पंचकूला की मासूम ने जीती जिंदगी की जंग, मां की गोद में पहुंचते ही खाई खिचड़ी
पंचकूला के एक निजी स्कूल में बेरहमी की शिकार हुई नन्ही बच्ची के परिवार और उसके लिए दुआ कर रहे लाखों लोगों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अस्पताल के बिस्तर पर कई दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ती रही यह मासूम अब धीरे-धीरे सामान्य जिंदगी की तरफ कदम बढ़ा रही है. चंडीगढ़ के पीजीआई में भर्ती इस बच्ची ने पहली बार अपनी मां की गोद में बैठकर अपने मुंह से खाना खाया. जब बच्ची ने खिचड़ी का पहला निवाला लिया, तो वहां मौजूद माता पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. पूरे देश में जिस बच्ची के ठीक होने की प्रार्थनाएं की जा रही थीं, उसकी यह नई शुरुआत हर किसी के चेहरे पर सुकून लेकर आई है.
मां की गोद में लौटी मुस्कान और सुकून
बीते कई दिनों से अस्पताल के आईसीयू और वार्ड के चक्कर काट रहे परिवार के लिए यह दिन किसी वरदान से कम नहीं था. बच्ची जब से घायल हुई थी, तब से उसने ठीक से कुछ खाया पिया नहीं था. नली और मशीनों के सहारे उसकी सांसें चल रही थीं. ऐसे कठिन समय में जब डॉक्टरों ने बच्ची को पूरी तरह खतरे से बाहर बताया और उसने अपनी मां की गोद में बैठकर सहारा लिया, तो लगा जैसे घर की खुशियां लौट आई हों. डॉक्टरों की निगरानी में बच्ची को थोड़ी सी खिचड़ी खिलाई गई, जिसे उसने आराम से खा लिया. इस छोटे से कदम ने डॉक्टरों के साथ साथ परिवार को भी बड़ा भरोसा दिया है कि वह बहुत जल्द पूरी तरह ठीक होकर अपने पैरों पर चलने लगेगी.
माता-पिता ने जताया देशवासियों का आभार
इस बेहद भावुक पल का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बच्ची अपनी मां की बाहों में लिपटी नजर आ रही है. चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लिए यह नन्ही बच्ची अब पहले से काफी बेहतर दिख रही है. माता पिता ने इस मौके पर एक संदेश जारी करते हुए उन सभी लोगों का दिल से धन्यवाद किया है, जिन्होंने सोशल मीडिया और मंदिरों, गुरुद्वारों में उनके बच्चे के लिए प्रार्थनाएं की थीं. पिता ने कहा कि लोगों के प्यार, दुआओं और डॉक्टरों की कड़ी मेहनत की बदौलत ही उनकी बेटी इस भयानक दर्द से बाहर निकल पाई है. मुश्किल घड़ी में जब पूरा देश उनके साथ खड़ा दिखा, तो उन्हें इस गम से लड़ने की भारी हिम्मत मिली.
क्या हुआ था उस दिन स्कूल में
यह दिल दहला देने वाला मामला पंचकूला के एक जाने माने स्कूल से जुड़ा है. केजी कक्षा में पढ़ने वाली इस छोटी सी मासूम पर तीसरी कक्षा के एक छात्र ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया था. मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल परिसर में छात्र ने पहले बच्ची पर भारी पत्थरों से वार किया. इतने से भी जब मन नहीं भरा, तो पास में रखा एक भारी गमला उठाकर बच्ची के ऊपर पटक दिया. हमले की वजह से बच्ची लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ी और बेहोश हो गई. आरोप है कि बच्ची के अचेत होने के बाद भी छात्र रुका नहीं और उसे काफी दूर तक जमीन पर घसीटता रहा. जब स्कूल के कर्मचारियों की नजर उस पर पड़ी, तब जाकर बच्ची को किसी तरह बचाया जा सका.
अस्पताल से पीजीआई तक का कठिन सफर
घटना के तुरंत बाद बच्ची को पास के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उसके सिर और चेहरे पर लगी गंभीर चोटों को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया था. वहां पहुंचते ही बच्ची को आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की एक पूरी टीम उसके इलाज में जुट गई. बच्ची की नाजुक हालत देखकर हर कोई सहम गया था. कई दिनों तक वह डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रही. अब जब बच्ची ने खुद से आहार लेना शुरू कर दिया है, तो डॉक्टर भी उसकी रिकवरी की रफ्तार से काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं.
सुरक्षा को लेकर खड़े हुए कई सवाल
इस दर्दनाक घटना ने स्कूलों के अंदर बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है. अभिभावकों का कहना है कि इतने छोटे बच्चों के बीच इस तरह की हिंसक घटना का होना स्कूल प्रबंधन की भारी लापरवाही को दिखाता है. परिसर में सुरक्षा गार्ड और शिक्षक कहां थे, जब यह सब कुछ हो रहा था. फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है. वहीं दूसरी तरफ, बच्ची के घर वापसी की राह देख रहे रिश्तेदार और आम लोग बस यही मना रहे हैं कि वह जल्द से जल्द अस्पताल से छुट्टी पाकर अपने घर लौटे और दोबारा खिलखिलाती हुई नजर आए.
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