चीन की महिला फुटबॉल टीम ने बांग्लादेश को हराकर एशियन कप में जीत के साथ शुरुआत की
बीजिंग, 4 मार्च (आईएएनएस)। 3 मार्च को हुए 2026 एएफसी महिला एशियाई कप के ग्रुप बी मैच में डिफेंडिंग चैंपियन चीन ने बांग्लादेश को 2-0 से हराकर जीत के साथ शुरुआत की।
उस दिन खेले गए दूसरे ग्रुप बी मैच में, नॉर्थ कोरिया ने उज़्बेकिस्तान को 3-0 से हराया। चीन का मुकाबला 6 मार्च को उज़्बेकिस्तान से होगा।
इस साल का एशियाई महिला कप 1 से 21 मार्च तक ऑस्ट्रेलिया में आयोजित हो रहा है। जिसमें 12 टीमों ने हिस्सा लिया था, जिन्हें तीन ग्रुप में बांटा गया है। टूर्नामेंट फॉर्मेट के हिसाब से, हर ग्रुप से टॉप दो टीमें और तीसरे नंबर पर रहने वाली दो सबसे अच्छी टीमें क्वार्टर फाइनल में पहुंचेंगी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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मिडिल ईस्ट की जंग में NATO की दस्तक, ईरान ने तुर्की को भी नहीं बख्शा
ईरान ने तुर्की के ऊपर भी अटैक कर दिया है. तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस मिसाइल ने इराक और सीरिया के हवाई क्षेत्र को पार किया, जिसके बाद इसे तुर्की की तरफ आते हुए डिटेक्ट किया गया.
खतरे को देखते हुए पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात नाटो (NATO) के एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने तुरंत कार्रवाई की और मिसाइल को आसमान में ही तबाह कर दिया. गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई भी हताहत नहीं हुआ और न ही किसी को चोट आई.
तुर्की की कड़ी चेतावनी
ईरान के साथ करीब 500 किलोमीटर की लंबी सीमा साझा करने वाले तुर्की ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. मंत्रालय ने अपने बयान में साफ कहा कि तुर्की के खिलाफ किसी भी तरह की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है. साथ ही, तुर्की ने सभी पक्षों को चेतावनी दी है कि वे ऐसे कदम उठाने से बचें जिससे युद्ध और ज्यादा भड़क जाए. तुर्की एक सुन्नी बहुल देश होने के साथ-साथ नाटो का अहम सदस्य भी है, इसलिए उस पर होने वाला कोई भी हमला इस युद्ध में नाटो की सीधी एंट्री का कारण बन सकता है.
5 दिनों की जंग में बिछ गईं 800 लाशें
शनिवार को जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमले शुरू किए थे, तब से अब तक के हालात बेहद डरावने हो चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही संकेत दिया था कि यह युद्ध हफ्तों या उससे ज्यादा समय तक चल सकता है. महज 5 दिनों के भीतर ईरान में लगभग 800 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की भी मौत हो गई है. खामनेई की मौत के बाद ईरान ने उन खाड़ी देशों पर हमले किए जहां अमेरिकी बेस हैं, वहीं इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.
मध्यस्थ से अब सीधे निशाने पर?
अब तक तुर्की इस जंग की आग से बचा हुआ था. राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने खामनेई की मौत पर दुख भी जताया था और लगातार अमेरिका व ईरान के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की वकालत कर रहे थे. तुर्की ने चेतावनी दी थी कि यह क्षेत्र अब और ज्यादा अस्थिरता झेलने की स्थिति में नहीं है।
मंगलवार को ही तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा था कि अमेरिका को अपने हमले सिर्फ ईरान की सैन्य क्षमता कम करने तक ही सीमित रखने चाहिए, क्योंकि सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिश पूरे क्षेत्र के लिए जोखिम भरा साबित हो सकती है. लेकिन आज की मिसाइल घटना ने तुर्की को भी इस विवाद के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है.
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आसमान में छिड़ा महायुद्ध
इस मिसाइल हमले से ठीक पहले इजरायली सेना ने एक और बड़ी कामयाबी का दावा किया. इजरायल के एक F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट ने तेहरान के ऊपर ईरान के YAK-130 लड़ाकू विमान को मार गिराया. इसके अलावा यरूशलेम के आसपास भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जहां इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोक दिया.
शिपिंग और वैश्विक सुरक्षा पर गहराता संकट
एक तरफ जहां जमीन और आसमान में मिसाइलें बरस रही हैं, वहीं दूसरी तरफ हिंद महासागर में भी ईरानी जंगी जहाज 'आइरिस देना' के डूबने की खबर ने समुद्री व्यापार और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. कुल मिलाकर, ईरान के चारों तरफ घेराबंदी और जवाबी हमलों ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं.
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