Allahabad High Court की युवा वकीलों को सलाह, Social Media पर Likes नहीं मुकदमों की तैयारी पर दें ध्यान
अदालत परिसरों में जारी विरोध और कामकाज में बाधा के बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि युवा अधिवक्ताओं को सोशल मीडिया पर ‘लाइक’ बढ़ाने के बजाय अपने अध्ययन, मुकदमों की तैयारी और पेशेवर जीवन को संवारने पर ध्यान देना चाहिए। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा कि उच्च न्यायालय के कामकाज को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी पोस्ट की जा रही हैं, जिनमें अधूरी और भ्रामक जानकारी दी गई है। इससे बार और पीठ के बीच अनावश्यक मतभेद पैदा हो सकते हैं।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि समाज में अधिवक्ताओं का सम्मान इसलिए है, क्योंकि आम जनता को उच्च न्यायालय पर भरोसा है। अदालत ने यह टिप्पणी राजेश नाम के एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। अदालत ने उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन से इस मुद्दे पर विचार करने और उच्च न्यायालय की गरिमा बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाने को कहा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं की गरिमा में निजी और सरकारी, दोनों क्षेत्रों में कार्यरत वकील शामिल हैं। यह मामला सुनवाई के दौरान उस समय सामने आया, जब विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ अधिवक्ताओं ने अन्य वकीलों को न्यायमूर्ति देशवाल के अदालत कक्ष में जाने से रोक दिया। इस दौरान अदालत ने एक महिला अधिवक्ता की आवाज सुनी, जो अपने मुकदमे की सुनवाई के लिए अदालत कक्ष में प्रवेश करना चाहती थी।
अदालत ने कहा कि न्यायिक कार्यवाही केवल इसलिए नहीं रोकी जा सकती कि अधिवक्ताओं का एक वर्ग नहीं चाहता कि अदालत में कामकाज हो, जबकि अधिकांश वकील अपने मुकदमों की पैरवी करना चाहते हैं। अदालत ने कहा, ‘‘युवा अधिवक्ताओं को सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट पर लाइक बढ़ाने के बजाय पढ़ाई और अपने मुकदमों की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए, ताकि वे अपना करियर बना सकें।’’ अदालत ने कहा, ‘‘कुछ अधिवक्ताओं का ऐसा आचरण बार और अदालत की प्रतिष्ठा तथा गरिमा के अनुकूल नहीं है।’’
भाजपा पश्चिम बंगाल में हारी तो Suvendu Adhikari सबसे पहले छोड़ेंगे पार्टी: Abhishek Banerjee
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को दावा किया कि अगर पांच साल बाद पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में नहीं रहती है, तो पार्टी छोड़ने वाले पहले व्यक्ति मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी होंगे। विपक्ष के नेता ने यह भी कहा कि दिसंबर 2020 में तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अधिकारी को एक हलफनामा देकर यह घोषणा करनी चाहिए कि वह जीवनभर भगवा दल में ही रहेंगे। बनर्जी ने आरोप लगाया कि विपक्ष में रहते हुए अधिकारी ने तृणमूल के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) का इस्तेमाल किया था।
उन्होंने कहा, हमारे पास ऐसी कोई संस्था नहीं है, लेकिन हम झुके नहीं हैं क्योंकि हम सच्चे बंगाली हैं। दिल्ली के पालतू कुत्ते की तरह रहने के बजाय रॉयल बंगाल टाइगर की तरह रहना कहीं अधिक सम्मानजनक है। यहां संवाददाताओं के समक्ष उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के कई सांसदों और विधायकों को दूसरी पार्टियों में शामिल होने के लिए डराने के बावजूद मुख्यमंत्री तृणमूल फोबिया से पीड़ित हैं।
बनर्जी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री अपने सार्वजनिक भाषणों में ज्यादातर उनके बारे में ही बात करते हैं। उन्होंने कहा, पांच साल बाद आपकी (अधिकारी की) उम्र 61 साल होगी, जबकि मेरी उम्र 43-44 साल होगी। आपकी ताकत घटेगी, जबकि मेरी बढ़ेगी।
उन्होंने दावा किया कि उनकी 12 वर्षीय बेटी को दुष्कर्म की धमकी दी गई और उनकी पार्टी के कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई। मुख्यमंत्री अधिकारी की उस टिप्पणी का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्होंने 71 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उम्र बढ़ने के कारण आराम करने की सलाह दी थी, डायमंड हार्बर के सांसद ने दावा किया कि ऐसा करके अधिकारी ने वास्तव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा है, जिनकी उम्र 76 वर्ष है। बनर्जी ने कहा, हो सकता है कि दिल्ली के कुछ नेताओं ने उन्हें प्रधानमंत्री की उम्र को लेकर निशाना साधने के लिए उकसाया हो।
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