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गर्मियों में दही का सेवन कितना सही? जानें आयुर्वेद में लिखे सेवन के सही तरीके

नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। गर्मियों के मौसम के साथ ही आहार में ठंडे और तरल पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है और इसके लिए सबसे अच्छा विकल्प है दही।

दही का इस्तेमाल कई तरीकों से गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए किया जाता है लेकिन क्या किसी भी समय दही का सेवन करना सही है। आयुर्वेद में दही को जहां अमृता माना गया है, वहीं उसके सेवन के सही नियम और मात्रा भी बताई गई है।

आयुर्वेद में दही को बलवर्धक और अग्नि प्रदीपक माना गया है। सरल भाषा में कहें तो दही पाचन अग्नि को तेज करती है और शरीर को बल भी देती है। चरक संहिता में दही के गुणों के बारें में भी विस्तार से बताया गया है। दही भारी, चिकनी, खट्टी और बल को बढ़ाने वाले होती है और इसके सेवन का असर हर किसी के शरीर पर अलग-अलग होता है। इसके साथ ही रात के समय दही के सेवन को हानिकारक माना गया है। यह स्पष्ट करता है कि दही पौष्टिक होने के बावजूद हर समय उपयुक्त नहीं है।

अब जानते हैं कि गर्मियों में दही के सेवन के सही नियम क्या हैं। दही पित्त दोष और कफ दोष को बढ़ाती है और इसका स्वाद भी खट्टा होता है। ऐसे में दही को दोपहर के भोजन के साथ लेना सही रहता है। अगर दही को मथकर लिया जाए तो यह शरीर के लिए और लाभकारी बन जाती है। छाछ या दही में हल्का मीठा शहद या खांड मिलाकर ले सकते हैं लेकिन नमक मिलाने से परहेज करें। आयुर्वेद में दही में मीठा मिलाकर खाने की सलाह दी जाती है लेकिन नमक नहीं, क्योंकि यह विरुद्ध आहार हो जाता है। इसके साथ ही सीधे फ्रिज से निकाला हुआ ठंडा दही खाने से पाचन प्रभावित हो सकता है।

चरक संहिता में विस्तार से बताया गया है कि दही का सेवन किन लोगों को करना चाहिए। दही का सेवन उन लोगों को करना चाहिए जिनका पाचन अच्छा हो, जो अधिक शारीरिक श्रम करते हो या फिर जो दुबले-पतले और कमजोरी महसूस करते हो। अगर आंतों या पेट में पित्त बढ़ने की समस्या रहती है, तब भी दही का सेवन किया जा सकता है लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि सर्दी-जुकाम से पीड़ित, कफ से पीड़ित, मुहांसों या फिर किसी प्रकार की त्वचा एलर्जी से पीड़ित लोगों को दही का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही, रात के समय भोजन में दही का इस्तेमाल न करें। इससे भारीपन, गैस या एसिडिटी बढ़ सकती है।

--आईएएनएस

पीएस/पीयूष

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले जारी, परमाणु हमले के खतरे को खत्म करना लक्ष्य: लेफ्टिनेंट बेन कोहेन

नई दिल्ली, 5 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता लेफ्टिनेंट बेन कोहेन ने आईएएनएस से खास बातचीत में वर्तमान में अमेरिका-ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को लेकर रणनीति और अब तक की गई कार्रवाई के बारे में बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश-

सवाल- अमेरिका और इजरायल द्वारा हाल ही में किए गए हमले के बाद ईरानी वायु सेना और नौसेना की वर्तमान परिचालन स्थिति क्या है?

जवाब- आईडीएफ ने शनिवार सुबह ऑपरेशन रोरिंग लायन शुरू किया, जिसका प्राथमिक उद्देश्य ईरानी आतंकी शासन को निशाना बनाना और और पूरी दुनिया के लिए अस्तित्वगत खतरे को समाप्त करना था। इस खतरे में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, परमाणु हथियार हासिल करने की ईरान की इच्छा और प्रॉक्सी नेटवर्क शामिल हैं। अमेरिकी सशस्त्र बलों और आईडीएफ ने पिछले कुछ दिनों में विभिन्न लक्ष्यों पर हमले जारी रखे हैं, जिनमें सबसे पहले बैलिस्टिक मिसाइल लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। आईडीएफ के हमलों के बारे में मैं आपको बता सकता हूं कि हाल के घंटों में एक ऐतिहासिक क्षण आया, जब एक आईडीएफ लड़ाकू विमान ने तेहरान के ऊपर एक ईरानी याक-130 लड़ाकू विमान को मार गिराया। हम ईरानी आतंकी शासन के भीतर हवाई रक्षा प्रणालियों, बैलिस्टिक मिसाइल लक्ष्यों और अन्य ईरानी आतंकी शासन लक्ष्यों को निशाना बनाना जारी रखे हुए हैं।

सवाल- क्या ईरानी मिसाइल अभी इजरायल के भीतर सुरक्षा प्रतिष्ठानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाने और भेदने में सक्षम है?

