पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस पोस्ट पर हमला, एएसआई की मौत
इस्लामाबाद, 4 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान के बजौर जिले की वारा मामोंद तहसील में स्थित बदन पुलिस पोस्ट पर बुधवार को अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग कर दी। हमले में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) दौलत खान की मौत हो गई।
स्थानीय मीडिया ने पुलिस के हवाले से बताया कि हमले के बाद पुलिस ने इलाके को घेर लिया और संदिग्धों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून, ने बताया कि पिछले एक महीने में खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं।
इससे पहले 26 फरवरी को बजौर की खर तहसील के नवाकलाय इलाके में अबाबील पुलिस पेट्रोलिंग टीम पर अज्ञात लोगों ने हमला कर दिया था, जिसमें चार पुलिसकर्मी मारे गए और दो अन्य घायल हो गए। वहीं, 14 फरवरी को वारा मामोंद पुलिस स्टेशन पर अज्ञात बंदूकधारियों की फायरिंग में अतिरिक्त स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) गुल मानो दिन की मौत हो गई थी।
इस बीच, इस्लामाबाद स्थित एक थिंक टैंक की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देशभर में आत्मघाती हमलों में बढ़ोतरी के कारण फरवरी में पाकिस्तान में संघर्ष से जुड़ी मौतों में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
पाकिस्तान के एक और बड़े अखबार डॉन के अनुसार, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (पीआईसीएसएस) की एक रिपोर्ट से पता चला है कि फरवरी में 470 मौतें और 333 घायल हुए। पीड़ितों में 96 आम नागरिक, 80 सिक्योरिटी फोर्स के जवान और 294 मिलिटेंट शामिल हैं। घायलों में 259 आम नागरिक, 50 सिक्योरिटी फोर्स के जवान और 24 मिलिटेंट शामिल हैं।
यह आंकड़ा दिखाता है कि जनवरी की तुलना में सिक्योरिटी फोर्स के जवानों की मौतों में 74 प्रतिशत, आम नागरिकों की मौतों में 32 प्रतिशत और उग्रवादियों की मौतों में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
फरवरी में खैबर पख्तूनख्वा में 53 सुरक्षाकर्मी और छह नागरिक मारे गए, जबकि 35 सुरक्षाकर्मी और 48 नागरिक घायल हुए। इस दौरान प्रांत में तीन आत्मघाती हमले हुए, जिनमें 17 लोगों की जान गई, जिनमें 14 सुरक्षाकर्मी शामिल थे, और 20 लोग घायल हुए।
इस्लामाबाद में एक आत्मघाती हमले में 34 लोगों की मौत हो गई और 165 अन्य घायल हुए। इसके अलावा, पंजाब प्रांत के भक्कर जिले में हुए आत्मघाती हमले में दो पुलिसकर्मियों की मौत हुई और चार अन्य घायल हुए।
जनवरी और फरवरी में इस वर्ष कुल आठ आत्मघाती हमले दर्ज किए गए, जो पूरे 2025 में दर्ज 17 घटनाओं का लगभग आधा है।
पीआईसीएसएस के आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले दो महीनों में कुल 831 संघर्ष-संबंधी मौतें दर्ज की गईं, जिनमें 536 उग्रवादी, 169 नागरिक और 126 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
छह साल में बढ़ी गरीबी और असमानता, पाकिस्तान योजना आयोग की रिपोर्ट में खुलासा
नई दिल्ली, 4 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान के योजना आयोग द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पिछले छह वर्षों के दौरान पाकिस्तान में असमानता और गरीबी दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
यह निष्कर्ष पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा कराए गए 2018-19 और 2024-25 के हाउसहोल्ड इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक सर्वे (एचआईएस) के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें घरेलू आय के स्तर और उसके वितरण की तुलनात्मक समीक्षा की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी दर 2018-19 में 21.9 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई।
कराची से प्रकाशित बिजनेस रिकॉर्डर की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि गरीबी में यह उछाल बेरोजगारी में वृद्धि, आय असमानता के विस्तार और परिवारों की वास्तविक आय में गिरावट का परिणाम है।
योजना आयोग के विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि बेरोजगारी दर 2020-21 में 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 7.1 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि में परिवारों की औसत वास्तविक आय में 27.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों की क्रय शक्ति और जीवन स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि आर्थिक नीतियों में अस्थिरता और गैर-जिम्मेदार निर्णयों ने इस स्थिति को और गंभीर बनाया है।
रिपोर्ट में गरीबी और असमानता में वृद्धि के अन्य प्रमुख कारणों का भी उल्लेख किया गया है। 2019-20 में कोविड-19 महामारी और 2022-23 में आई विनाशकारी बाढ़ ने अर्थव्यवस्था को गहरा आघात पहुंचाया।
इसके अतिरिक्त, अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यक्रमों के तहत सब्सिडी में कटौती, अप्रत्यक्ष करों में वृद्धि और विकास व्यय में भारी कमी की गई, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए योजना मंत्री ने निर्यात-आधारित विकास मॉडल अपनाने, अपेक्षाकृत कम विकसित जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने और संघीय तथा प्रांतीय सरकारों के बीच बेहतर वित्तीय संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की वकालत की, जिसमें नकद हस्तांतरण योजनाएं, लक्षित गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) को प्रोत्साहन देना शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान में जीवन स्तर में आई व्यापक गिरावट का गंभीर संकेत है।
साथ ही, इसमें असमानता कम करने और गरीबी उन्मूलन के लिए एक समग्र और संतुलित विकास रणनीति के विभिन्न घटकों का सुझाव भी दिया गया है। बिजनेस रिकॉर्डर के लेख में उम्मीद जताई गई है कि मौजूदा सरकार इन सिफारिशों को लागू कर आर्थिक स्थिरता और सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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