Holi 2026 Health Tips: होली पर ज्यादा गुजिया और मिठाइयों से बिगड़ गया है पेट? अपनाएं ये 5 देसी नुस्खे, तुरंत मिलेगा आराम
Holi 2026 Health Tips: होली रंगों, मिठाइयों और खुशियों का त्योहार है. इस दिन हर घर में गुजिया, नमकीन और तरह-तरह के पकवान बनते हैं. लोग परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर इन स्वादिष्ट चीजों का भरपूर आनंद लेते हैं. लेकिन कई बार मिठाइयों और तले हुए पकवानों का ज्यादा सेवन पेट के लिए परेशानी बन जाता है. ज्यादा घी, चीनी और मसालेदार भोजन की वजह से पेट भारी हो जाता है.
कई लोगों को गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्या भी होने लगती है. अगर होली के बाद आपका पेट भी ठीक महसूस नहीं कर रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. किचन में मौजूद कुछ आसान चीजें आपकी मदद कर सकती हैं. इन घरेलू उपायों से डाइजेशन बेहतर होता है और पेट को जल्दी राहत मिलती है.
अपनाएं ये 5 घरेलू नुस्खें
गुनगुना पानी पीना शुरू करें
जब हम ज्यादा तला-भुना या मीठा खाते हैं, तो पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. ऐसे में ठंडा पानी पीने से समस्या और बढ़ सकती है. इस स्थिति में गुनगुना पानी पीना ज्यादा फायदेमंद होता है. हर एक घंटे में थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी पिएं. यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है. गुनगुना पानी शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है. इससे पेट का भारीपन धीरे-धीरे कम होने लगता है.
अजवाइन और काला नमक का इस्तेमाल
पेट की समस्या में अजवाइन बेहद असरदार मानी जाती है. इसमें मौजूद तत्व पाचन रस को सक्रिय करने में मदद करते हैं.इसके लिए आधा चम्मच अजवाइन लें और उसमें एक चुटकी काला नमक मिला लें. अब इसे गुनगुने पानी के साथ खा लें. यह नुस्खा गैस और अपच की समस्या में काफी राहत देता है. कई लोगों को कुछ ही समय में आराम महसूस होने लगता है.
अदरक का पानी या हर्बल टी
अगर पेट में भारीपन या एसिडिटी हो रही है, तो दूध वाली चाय से बचना बेहतर है. इसकी जगह अदरक का पानी या हर्बल टी पी सकते हैं. एक कप पानी में थोड़ा कुटा हुआ अदरक डालकर उबाल लें. इसके बाद इसमें थोड़ा नींबू और शहद मिला लें. अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. यह पेट की सूजन को कम करने में मदद करता है और पाचन को भी बेहतर बनाता है.
छाछ पीना फायदेमंद
छाछ पेट के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है. इसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं जो पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं. अगर होली के बाद पेट में जलन या भारीपन महसूस हो रहा है, तो एक गिलास छाछ पी सकते हैं. छाछ में भुना हुआ जीरा पाउडर और थोड़ा काला नमक मिलाकर पीना और भी लाभकारी होता है. इससे पाचन तंत्र को काफी राहत मिलती है.
थोड़ा टहलना जरूरी
त्योहार के दिन लोग अक्सर ज्यादा खाने के बाद आराम करने लगते हैं. लेकिन खाना खाने के तुरंत बाद सोना पाचन के लिए सही नहीं है. भारी भोजन के बाद हल्की वॉक करना फायदेमंद होता है. घर के अंदर ही 15 से 20 मिनट टहलना काफी है. आप चाहें तो वज्रासन भी कर सकते हैं. इससे पाचन तंत्र कंट्रोल में रहता है और गैस या भारीपन की समस्या कम हो सकती है.
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मिडिल ईस्ट तनाव के बीच कच्चा तेल 83 डॉलर प्रति बैरल के पार, सप्लाई पर बढ़ी चिंता
नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। सप्लाई पर असर पड़ने के कारण कीमतों में उछाल आया है, क्योंकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को बंद कर दिया है।
सुबह के शुरुआती कारोबार में इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.43 प्रतिशत बढ़कर 83.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
वहीं न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (एनवाईमेक्स) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.63 प्रतिशत बढ़कर 76.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कंटेनर जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा है।
तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत के आयात बिल पर असर डाल सकती है। यदि कच्चे तेल की कीमत पूरे साल के लिए प्रति बैरल 1 डॉलर बढ़ती है, तो भारत का आयात बिल लगभग 16,000 करोड़ रुपए तक बढ़ सकता है।
इस बीच, सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी को लेकर भारत फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में है। देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है, जिसमें वह तेल भी शामिल है जो जहाजों के जरिए भारत के बंदरगाहों की ओर आ रहा है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिसमें से करीब 50 प्रतिशत तेल मिडिल ईस्ट के देशों से आता है, जो मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है। ईरान युद्ध के बाद इस मार्ग से सप्लाई प्रभावित हुई है।
हालांकि, भारत ने अफ्रीका, रूस और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाकर अपने स्रोतों में विविधता लाई है और रणनीतिक भंडार बनाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से भी तेल आयात बढ़ाया है, जिसके चलते अब बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते नहीं आती।
भारत ने 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में कच्चे तेल के आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। वहीं चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों (अप्रैल 2025 से जनवरी 2026) के दौरान 206.3 मिलियन टन कच्चे तेल के आयात पर 100.4 अरब डॉलर खर्च किए गए।
--आईएएनएस
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