जवाब- 7 अक्टूबर 2025 के बाद हम अपने दुश्मनों को कभी भी कम नहीं आंक सकते। इसलिए हम ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल के लॉन्चरों और उनके उन गढ़ों को निशाना बनाकर निशाना बनाना जारी रखे हुए हैं, जहां वे अपनी बैलिस्टिक मिसाइलें रखते हैं। हम समझते हैं कि उनके पास अभी भी इजरायल और विशेष रूप से इजरायली नागरिकों को निशाना बनाने और नुकसान पहुंचाने की क्षमता है। एक तो इसलिए कि उनके पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं और दूसरा इसलिए कि उनका नागरिकों को निशाना बनाने का सीधा इरादा है।

सवाल- लेबनान में इजरायल की जमीनी सेना की तैनाती का रणनीतिक प्रभाव क्या है और इससे क्षेत्रीय संतुलन कैसे प्रभावित होता है?

जवाब - दो दिन पहले हिजबुल्लाह आतंकवादी संगठन ने यह साबित कर दिया कि ईरान का प्रॉक्सी नेटवर्क इजरायल के लिए एक गंभीर खतरा है। जब इजरायल ईरानी आतंकी शासन से अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था, उसी समय अभियान के शुरुआती दिनों में बचे वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों ने हिजबुल्लाह पर युद्ध में शामिल होने के लिए दबाव डाला, जिससे यह साबित हो गया कि वे लेबनानी जनता के हितों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि ईरानी हितों की रक्षा के लिए वहां मौजूद हैं। इजरायल समझता है कि हम अपनी सीमा पर इस तरह के खतरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते और इसीलिए हमने अपने नागरिकों पर इस खतरे को रोकने के लिए हिजबुल्लाह के आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हमारे दो मुख्य प्रयास हैं, जिसमें पहला, इजरायली नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से बनाए गए विशिष्ट लक्ष्यों को हवाई हमलों द्वारा निशाना बनाना, जिनमें हथियार भंडारण सुविधाएं और कमान एवं नियंत्रण केंद्र शामिल हैं। वहीं दूसरा, इजरायल के उत्तरी नागरिकों की रक्षा करना है। 8 अक्टूबर को हिजबुल्लाह के समर्थन में इजरायल को उत्तरी सीमा से हजारों नागरिकों को निकालना पड़ा। ऐसा करने के बजाय हमने दक्षिणी लेबनान में जमीनी आक्रमण नहीं, बल्कि एक अग्रिम रक्षात्मक रुख अपनाया है, जिसका उद्देश्य उत्तर में इजरायली नागरिकों की रक्षा करना है।

सवाल - हमास इजरायल और ईरान के बीच सीधे टकराव का अपने लाभ के लिए किस हद तक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है?

जवाब- हमास लंबे समय से लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है। हाल के महीनों में उसने लगातार युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। वे पीली रेखा पार करके इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। इसके विपरीत आईडीएफ ने युद्धविराम समझौते का उल्लंघन नहीं किया। हमने केवल हमास द्वारा युद्धविराम समझौते के उल्लंघन के जवाब में कार्रवाई की है और हम दक्षिणी मोर्चे पर तैयार हैं। अगर हमास हाल के महीनों में किए गए प्रयासों से अलग कुछ करने की कोशिश करता है, तो हम उसके लिए तैयार हैं। हम समझते हैं कि हमें इसके लिए तैयार रहना होगा, जैसे हम हिजबुल्लाह के शामिल होने के लिए तैयार थे। जैसे हम ईरान के किसी भी अन्य सहयोगी संगठन द्वारा युद्ध में शामिल होने की कोशिश के लिए तैयार रहेंगे।

सवाल- क्या ईरान के खिलाफ पूर्ण पैमाने पर युद्ध से इस बार सत्ता परिवर्तन सुनिश्चित होगा या इससे भविष्य में अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है?

