय जुड़ गया। ‘वी शांताराम’ बायोपिक में दिखेंगे सिद्धांत चतुर्वेदी जल्द ही मशहूर फिल्मकार ‘वी शांताराम' की बायोपिक में नजर आने वाले हैं। इस फिल्म में सिद्धांत वी. शांताराम के जीवन और उनके सिनेमा में योगदान को पर्दे पर उतारेंगे। फिल्म का निर्देशन अभिजीत शिरीष देशपांडे कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट में तमन्ना भाटिया भी अहम भूमिका में दिखाई देंगी। फिल्म का उद्देश्य भारतीय सिनेमा के एक महान फिल्मकार की यात्रा और उनके योगदान को दर्शकों तक पहुंचाना है। अभिषेक चौबे के साथ नए प्रोजेक्ट पर काम सिद्धांत निर्देशक अभिषेक चौबे की अगली फिल्म में भी नजर आएंगे। यह प्रोजेक्ट उनके होमटाउन बलिया की पृष्ठभूमि पर आधारित बताया जा रहा है। फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के छोटे शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक परतों को सामने लाएगी। फिलहाल इस फिल्म के टाइटल और बाकी कास्ट को लेकर आधिकारिक घोषणा होना बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि यह फिल्म सिद्धांत के करियर में एक अलग और दमदार किरदार लेकर आएगी। ______________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... स्ट्रगल, बॉडी शेमिंग-रिजेक्शन झेलकर बनीं स्टार:लोगों ने कहा- हीरोइन नहीं बन सकती, सुसाइड के ख्याल आए, मृणाल ठाकुर बोलीं, कमजोरियों को अपनी ताकत बनाया टीवी की दुनिया से बॉलीवुड तक अपनी दमदार एक्टिंग और काबिलियत के बल अपनी एक अलग पहचान बना चुकी एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर के लिए यह सफर आसान नहीं था। करियर के शुरुआती दौर में उन्हें डिमोटिवेटिंग और नकारात्मक अनुभवों का सामना करना पड़ा था। पूरी खबर पढ़ें..
भारत चौथी बार फाइनल में पहुंचने वाली पहली टीम:टूर्नामेंट में 88 सिक्स भी लगाए, संजू ने कोहली की बराबरी की; रिकार्ड्स
भारत ने इंग्लैंड को हराकर चौथी बार टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बना ली और ऐसा करने वाली पहली टीम बन गई। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 7 रन से मात दी। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में 88 छक्के भी पूरे कर लिए। टीम ने एक एडिशन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी बना दिया। वहीं संजू सैमसन ने 89 रन की पारी खेलते हुए टी-20 वर्ल्ड कप में किसी भारतीय द्वारा सबसे बड़ी पारी खेलने के मामले में विराट कोहली की बराबरी कर ली। पढ़िए IND Vs ENG मैच के टॉप रिकॉर्ड्स… 1. भारत चौथी बार फाइनल में पहुंचने वाली पहली टीम भारत चौथी बार टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंच गया है, जो किसी भी टीम द्वारा सबसे ज्यादा है। इससे पहले भारतीय टीम 2007, 2014 और 2024 में फाइनल खेल चुकी थी। 2026 में फाइनल में पहुंचकर भारत ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया और लगातार दो वर्ल्ड कप (2024 और 2026) के फाइनल में जगह बनाने वाली तीसरी टीम भी बन गया। इससे पहले पाकिस्तान (2007, 2009) और श्रीलंका (2012, 2014) ही यह उपलब्धि हासिल कर सके थे। 2. एक टी-20 वर्ल्ड कप मैच में सबसे ज्यादा सिक्स लगे भारत और इंग्लैंड ने मिलकर 34 छक्के लगाकर टी-20 वर्ल्ड कप के एक मैच में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने का रिकॉर्ड बना दिया। इस सूची में दूसरे नंबर पर वेस्टइंडीज- जिम्बाब्वे का मैच है। दोनों टीमों ने मिलकर 31 सिक्स लगाए थे। मुंबई में खेले गए सेमीफाइनल में भारत और इंग्लैंड के मैच में चौकों-छक्कों की भी बारिश हुई। मुकाबले में कुल 73 बाउंड्री (39 चौके और 34 छक्के) लगे, जो टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास में किसी एक मैच में सबसे ज्यादा हैं। इससे पहले इसी मैदान पर 2016 में इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका के मैच में 61 बाउंड्री लगी थीं। 