ओमान और होर्मुज में समुद्री संकट, वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमले: रिपोर्ट
नई दिल्ली/लंदन, 5 मार्च (आईएएनएस)। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव की वजह से ओमान की खाड़ी, फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री खतरा बना हुआ है। पिछले 24-48 घंटों से माहौल बहुत ज्यादा अस्थिर हो गया है।
कई प्रोजेक्टाइल, मिसाइल और विस्फोटक हमलों में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया, जिससे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से जहाजों का गुजरना लगभग पूरी तरह रुक गया है।
फरवरी के अंत में जब अमेरिका और इजरायल ने ईरानी ठिकानों पर हमले किए, तब से ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी थी। इसके बाद कई व्यापारी जहाजों पर हमले की पुष्टि हुई है।
रिपोर्टों में कम से कम तीन से आठ वाणिज्यिक जहाज (जिनमें तेल टैंकर और एक कंटेनर जहाज शामिल हैं) के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। इन हमलों में ड्रोन बोट, मिसाइल और नजदीकी विस्फोट शामिल थे। इनमें कम से कम एक नाविक की मौत और कई अन्य घायल हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य जिसके माध्यम से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस परिवहन होता है। हाल के दिनों में यहां केवल कुछ ही जहाजों को देखा गया है, जो सामान्य स्तर से काफी कम है।
सैकड़ों जहाज, जिनमें तेल टैंकर और लिक्विफाइड नेचुरल गैस कैरियर शामिल हैं, अभी भी इलाके के पानी में फंसे हुए हैं या सुरक्षित जगहों पर जमा हैं। बड़े शिपिंग ऑपरेटर जैसे मार्सक और हैपैग-लॉयड ने होर्मुज मार्ग से गुजरना पूरी तरह रोक दिया है। कुछ जहाज अब केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजे जा रहे हैं, जिससे यात्रा का समय और लागत काफी बढ़ गई है।
इनेटिक खतरों को और बढ़ाते हुए, “लगातार जीपीएस और एआईएस जैमिंग” नेविगेशन सेफ्टी को बुरी तरह से खराब कर रहा है।
“लगातार जीपीएस और एआईएस जैमिंग” स्थिति को और जटिल बना रही हैं। समुद्री खुफिया कंपनियों ने हाल के दिनों में 1,100 से अधिक जहाजों में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप दर्ज किया है, जिससे कई जहाजों की नकली लोकेशन दिखाई दे रही है।
कई युद्ध जोखिम बीमा प्रदाताओं ने ईरानी जलक्षेत्र, फारस की खाड़ी और आसपास के क्षेत्र में अपनी कवरेज रद्द कर दी है, जिससे जहाज मालिकों के लिए वैकल्पिक उपाय महंगे और कठिन हो गए हैं।
जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (जेएमआईसी) ने इलाके के खतरे का लेवल बढ़ाकर क्रिटिकल कर दिया है, जिससे पता चलता है कि हमले लगभग पक्के हैं।
यूएस एमएआरएडी एडवाइजरी में जहाजों से कहा गया है कि अगर हो सके तो इस इलाके से बचें, नेवल एसेट्स से 30-नॉटिकल-मील की दूरी बनाए रखें, और बेहतर उपाय लागू करें। मर्चेंट जहाजों को सलाह दी जाती है कि वे ज़्यादा चौकसी बरतें, ज़्यादा निगरानी रखें, सभी नेविगेशन इनपुट (रडार और विज़ुअल बेयरिंग सहित) को क्रॉस-वेरिफाई करें, और इस इलाके में ट्रांज़िट या ऑपरेट करते समय “बेस्ट मैनेजमेंट प्रैक्टिस (बीएमP5 या एमएस)” सिक्योरिटी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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LPG ही नहीं मिडिल ईस्ट युद्ध का CNG और PNG पर भी पड़ सकता है असर, आगे क्या?
LPG Stock Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है. हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र की स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है. इस संघर्ष में भारत सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन इसके असर से भारत भी अछूता नहीं रह सकता. खासतौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की रसोई पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
क्या कहती हैं रिपोर्ट्स
रिपोर्ट्स के अनुसार अगर फारस की खाड़ी में जारी तनाव जल्दी खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में भारत में रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इससे देश के करोड़ों परिवारों को गैस की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही गैस की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई और ज्यादा बढ़ने की आशंका है.
तो इसलिए रुक सकती है सप्लाई
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फारस की खाड़ी में चल रहे तनाव की वजह से गैस से भरे कई जहाज होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फंस गए हैं. यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है. अगर यहां से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो कई देशों की ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ सकता है. भारत भी उन्हीं देशों में शामिल है जो इस रास्ते से आने वाली सप्लाई पर काफी हद तक निर्भर है.
भारत दुनिया का दूसरा LPG आयतक देश
डेटा इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के अनुसार भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है. भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत एलपीजी मिडिल ईस्ट के देशों से खरीदता है. ऐसे में अगर इस क्षेत्र से सप्लाई रुकती है या धीमी पड़ती है तो भारत में गैस की कमी हो सकती है. हालांकि, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका से भी एलपीजी खरीदने के लिए लंबी अवधि का समझौता किया है. लेकिन वहां से आने वाली गैस की मात्रा फिलहाल काफी कम है.
इसके अलावा अमेरिका से गैस लाने की लागत भी ज्यादा होती है क्योंकि दूरी अधिक है और समुद्री ढुलाई महंगी पड़ती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अभी अमेरिका से अतिरिक्त गैस खरीदी भी जाए तो वह अप्रैल से पहले भारत नहीं पहुंच पाएगी.
विकल्प भी हैं सीमित
एक्सपर्ट्स की मानें तो भारत के पास एलपीजी के वैकल्पिक सप्लायर ढूंढने के विकल्प बहुत सीमित हैं. कुछ अतिरिक्त सप्लाई अमेरिका, रूस या अर्जेंटीना से मिल सकती है, लेकिन इसकी मात्रा ज्यादा नहीं होगी. साथ ही यह पूरी तरह वैश्विक कीमतों और जहाजों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी.
केवल 30 दिन का बचा है स्टॉक
एक सरकारी अधिकारी के अनुसार फिलहाल भारत के पास करीब एक महीने यानी लगभग 30 दिनों का एलपीजी स्टॉक मौजूद है. अगर पश्चिम एशिया में तनाव ज्यादा समय तक बना रहता है तो सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है. इस स्थिति को देखते हुए भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने सरकार के साथ बैठक भी की है और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए आपातकालीन योजना पर चर्चा की गई है.
CNG-PNG पर भी पड़ सकता है असर
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत अपनी करीब दो-तिहाई एलएनजी और लगभग आधा कच्चा तेल भी इसी क्षेत्र से आयात करता है. ऐसे में अगर हालात बिगड़ते हैं तो केवल एलपीजी ही नहीं बल्कि सीएनजी और पीएनजी की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है. हालांकि भारत सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है.
सरकार का क्या प्लान
सरकार के अनुसार देश में एलपीजी और एलएनजी का भंडार संतोषजनक है और सप्लाई लगातार जारी है. अधिकारियों का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की स्थिति मजबूत है और जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों से भी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी. सरकार का कहना है कि रोजाना स्टॉक की भरपाई की जा रही है और आम लोगों या उद्योगों पर इसका असर नहीं पड़ने दिया जाएगा. इसलिए फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
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