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मार्को रुबियो ने ईरान संकट को लेकर यूरोपीय और खाड़ी के सहयोगियों को किया एकजुट

वॉशिंगटन, 5 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में इस वक्त भीषण तनाव का माहौल है। अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान की जंग छठे दिन भी जारी है। इस बीच अमेरिका ने ईरान समेत पूरे मिडिल ईस्ट में कूटनीतिक बातचीत तेज कर दी है। अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने इटली, साइप्रस, तुर्किए और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से बात की।

यह बातचीत ईरान से तनाव से उभरे हालातों पर केंद्रित थी। रुबियो ने सबसे पहले इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी से बात की। दोनों ने ईरान और पूरे मिडिल ईस्ट की घटनाओं पर चर्चा की। उन्होंने अमेरिका और इटली के बीच मजबूत साझेदारी की भी पुष्टि की।

इसके अलावा, रुबियो ने साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस से बात की। नेताओं ने ईरान और बड़े मिडिल ईस्ट में डेवलपमेंट पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने वॉशिंगटन और निकोसिया के बीच मजबूत साझेदारी की पुष्टि की।

अमेरिकी विदेश सचिव ने तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान से भी बातचीत की, जो ईरान और बड़े इलाके से जुड़े डेवलपमेंट पर केंद्रित थी। रुबियो ने फिदान से कहा कि तुर्किए के संप्रभु इलाके पर हमले मंजूर नहीं हैं। उन्होंने अमेरिका की तरफ से पूरा समर्थन देने का वादा किया।

रुबियो ने सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद से बात की। उन्होंने रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमले को लेकर सऊदी प्रिंस के साम्राज्य की तरफ से मिले जवाब के लिए सऊदी के नेतृत्व को धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने ईरानी सरकार से क्षेत्रीय स्थिरता और मिडिल ईस्ट में दूसरे डेवलपमेंट के लिए पैदा होने वाले खतरों पर भी चर्चा की।

यह बातचीत अमेरिका की कोशिश को दिखाती है कि वह यूरोपीय और मिडिल ईस्ट दोनों साझेदारों के साथ मिलकर काम करने की कोशिश कर रहा है। ईरान को लेकर तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर डाल रहा है।

इटली और साइप्रस, भूमध्यसागर क्षेत्र में अमेरिकी कूटनीति के महत्वपूर्ण यूरोपीय साझेदार हैं। नाटो का सदस्य तुर्किए यूरोप और मध्य पूर्व के बीच एक रणनीतिक भूमिका निभाता है। वहीं सऊदी अरब क्षेत्रीय कूटनीति और ऊर्जा बाजारों में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है।

मिडिल ईस्ट में हो रहे घटनाक्रम के साथ अमेरिका अपने साथियों के साथ डिप्लोमैटिक अलाइनमेंट बनाने पर लगातार फोकस कर रहा है।

--आईएएनएस

केके/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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यूरोप में चीन की दबाव बनाने की रणनीति से अमेरिका चिंतित

वॉशिंगटन, 5 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी सांसदों, विदेशी नेताओं और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि चीन यूरोप में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन निवेश, दबाव और गुप्त रणनीति का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने प्रौद्योगिकी, आपूर्ति शृंखलाओं और सुरक्षा के क्षेत्र में अमेरिका व यूरोप के बीच घनिष्ठ समन्वय का आग्रह किया।

“यूरोप में चीन की बढ़ती घुसपैठ” पर कांग्रेस के सदस्य जेक एल्ज़ी ने कहा कि यूरोप को सिर्फ रूस पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए। क्षेत्र को रूस के युद्ध के खतरे के साथ-साथ चीन की वर्चस्व हासिल करने की कोशिश से पैदा होने वाले लगातार खतरे का भी सामना करना पड़ रहा है।

एल्ज़ी ने कहा कि चीन यूरोप में खुले और गुप्त दोनों तरह के कई औजारों का इस्तेमाल कर रहा है। चीन महाद्वीप को प्रभावित करने के लिए “अपनी पकड़ मजबूत करने के ठिकाने” बना रहा है।

