अमेरिका-ईरान तनाव पर ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठा, ‘AAP’ ने सरकार से मांगी स्पष्ट जानकारी
Punjab News: आम आदमी पार्टी ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता जताई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में देश की तेल आपूर्ति और ऊर्जा नीति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए, ताकि लोगों के मन में किसी तरह की आशंका न रहे.
सुरक्षा के लिए रणीनीति बताए सरकार- मनीष सिसोदिया
मनीष सिसोदिया ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी तरह का युद्ध या तनाव सीधे तौर पर तेल की कीमतों और सप्लाई को प्रभावित कर सकता है. उन्होंने कहा कि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक ट्रेड डील हुई थी, जिसके बाद ऊर्जा आयात को लेकर कई चर्चाएं सामने आईं. ऐसे में अब जब अमेरिका और ईरान के बीच हालात तनावपूर्ण हैं, तो देश के नागरिक यह जानना चाहते हैं कि सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्या रणनीति तैयार की है.
समय रहते वैकल्पिक स्त्रोतों पर स्पष्टता जरूरी
पंजाब प्रभारी ने आगे कहा कि ऊर्जा सुरक्षा केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा विषय है. पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है. अगर वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो उसका असर भारत जैसे बड़े आयातक देश पर भी पड़ सकता है. इसलिए जरूरी है कि सरकार समय रहते वैकल्पिक स्रोतों और दीर्घकालिक रणनीति पर स्पष्टता दे.
अपने नागरिकों के हित होनी चाहिए प्राथमिकता
सिसोदिया ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलन और कूटनीतिक समझदारी पर आधारित रही है. ऐसे में मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार को देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बीच भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों के हित और आर्थिक स्थिरता होनी चाहिए.
भ्रम की स्थति पैदा न होने दें
पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि हाल के दिनों में कुछ अंतरराष्ट्रीय सैन्य गतिविधियों और घटनाओं की खबरें सामने आई हैं, जिनका असर क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है. ऐसे में भारत सरकार की ओर से आधिकारिक बयान और स्थिति की जानकारी सामने आना जरूरी है, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने.
तेल की कीमतों पर भारत की क्या है तैयारी
मनीष सिसोदिया ने कहा कि भारत एक बड़ा और जिम्मेदार देश है. दुनिया में उसकी अलग पहचान है. इसलिए वैश्विक तनाव के समय भारत की भूमिका और उसकी तैयारियों को लेकर स्पष्टता रहना जरूरी है. उन्होंने कहा कि देश की जनता जानना चाहती है कि मौजूदा हालात में तेल की आपूर्ति, कीमतों और कूटनीतिक स्तर पर भारत की रणनीति क्या है.
तेल बाजार को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे
AAP नेता ने बताया कि इतिहास में वैश्विक संघर्षों का असर अक्सर तेल बाजार पर देखा गया है. ऐसे में सरकार को यह बताना चाहिए कि अगर हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण रहते हैं, तो देश में आपूर्ति और कीमतों को स्थिर रखने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे.
AAP ने किया केंद्र से ये आग्रह
आम आदमी पार्टी ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि देश की ऊर्जा जरूरतें सुरक्षित रहें और आम लोगों पर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ न पड़े. पार्टी ने सरकार से आग्रह किया कि वह ऊर्जा नीति और अंतरराष्ट्रीय हालात पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करे, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे.
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नेपाल: 1991 के बाद संसदीय चुनावों में सबसे कम वोटिंग की उम्मीद
काठमांडू, 5 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल में गुरुवार को मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। सबको इंतजार अब नतीजों का है, लेकिन इससे पहले मतदाता टर्नआउट लोगों की उदासीनता का परिचय दे रहा है। जेन जी आंदोलन के बाद पहली बार हो रहे चुनाव को लेकर उम्मीदें खूब थीं।
कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भंडारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश भर से मिली शुरुआती जानकारी के आधार पर, वोटर टर्नआउट लगभग 60 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
अगर अंतिम डेटा आने के बाद भी वोटिंग नहीं बढ़ती है, तो यह 1991 में हुए आम चुनावों के बाद सबसे कम वोटर टर्नआउट होगा। 2022 के चुनावों में, वोटरों का टर्नआउट 61.41 परसेंट था।
उन्होंने आगे कहा, विस्तृत डेटा अभी भी इकट्ठा किया जा रहा है। संबंधित चुनाव क्षेत्रों से जानकारी मिली है कि कुछ पोलिंग सेंटरों में वोटिंग अभी भी जारी है क्योंकि जो वोटर तय समय के अंदर पोलिंग स्टेशन में घुस गए थे, वे वोट डाल रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि रुकावट की कुछ अलग-अलग घटनाओं को छोड़कर, चुनावों पर नजर रखने के लिए तैनात नेशनल और इंटरनेशनल इलेक्शन ऑब्जर्वर की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव शांति से संपन्न हुआ।
उन्होंने कहा, वोटिंग प्रक्रिया पूरा होने के साथ, बैलेट बॉक्स सुरक्षित रूप से जमा होने के तुरंत बाद वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि 15 जिलों के दूर-दराज के इलाकों से बैलेट बॉक्स हेलीकॉप्टर से लाए जाएंगे।
आयोग के मुताबिक, देश में 18.9 मिलियन पंजीकृत वोटर हैं। कुछ पोलिंग स्टेशनों पर तो लोगों ने सरकार से नाराजगी के चलते चुनावों का बॉयकॉट भी किया।
भंडारी ने कहा, यह चुनाव आयोग से नाराजगी नहीं है, बल्कि सरकार से है, और सरकार को इस पर गौर करना चाहिए।
पिछले साल सितंबर में जेन-जी आंदोलन के बाद पैदा हुए नए पॉलिटिकल हालात की वजह से हिमालयी देश में नए चुनाव तय समय से लगभग दो साल पहले हुए, जिससे पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की सरकार गिर गई थी।
सरकार के हेड के तौर पर उनकी नियुक्ति के बाद, जेन-जी नेताओं की मांग पर प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया गया था, और उन्हें छह महीने के अंदर नए चुनाव कराने का आदेश दिया गया था।
नेपाल के निर्वाचन आयोग के मुताबिक, कुल वोटरों में से दो-तिहाई से ज्यादा नए रजिस्टर्ड वोटर जेन-जी एज ग्रुप के हैं, जो 2026 के चुनावों से पहले युवाओं की भागीदारी में बढ़ोतरी दर्शाता है।
फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (एफपीटीपी) सिस्टम के तहत कुल 3,406 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि 3,135 उम्मीदवार अनुपातिक प्रतिनिधत्व प्रणाली के तहत चुनाव लड़ रहे हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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