फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने दीं होली की शुभकामनाएं, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया आभार
नई दिल्ली, 4 मार्च (आईएएनएस)। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को होली की शुभकामनाएं देते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत दोस्ती का संदेश दिया। इस पर पीएम मोदी ने खास अंदाज में उनका आभार जताया।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, होली की शुभकामनाएं, मेरे दोस्त! यह संदेश भारतीय त्योहार होली के रंगों और खुशियों से भरे मौके पर आया, जो भारत में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैक्रों के इस संदेश का तुरंत और बेहद गर्मजोशी से जवाब दिया। पीएम मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, बहुत-बहुत धन्यवाद, मेरे मित्र! होली के पावन अवसर पर आपको और फ्रांस के लोगों को ढेर सारी खुशियां और समृद्धि की हार्दिक शुभकामनाएं।
प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब में मैक्रों को मेरे मित्र कहकर संबोधित किया, जो दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनयिक स्तर पर गहरी दोस्ती को दर्शाता है।
यह आदान-प्रदान भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से चली आ रही मजबूत साझेदारी का प्रतीक है। दोनों देश रक्षा, अंतरिक्ष, पर्यावरण, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्रों में निकट सहयोग करते हैं। हाल के वर्षों में पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच कई उच्च स्तरीय बैठकें हुईं, जिनमें दोनों ने स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर जोर दिया।
मैक्रों ने पहले भी भारतीय त्योहारों जैसे दीपावली और होली पर शुभकामनाएं दी हैं, जबकि पीएम मोदी ने बास्तील दिवस और अन्य फ्रांसीसी अवसरों पर जवाबी शुभकामनाएं भेजी हैं।
होली, जिसे रंगों का त्योहार कहा जाता है, भारत में वसंत ऋतु के आगमन और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दौरान लोग एक-दूसरे पर रंग लगाते हैं, मिठाइयां बांटते हैं और खुशियां मनाते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होली अब वैश्विक पहचान बन चुकी है और कई देशों में भारतीय समुदाय इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं। फ्रांस में भी भारतीय डायस्पोरा होली के आयोजन करता है, जिसमें फ्रांसीसी नागरिक भी शामिल होते हैं।
--आईएएनएस
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ट्रंप का साथ और 'अनलिमिटेड' हथियार, फिर भी इजरायली सेना के सामने क्यों खड़ी है बड़ी चुनौती?
इजरायल की सरकार अब इस जंग को 'वॉर ऑफ रिडेम्पशन' यानी मुक्ति का युद्ध कह रही है. इजरायल की अर्थव्यवस्था ने काफी मजबूती दिखाई है और 2025 में उसकी विकास दर 3.1% रही, जिसका बड़ा कारण डिफेंस पर होने वाला खर्च था. लेकिन मार्च 2026 में ईरान के खिलाफ शुरू हुए इस नए मोर्चे ने देश पर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया है.
केवल पिछले कुछ दिनों में इस जंग पर 15 से 25 अरब शेकेल (इजरायली मुद्रा) का अतिरिक्त खर्च हो गए हैं. देश का कर्ज भी 2024 के अंत तक जीडीपी के 69% तक पहुंच गया था, जो अब और बढ़ रहा है. सरकार ने इस खर्च की भरपाई के लिए वैट (VAT) को बढ़ाकर 18% कर दिया है. अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि इजरायल एक छोटी और तेज जंग तो सह सकता है, लेकिन अगर यह सालों तक चली, तो देश की साख को बड़ा खतरा हो सकता है.
खत्म नहीं हुई है पुरानी जंग
भले ही पूरी दुनिया का ध्यान अब ईरान पर है, लेकिन गजा का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है. अक्टूबर 2023 से शुरू हुई यह लड़ाई अब अपने तीसरे साल में प्रवेश कर चुकी है. गजा अब इजरायल के लिए प्राथमिक मोर्चा नहीं रहा, क्योंकि उसकी ज्यादातर खास टुकड़ियों को लेबनान और ईरान की मिसाइलों को रोकने के लिए तैनात कर दिया गया है.
गजा में इजरायल ने अब एक 'येलो लाइन' बना दी है, जिसके पीछे उसकी सेना हमेशा तैनात रहती है. अक्टूबर 2025 में हुए एक समझौते के बाद वहां शांति की कोशिश तो हुई, लेकिन यह बहुत कमजोर साबित हुई है. उस समझौते के बाद भी करीब 500 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं. ईरान से युद्ध शुरू होते ही इजरायल ने एक बार फिर गजा में सामान की सप्लाई रोक दी है. गजा अब इजरायल के लिए एक 'जमा हुआ युद्ध' बन गया है, जिसे वह थोड़े से सैनिकों के साथ मैनेज कर रहा है.
हिजबुल्लाह को पीछे धकेलने की कोशिश
3 मार्च 2026 से इजरायल ने लेबनान की सीमा पर केवल झड़पों तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर घुसना शुरू कर दिया है. इजरायली सेना ने उन इलाकों पर कब्जा करना शुरू किया है, जहां से हिजबुल्लाह उनके गांवों पर मिसाइलें दागता था. इजरायली वायुसेना लगभग हर दिन हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी कर रही है. इजरायल ने लेबनान की सरकार को सख्त चेतावनी दी है कि अगर उनकी सेना ने हिजबुल्लाह को काबू नहीं किया, तो इजरायल लेबनान के बिजली घरों और पुलों जैसे अहम ठिकानों को भी निशाना बनाना शुरू कर देगा.
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आम इजरायलियों का हाल
विदेशी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल की जनता इस समय मिली-जुली भावनाओं के बीच जी रही है. एक तरफ थकान है, तो दूसरी तरफ यह उम्मीद कि शायद इस बार 'सांप के सिर' (ईरान) पर हमला करके सब कुछ हमेशा के लिए ठीक हो जाएगा. तेल अवीव और अश्कलोन जैसे शहरों में ईरानी मिसाइलें गिरने के बाद से लोग बंकरों में रहने को मजबूर हैं.
देश का मुख्य एयरपोर्ट बंद है और लोग पूरी तरह से अलर्ट ऐप्स पर निर्भर हैं. उत्तरी इजरायल से भागे हुए लोग वापस तब तक नहीं लौटना चाहते, जब तक लेबनान में हिजबुल्लाह का खतरा पूरी तरह खत्म न हो जाए. वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपनी राजनीति बचाने के लिए इस जंग को खींच रहे हैं.
तेल की कीमतें और वैश्विक दबा
यह जंग केवल इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रह गई है. ईरान अब खाड़ी देशों पर भी हमले कर रहा है और समुद्री रास्तों को ब्लॉक कर रहा है, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. अगर एक महीने के भीतर यह युद्ध खत्म नहीं हुआ, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल सकती है, जिससे इजरायल पर युद्ध रोकने का भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव बनेगा.
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