लिथुआनिया के उप विदेश मंत्री विदमांतस वर्बिकास ने अपने देश पर चीन के दबाव बनाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2021 में लिथुआनिया ने चीन के 17 प्लस वन फॉर्मेट से खुद को अलग कर लिया था। साथ ही, विलनियस में ताइवान के प्रतिनिधि कार्यालय की स्थापना की अनुमति भी दी गई थी।

उन्होंने कहा कि इसके जवाब में चीन ने दबाव बनाना शुरू किया। वर्बिकास ने कहा, “लिथुआनिया जैसे चीन की कस्टम प्रणाली से गायब हो गया।” उन्होंने बताया कि निर्यात परमिट में देरी की गई या उन्हें खारिज कर दिया गया और बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर भी दबाव बढ़ाया गया। इसका असर पड़ा। शुरुआती महीनों में चीन को जाने वाला लिथुआनिया का निर्यात 99.7 प्रतिशत घटकर लगभग शून्य हो गया।

वर्बिकास ने कहा कि यह कोई व्यापारिक विवाद नहीं था। यह एक राजनीतिक रूप से प्रेरित दबाव था, जिसका मकसद किसी संप्रभु देश के नीति निर्णय को बदलने के लिए मजबूर करना था।

सीनेटर रूबेन गैलेगो ने तकनीक से जुड़े जोखिमों को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि 5 जी तकनीक के मामले में पश्चिम धीमी प्रतिक्रिया दे रहा था। उन्होंने कहा कि यूरोप के कई बुनियादी ढांचे अब भी चीनी कंपनियों पर निर्भर हैं ।अगला जोखिम 6 जी तकनीक में दिख सकता है।

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट की नॉनरेजिडेंट फेलो ऑड्री वोंग ने कहा कि चीन का उद्देश्य चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थकों को मजबूत करना और आलोचकों को चुप कराना है। उन्होंने कहा कि बीजिंग “फूट डालो और राज करो” की रणनीति के जरिए ट्रांसअटलांटिक सहयोग और यूरोपीय एकता को कमजोर करने की कोशिश करता है।

वोंग ने कहा कि चीन “दबाव और प्रलोभन” का इस्तेमाल करता है। उन्होंने सप्लाई चेन को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का जिक्र किया। उनके अनुसार चीन “भ्रष्ट निवेश, रिश्वतखोरी और अन्य गुप्त प्रभावी तरीकों से समर्थन खरीदने” की भी कोशिश करता है। चीन कूटनीति, सरकार, व्यापार व सार्वजनिक क्षेत्रों सहित कई मंचों पर सक्रिय है और आर्थिक प्रभाव, सूचना अभियानों व प्रचार का मिश्रण इस्तेमाल करता है।

वोंग के मुताबिक यह प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को कमजोर कर सकता है। चीन कई तरह के प्रभावी प्रयास करता है और फिर सही समय का इंतजार करता है। यह “सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि खुली और स्वतंत्र समाज व्यवस्था के कामकाज को भी प्रभावित करता है।”

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट की नॉनरेजिडेंट सीनियर फेलो वाल्बोना ज़ेनेली ने कहा कि यूरोप ने चीन को लेकर अपना रुख बदला है लेकिन यूरोपीय संघ अब भी पूरी तरह एकजुट नहीं है। यूरोप की चीन नीति ईयू संस्थाओं और 27 सदस्य देशों के बीच जटिल बातचीत का परिणाम है।

ज़ेनेली ने कहा कि यूरोप में चीन की सक्रियता रणनीतिक है। इसका उद्देश्य “उन्नत तकनीक हासिल करना, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को प्रभावित करना और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दबदबा बनाना” है। यह सिर्फ व्यापारिक लाभ का मामला नहीं है बल्कि रणनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश है।

व्यापार संतुलन भी बदल गया है। चीन अब यूरोपीय संघ के आयात का पांचवें हिस्से से अधिक हिस्सा सप्लाई करता है। यूरोप को “400 अरब डॉलर से अधिक के व्यापार घाटे” का सामना करना पड़ रहा है और चीनी आपूर्ति पर निर्भरता रणनीतिक जोखिम पैदा करती है।

--आईएएनएस

एलकेजे/पीयूष

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