जवाब- यहां लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है। जब हम ऑपरेशन वारिंग लाइन की बात कर रहे हैं, तो इसका उद्देश्य ईरानी आतंकवादी शासन के सैन्य प्रयासों से उत्पन्न अस्तित्वगत खतरे को समाप्त करना है। इनमें बैलिस्टिक मिसाइलों का तेजी से निर्माण, परमाणु हथियारों के कार्यक्रमों को मजबूत और गुप्त रखने की इच्छा और अंततः परमाणु हथियार प्राप्त करने की इच्छा और इजरायल की सीमाओं पर खतरनाक प्रॉक्सी तैनात करने के ईरानी आतंकवादी शासन के प्रयास शामिल है। ऑपरेशन का लक्ष्य उस खतरे को समाप्त करना है ताकि ईरान इजरायली जनता और पूरी दुनिया के लिए आज जैसा खतरा पैदा कर रहा है, वैसा न कर सके।

सवाल- क्या इजरायल इन हमलों के माध्यम से ईरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह से नष्ट करने में सफल रहा?

जवाब- पिछले वर्ष ऑपरेशन राइजिंग लायन के दौरान हमने महसूस किया कि हमारे सामने एक टिक-टिक करता टाइम बम मौजूद है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार थे कि ईरानी आतंकवादी शासन परमाणु हथियार हासिल न कर पाए और अमेरिकी सशस्त्र बलों के साथ मिलकर हमने कई परमाणु हथियार कार्यक्रमों पर हमला किया। हमने यह सुनिश्चित किया कि हम उन्हें कई साल पीछे धकेल रहे हैं और उन्हें उस समय सीमा के भीतर परमाणु बम हासिल करने से रोक रहे हैं, जिस समय वे ऐसा कर सकते थे। तब से हमने देखा है कि ईरानी शासन लगातार अपने परमाणु हथियार कार्यक्रमों को मजबूत करने और छिपाने की कोशिश कर रहा है ताकि वे भविष्य में इसे आगे बढ़ा सकें और हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि उनके पास ऐसा करने की क्षमता न हो।

सवाल- क्या इस संघर्ष के दौरान ईरान को अन्य अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से सैन्य या लॉजिस्टिक सहायता मिल रही है?

जवाब- मैं इस मामले पर किसी विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर कुछ नहीं कह सकता, लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे क्षेत्र में अपने आसपास के सभी लोगों को निशाना बनाने के लिए तैयार हैं और उन्होंने पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसा किया है।

सवाल - ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी का पद संभालने का भू-राजनीतिक प्रभाव क्या होगा? इसके अलावा, क्या इजरायल उसके खात्मे को प्राथमिक लक्ष्य मानेगा?

जवाब- मैं फिर से एक सैन्य अभियान के बारे में बात कर रहा हूं। इस सैन्य अभियान का उद्देश्य उस अस्तित्वगत खतरे को रोकना है। जब हमने ऑपरेशन के पहले हमले में 40 से अधिक वरिष्ठ कमांडरों को मार गिराया, जिनमें सबसे वरिष्ठ सर्वोच्च नेता खामेनेई थे तो हमारा एक ही लक्ष्य था, ईरानी शासन द्वारा इजरायल और दुनिया पर थोपे गए सुरक्षा खतरे को खत्म करना। हम इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए हर तरीके से कार्रवाई करते रहेंगे। मैं भविष्य के किसी भी ऑपरेशन के बारे में बात नहीं करूंगा, क्योंकि मैं उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता।

सवाल- तो क्या खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान में शासन बदल रहा है?

जवाब- आईडीएफ और संयुक्त राज्य सशस्त्र बलों के संयुक्त ऑपरेशन का लक्ष्य अस्तित्वगत खतरे को खत्म करना है। हम इसी बारे में बात कर रहे हैं और इसी पर काम कर रहे हैं। भविष्य में ईरान के अंदर जो कुछ भी होगा, उसका उनसे संबंध होगा।

--आईएएनएस

ओपी/वीसी

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'आप एक सच्चे लीडर की तरह बात कर रहे', इयान बिशप ने क्यों की संजू सैमसन की तारीफ?

मुंबई, 6 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में जगह बना ली है। गुरुवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को 7 रन से हराकर फाइनल में जगह बनाई। संजू सैमसन ने लगातार दूसरा अर्धशतक लगाया और उन्हें उनकी विस्फोटक पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। Fri, 6 Mar 2026 08:27:30 +0530

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