एग्रोइकोलॉजिकल होमस्टेड से मध्य भारत में महिलाओं की आय और पोषण में बढ़ोतरी हुई : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 4 मार्च (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक एग्रोइकोलॉजिकल होमस्टेड मॉडल ने मध्य प्रदेश के मंडला जिले में पिछवाड़े के प्लॉट को बदल दिया है, जिससे प्रोडक्शन, न्यूट्रिशनल नतीजे और आदिवासी महिलाओं की इनकम बढ़ी है।
इको-बिजनेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि सीजीआईएआर मल्टीफंक्शनल लैंडस्केप्स प्रोग्राम और प्रोफेशनल असिस्टेंस फॉर डेवलपमेंट एक्शन (प्रदान) की अगुवाई में इस इलाके के आदिवासियों के बीच यह पहल, अलग-अलग ऊंचाई पर अलग-अलग तरह की सब्जियां उगाने और जगह का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने पर फोकस करती है।
रिपोर्ट में इंटरनेशनल वॉटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (आईडब्ल्यूएमआई) के नतीजों का जिक्र किया गया है कि प्रोडक्शन में अलग-अलग तरह की चीजें 350 प्रतिशत बढ़ी हैं, खाने में अलग-अलग तरह की चीजें दोगुनी हो गई हैं, और हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पोषक तत्वों से भरपूर खाने की चीजों का इस्तेमाल 70 प्रतिशत बढ़ गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, बैकयार्ड पोल्ट्री से प्रोटीन लेने और घर की बचत में भी सुधार हुआ है, और परिवारों की उपज और खाद के लिए बाहरी बाजारों पर निर्भरता कम हुई है।
इस तकनीक में अलग-अलग तरह की सब्जियां उगाना, फसल चक्र, बायो-कम्पोस्टिंग, बारिश के पानी का संचयन और फसल की खेती के लिए ऑर्गेनिक खाद और जानवरों के चारे के लिए फसल के बचे हुए हिस्से या बचे हुए हिस्से का इस्तेमाल करके जानवरों को जोड़ना शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला किसानों ने पारंपरिक तरीकों को चुनौती देते हुए अपने परिवार के खेतों में प्रोडक्शन और फैसले लेने की जिम्मेदारी संभाली है।
एक विश्लेषक ने बताया कि इस जिले के चिमकाटोला और केवलारी इलाकों के ज्यादातर किसान पहले मोनोक्रॉपिंग करते थे – जिसमें ज्यादातर ऊपरी इलाकों में मक्का और नदियों के पास निचले खेतों में चावल उगाते थे।
चिमकाटोला की रहने वाली कुसुम ने कहा, पहले, हम बाजार से खरीदते थे, लेकिन अब, हम यह सब घर पर बनाते हैं।
प्रोफेशनल असिस्टेंस फॉर डेवलपमेंट एक्शन के टीम कोऑर्डिनेटर सौरव कुमार ने कहा कि पहले फसलें अनियमित बारिश, खड़ी ढलानों पर गलत खेती के कारण जमीन के खराब होने, और अस्थिर फ्यूल की कीमतों और दूसरी वजहों से बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से कमजोर थीं। घर के पीछे के प्लॉट ज्यादातर खाली छोड़ दिए जाते थे, और कभी-कभी मक्का उगाया जाता था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट के तहत हर महिला किसान लगभग 400-500 स्क्वायर मीटर जमीन पर खेती करती है, जिसमें जीवामृत और पंचगव्य जैसे बायो-फर्टिलाइजर का इस्तेमाल होता है। ये दोनों ही गाय के गोबर और मूत्र को दूसरी ऑर्गेनिक चीजों के साथ मिलाकर बनाए जाते हैं।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस पोस्ट पर हमला, एएसआई की मौत
इस्लामाबाद, 4 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान के बजौर जिले की वारा मामोंद तहसील में स्थित बदन पुलिस पोस्ट पर बुधवार को अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग कर दी। हमले में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) दौलत खान की मौत हो गई।
स्थानीय मीडिया ने पुलिस के हवाले से बताया कि हमले के बाद पुलिस ने इलाके को घेर लिया और संदिग्धों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून, ने बताया कि पिछले एक महीने में खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं।
इससे पहले 26 फरवरी को बजौर की खर तहसील के नवाकलाय इलाके में अबाबील पुलिस पेट्रोलिंग टीम पर अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया था, जिसमें चार पुलिसकर्मी मारे गए और दो अन्य घायल हो गए। वहीं, 14 फरवरी को वारा मामोंद पुलिस स्टेशन पर अज्ञात बंदूकधारियों की फायरिंग में अतिरिक्त स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) गुल मानो दिन की मौत हो गई थी।
इस बीच, इस्लामाबाद स्थित एक थिंक टैंक की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देशभर में आत्मघाती हमलों में बढ़ोतरी के कारण फरवरी में पाकिस्तान में संघर्ष से जुड़ी मौतों में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
पाकिस्तान के एक और बड़े अखबार डॉन के अनुसार, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (पीआईसीएसएस) की एक रिपोर्ट से पता चला है कि फरवरी में 470 मौतें और 333 घायल हुए। पीड़ितों में 96 आम नागरिक, 80 सिक्योरिटी फोर्स के जवान और 294 मिलिटेंट शामिल हैं। घायलों में 259 आम नागरिक, 50 सिक्योरिटी फोर्स के जवान और 24 मिलिटेंट शामिल हैं।
यह आंकड़ा दिखाता है कि जनवरी की तुलना में सिक्योरिटी फोर्स के जवानों की मौतों में 74 प्रतिशत, आम नागरिकों की मौतों में 32 प्रतिशत और उग्रवादियों की मौतों में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
फरवरी में खैबर पख्तूनख्वा में 53 सुरक्षाकर्मी और छह नागरिक मारे गए, जबकि 35 सुरक्षाकर्मी और 48 नागरिक घायल हुए। इस दौरान प्रांत में तीन आत्मघाती हमले हुए, जिनमें 17 लोगों की जान गई, जिनमें 14 सुरक्षाकर्मी शामिल थे, और 20 लोग घायल हुए।
इस्लामाबाद में एक आत्मघाती हमले में 34 लोगों की मौत हो गई और 165 अन्य घायल हुए। इसके अलावा, पंजाब प्रांत के भक्कर जिले में हुए आत्मघाती हमले में दो पुलिसकर्मियों की मौत हुई और चार अन्य घायल हुए।
जनवरी और फरवरी में इस वर्ष कुल आठ आत्मघाती हमले दर्ज किए गए, जो पूरे 2025 में दर्ज 17 घटनाओं का लगभग आधा है।
पीआईसीएसएस के आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले दो महीनों में कुल 831 संघर्ष-संबंधी मौतें दर्ज की गईं, जिनमें 536 उग्रवादी, 169 नागरिक और 126 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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