US Midterm Elections में भारतीय मूल के वोटरों को रिझाने में जुटे नेता, डोसा और मंदिर बने जरिया
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 31 अक्टूबर अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के मद्देनजर उम्मीदवार भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं को लुभाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। कोई भारतीय रेस्तरां में डोसा बनाकर समुदाय से जुड़ने की कोशिश कर रहा है तो कोई मंदिरों में आयोजित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शिरकत कर समर्थन जुटाने में लगा है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने उपनगर डलास के इरविंग स्थित एक भारतीय रेस्तरां में खुद डोसा बनाया।
उन्होंने तवे पर डोसे का घोल फैलाया, उसमें आलू एवं अन्य सब्जियों से बने मसाले डाले तथा तैयार डोसे को केले के पत्ते पर परोसा। उनके इस अंदाज का वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। टेक्सास में बड़ी संख्या में रहने वाले भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने टालारिको की इस पहल का गर्मजोशी से स्वागत किया।
टालारिको राज्य की सीनेट सीट के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को चुनौती दे रहे हैं। व्यवसायी जेम्स ब्लंट ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टालारिको के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि एक ओर कुछ रिपब्लिकन समर्थक भारतीयों और उनके खानपान को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे हैं, वहीं टालारिको डोसा बना रहे हैं।
ब्लंट ने कहा, ‘‘एक पार्टी विभाजन परोस रही है, जबकि दूसरी भारतीय चावल के क्रेप (डोसा) परोस रही है, जो वाकई बेहद स्वादिष्ट है।’’ भारतीय-अमेरिकी आबादी वाले राज्यों में मंदिर भी चुनाव प्रचार और सामुदायिक संपर्क के अहम केंद्र बनकर उभरे हैं। उम्मीदवार मंदिरों में आयोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होकर समुदाय के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। कनेक्टिकट के गवर्नर नेड लैमॉन्ट ने एक और कार्यकाल के लिए चुनाव मैदान में रहते हुए उप विदेश मंत्री जेनिफर बाराहोना के साथ स्टेट कैपिटल में आयोजित दिवाली समारोह में हिस्सा लिया।
ओहायो के सांसद ग्रेग लैंड्समैन शेरोनविल स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर के 11वें पाटोत्सव में शामिल हुए। वहीं, न्यू जर्सी के सीनेटर कोरी बुकर ने अक्षरधाम मंदिर में आयोजित दिवाली समारोह में शिरकत की। कांग्रेस सदस्य रैंडी फाइन और स्कॉट पेरी भी समुदाय से संपर्क साधने के लिए हैरिसबर्ग के एक मंदिर पहुंचे।
मिशिगन में सांसद जॉन जेम्स ने एक स्वामीनारायण मंदिर का दौरा कर वहां की परंपराओं और हिंदू-अमेरिकी समुदाय की सेवा भावना के बारे में जानकारी ली। अमेरिका में भारतीय समुदाय की उल्लेखनीय आबादी कैलिफोर्निया, टेक्सास, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, वाशिंगटन, इलिनॉय, पेंसिल्वेनिया और जॉर्जिया जैसे राज्यों में है। जॉर्जिया, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन और नॉर्थ कैरोलाइना जैसे कड़े चुनावी मुकाबले वाले राज्यों में एक से दो प्रतिशत मतों का अंतर भी चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का समर्थन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
UNHRC की निष्पक्षता पर भारत का जोर, कहा- देशों पर जबरन फैसले थोपने से नहीं बदलेगी स्थिति
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 31 अक्टूबर भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) की विश्वसनीयता इस बार पर निर्भर करती है कि वह सभी देशों के साथ समान और निष्पक्ष व्यवहार करे। साथ ही उसने कहा कि किसी देश की भागीदारी के बिना उस पर केंद्रित जनादेश तय करने से वहां की जमीनी स्थिति में शायद ही कोई सुधार होता है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने शुक्रवार को यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा में मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट पर हुई चर्चा को संबोधित किया।
उन्होंने इस साल फरवरी में 61वें मानवाधिकार परिषद के उच्चस्तरीय सत्र में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की टिप्पणियों को दोहराया। जयशंकर ने कहा था, मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका संवाद, क्षमता निर्माण और वास्तविक साझेदारियां हैं, न कि उनका राजनीतिकरण करना, चुनिंदा रवैया अपनाना या दोहरे मापदंड रखना। मंगलानंदन ने कहा कि यदि परिषद को एकजुट होकर अपनी बात रखनी है और मानवाधिकारों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने के आरोपों को दूर करना है, तो यह दृष्टिकोण बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत इस साल 2026-28 की अवधि के लिए सातवीं बार मानवाधिकार परिषद का सदस्य बना है। मंगलानंदन ने कहा, परिषद की विश्वसनीयता निष्पक्षता पर निर्भर करती है। किसी देश की भागीदारी के बिना उस पर केंद्रित जनादेश तय करने से वहां की जमीनी स्थिति में शायद ही कोई सुधार होता है।’’ उन्होंने कहा कि इसके बजाय इससे परिषद के भीतर मतभेद और गहरे होते हैं।
उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा इस उद्देश्य के लिए उपयुक्त मंच बनी हुई है जो सहयोग और संबंधित सदस्य देशों के साथ संवाद पर आधारित है तथा सभी देशों को समान रूप से देखती है। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि आतंकवाद मानवाधिकारों, खासकर जीवन के अधिकार के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बना हुआ है। उन्होंने कहा, हम परिषद से आग्रह करेंगे कि वह आतंकवाद को बिल्कुल न बर्दाश्त करने के आधार पर इस खतरे पर लगातार अपेक्षित ध्यान दे।’’ भारत के विचारों को रेखांकित करते हुए मंगलानंदन ने कहा कि सभी मानवाधिकारों को निष्पक्ष और समान तरीके से तथा समान महत्व के साथ देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों तथा विकास के अधिकार को भी नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के बड़े हिस्से में गरीबी, कर्ज तथा वित्तीय संसाधनों और प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुंच मानवाधिकारों के हनन की सबसे बड़ी और तात्कालिक वजहें बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, इन समस्याओं के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है, न कि दबाव या जबरदस्ती की।
इसके अलावा, भारत ने कहा कि परिषद को उपलब्ध संसाधनों के भीतर ही अपने दायित्वों को पूरा करना चाहिए। मंगलानंदन ने कहा, हमें ऐसे तंत्रों पर विचार करना चाहिए, जिनसे परिषद और महासभा, दोनों में एक ही विषय और समान प्रकृति के प्रस्तावों तथा पहलों की पुनरावृत्ति से बचा जा सके। उन्होंने कहा, हम देख रहे हैं कि परिषद की ओर से महासभा की तीसरी समिति को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
इसमें विशेष प्रतिवेदकों की रिपोर्ट भी शामिल है। इससे एक विशिष्ट और विशेषज्ञ परिषद की आवश्यकता और कमजोर होती है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति सामाजिक, मानवीय और सांस्कृतिक मुद्दों से संबंधित मामलों पर काम करती है।
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