3. भारत-इंग्लैंड मैच में 499 रन बने मुंबई में खेले गए भारत और इंग्लैंड के मुकाबले में दोनों टीमों ने मिलकर 499 रन बनाए, जो टी-20 इंटरनेशनल इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा मैच टोटल है। इस सूची में पहला स्थान 2023 में सेंचुरियन में खेले गए साउथ अफ्रीका-वेस्टइंडीज मैच (517 रन) का है। भारत-न्यूजीलैंड मैच (496 रन, 2026) तीसरे स्थान पर है। इसके बाद भारत-वेस्टइंडीज (489 रन, 2016) और न्यूजीलैंड-ऑस्ट्रेलिया (488 रन, 2018) के मैच आते हैं। 4. भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप में दूसरा सबसे बड़ा स्कोर बनाया भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप में अपना दूसरा सबसे बड़ा स्कोर बना लिया। टीम इंडिया का सबसे बड़ा स्कोर रिकॉर्ड 256 रन है, जो टीम ने इसी वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ सुपर-8 मैच में बनाया था। ओवरऑल टी-20 वर्ल्ड कप में यह चौथा सबसे बड़ा स्कोर रहा। श्रीलंका के नाम टी-20 वर्ल्ड कप में हाईएस्ट टोटल का रिकॉर्ड है, टीम ने केन्या के खिलाफ 2007 में 260 रन बनाए थे। 5. भारत एक टी-20 वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाली टीम टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत ने सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड बनाया। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में 88 सिक्स लगाए, जो किसी एक एडिशन में किसी भी टीम द्वारा सबसे ज्यादा हैं। इस सूची में दूसरे नंबर पर वेस्टइंडीज है, जिसने इसी साल 76 छक्के लगाए। तीसरे स्थान पर दक्षिण अफ्रीका (72 सिक्स) रही। इससे पहले 2024 में वेस्टइंडीज ने 62 और भारत ने 61 छक्के लगाए थे। 6. भारत ने एक इनिंग में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने की बराबरी की भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई में खेले गए मैच में एक पारी में 19 छक्के लगाकर टी-20 वर्ल्ड कप के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। इससे पहले 2014 में नीदरलैंड ने आयरलैंड के खिलाफ सिलीट में 19 सिक्स लगाए थे। 2026 में ही वेस्टइंडीज ने जिम्बाब्वे के खिलाफ मुंबई में 19 छक्के जड़े। इस लिस्ट में भारत का जिम्बाब्वे के खिलाफ चेन्नई में बनाया गया 17 सिक्स का प्रदर्शन भी शामिल है। 7. भारत ने छठी बार 250+ का स्कोर बनाया भारत टी-20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा 250 या उससे ज्यादा रन बनाने वाली टीम बन गई है। टीम ने अब तक 6 बार 250+ का स्कोर बनाया है। इस मामले में दूसरे नंबर पर आईपीएल फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) है, जिसने 5 बार यह आंकड़ा पार किया है। वेस्टइंडीज, जिम्बाब्वे और इंग्लिश काउंटी टीम सरे ने 3-3 बार 250+ का स्कोर बनाया है। 8. संजू ने भारत के लिए एक वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा सिक्स लगाए संजू सैमसन ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में 16 छक्के लगाकर एक एडिशन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज बनने का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने रोहित शर्मा के 2024 के रिकॉर्ड (15 सिक्स) को पीछे छोड़ा। 2026 में ही शिवम दुबे ने भी 15 सिक्स लगाए। वहीं ईशान किशन और हार्दिक पांड्या ने 14-14 छक्के जड़े। युवराज सिंह ने 2007 वर्ल्ड कप में 12 सिक्स लगाए थे। 9. संजू नॉकआउट में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय संजू सैमसन टी-20 वर्ल्ड कप नॉकआउट में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 89 रन बनाए। इस पारी के साथ उन्होंने विराट कोहली के 2016 सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज के खिलाफ बनाए गए नाबाद 89 रन की बराबरी की, लेकिन कोहली का स्कोर नाबाद था। इस सूची में विराट कोहली का दबदबा दिखता है। उन्होंने 2014 और 2024 के नॉकआउट मुकाबलों में भी बड़ी पारियां खेली थीं, जबकि 2007 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ गौतम गंभीर की 75 रन की पारी भी भारत की सबसे अहम नॉकआउट पारियों में शामिल है। 10. बेथेल का दूसरा सबसे तेज शतक इंग्लैंड के जैकब बेथेल ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में भारत के खिलाफ 45 गेंदों में शतक लगाकर इतिहास का दूसरा सबसे तेज वर्ल्ड कप शतक बनाया। इस सूची में पहला स्थान न्यूजीलैंड के फिन ऐलन के नाम है, जिन्होंने इसी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता में 33 गेंदों में सेंचुरी लगाई थी। तीसरे नंबर पर वेस्टइंडीज के क्रिस गेल हैं, जिन्होंने 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ 47 गेंदों में शतक लगाया था। गेल ने 2007 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 50 गेंदों में भी सेंचुरी बनाई थी। वहीं इंग्लैंड के हैरी ब्रूक ने 2026 में पाकिस्तान के खिलाफ पल्लेकले में 50 गेंदों में शतक जड़ा था। 11. बेथेल ने नॉकआउट में सबसे बड़ी पारी खेली इंग्लैंड के जैकब बेथेल ने भारत के खिलाफ मुंबई में 105 रन बनाकर टी-20 वर्ल्ड कप नॉकआउट इतिहास की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेली। इससे पहले न्यूजीलैंड के फिन एलन ने 2026 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता में 100* रन बनाए थे। तीसरे नंबर पर श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान हैं, जिन्होंने 2009 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 96* रन बनाए थे। भारत के विराट कोहली (89*, 2016) और संजू सैमसन (89, 2026) भी इस सूची में शामिल हैं। 12. वरुण नॉकआउट में सबसे महंगे गेंदबाज भारत के वरुण चक्रवर्ती टी-20 वर्ल्ड कप नॉकआउट इतिहास के सबसे महंगे गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई में 4 ओवर में 64 रन खर्च किए। इस सूची में दूसरे नंबर पर इंग्लैंड के जोफ्रा आर्चर हैं, जिन्होंने इसी मैच में भारत के खिलाफ 61 रन दिए। तीसरे स्थान पर ऑस्ट्रेलिया के मिशेल स्टार्क (60 रन, न्यूजीलैंड के खिलाफ, दुबई 2021) हैं। इसके बाद श्रीलंका के लसिथ मलिंगा (54 रन, वेस्टइंडीज के खिलाफ, 2012) और साउथ अफ्रीका के मार्को यान्सन (53 रन, न्यूजीलैंड के खिलाफ, 2026) का नाम आता है। इंग्लैंड के सैम करन ने भी 2026 में भारत के खिलाफ मुंबई में 53 रन दिए। 13. जैक्स के नंबर-6 या उससे नीचे एक टी-20 वर्ल्ड कप एडिशन में सबसे ज्यादा रन विल जैक्स नंबर-6 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए एक टी-20 वर्ल्ड कप एडिशन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने 2026 वर्ल्ड कप में 226 रन बनाए और 2007 में पाकिस्तान के मिस्बाह-उल-हक के 218 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के कैमरन व्हाइट (175 रन, 2010) और माइकल हसी (171 रन, 2010) भी शामिल हैं। वहीं इंग्लैंड के सैम करन ने 2026 में नंबर-6 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए 167 रन बनाए। विल जैक्स ने यह उपलब्धि 176.56 के शानदार स्ट्राइक रेट के साथ हासिल की।
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