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PoK Election: शुरुआती दो चरणों की 34 में से 24 सीटें जीतकर PML-N की वापसी तय

इस्लामाबाद, छह अगस्त (एपी) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों के नतीजों में बुधवार को सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने स्पष्ट बढ़त बना ली। यह बढ़त ऐसे समय मिली है, जब पिछले कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं और एक प्रतिबंधित संगठन ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया हैं। क्षेत्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता राजा शकील ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएल-एन समर्थित उम्मीदवारों ने पहले दो चरणों में 34 में से 24 सीट पर जीत हासिल की है।

उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय राजधानी मुजफ्फराबाद में मतदान 56 प्रतिशत से अधिक रहा। शकील ने कहा कि शेष 11 सीट के लिए मतदान 10 अगस्त को होगा, लेकिन पार्टी अगली क्षेत्रीय सरकार बनाने की स्थिति में पहले ही पहुंच चुकी है। इसके साथ ही एक दशक बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सत्ता में वापसी तय मानी जा रही है।

शकील ने बताया कि सुरक्षा चिंताओं और भारी मानसूनी बारिश के कारण चुनाव तीन चरण में कराए जा रहे हैं। बारिश के कारण चुनाव प्रचार प्रभावित हुआ और खुले मैदान में बड़ी जनसभाओं का आयोजन मुश्किल हो गया। क्षेत्रीय सरकार और चुनाव अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा चिंताओं तथा प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) द्वारा चुनाव बहिष्कार की अपील के बावजूद मुजफ्फराबाद सहित कई क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ।

जेएएसी हिंसक प्रदर्शनों के लिए कुख्यात रहा है। नवाज शरीफ ने एक बयान जारी कर विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी। भारत और पाकिस्तान, दोनों कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों का प्रशासन चलाते हैं, लेकिन दोनों ही पूरे कश्मीर पर अपना दावा करते हैं।

रविवार को मतदान से पहले जेएएसी समर्थकों और पुलिस के बीच कई बार झड़पें हुईं। हालांकि स्थानीय लोगों ने बताया कि हिंसा की आशंका के बावजूद उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को मजबूत किया है, क्योंकि लोगों ने कई सप्ताह तक चले विरोध प्रदर्शनों, हिंसा और बहिष्कार अभियान के बावजूद मतदान किया।

विवाद का मुख्य कारण 12 आरक्षित सीट हैं, जो ब्रिटिश शासन समाप्त होने के बाद भारत के हिस्से वाले कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए निर्धारित की गई हैं। जेएएसी का तर्क है कि इन सीटों के कारण पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से बाहर रहने वाले लोगों को असंगत राजनीतिक प्रभाव मिलता है। संगठन इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है।

विवाद उस समय और बढ़ गया, जब जून में क्षेत्र के उच्चतम न्यायालय ने फैसला दिया कि ये सीटें संविधान द्वारा संरक्षित हैं और संवैधानिक संशोधन के बिना इन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता। अधिकारी अक्सर जेएएसी समर्थकों पर चुनाव बाधित करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हैं। उनका यह भी आरोप है कि पाकिस्तानी तालिबान के सदस्य इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो गए थे।

हालांकि जेएएसी ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वर्ष 2023 में गठित जेएएसी कश्मीर के लोगों के लिए अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रहा है। सरकार का कहना है कि उसने संगठन की 38 में से 36 मांग स्वीकार कर ली हैं, जबकि आरक्षित सीटों का मुद्दा केवल विधानसभा के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है।

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USCIS ने अधूरे आव्रजन आवेदन खारिज करने का अधिकार बहाल किया, नए नियम लागू हुए

सागर कुलकर्णी वाशिंगटन, छह अगस्त अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने आव्रजन अधिकारियों का विवेकानुसार यह निर्णय लेने का अधिकार फिर से बहाल कर दिया है कि यदि कोई आवेदक अधूरा आवेदन जमा करता है या पात्रता साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराता, तो उसकी आव्रजन लाभ संबंधी याचिका सीधे खारिज की जा सकती है। पहले की नीति के तहत, यदि किसी आव्रजन अधिकारी ने आवेदन पर अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज मांगे थे, तो आवेदक को 12 सप्ताह का समय दिया जाता था। यह व्यवस्था वीजा, ग्रीन कार्ड, नागरिकता, आव्रजन स्थिति में बदलाव या उसके विस्तार से जुड़े आवेदनों पर लागू थी।

इसके अलावा, यदि साक्ष्य के लिए अनुरोध (आरएफई) या आवेदन खारिज करने के आशय का नोटिस (एनओआईडी) अमेरिका के बाहर डाक से भेजा जाता था, तो जवाब देने की समय-सीमा में 14 दिन और जोड़ दिए जाते थे। यूएससीआईएस ने बुधवार को जारी बयान में कहा, ‘‘आवेदक की जिम्मेदारी है कि वह आवेदन दाखिल करते समय यह साबित करे कि वह मांगे गए आव्रजन लाभ के लिए पात्र है और निर्णय होने तक उसकी पात्रता बनी हुई है।’’ एजेंसी ने कहा कि यदि कोई आवेदक अपनी पात्रता साबित करने में विफल रहता है या आवेदन के पास आवश्यक प्रारंभिक दस्तावेज जमा नहीं करता है, तो यूएससीआईएस बिना आरएफई या एनओआईडी जारी किए भी आवेदन खारिज कर सकता है। नयी नीति तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है और यह लंबित आवेदनों के साथ-साथ नए आवेदनों पर भी लागू होगी।

नयी व्यवस्था के तहत आव्रजन अधिकारी आवश्यक प्रारंभिक दस्तावेजों के अभाव में आवेदन खारिज कर सकते हैं, आवेदन दाखिल करते समय पात्रता स्थापित न होने पर उसे अस्वीकार कर सकते हैं या यदि उन्हें उचित लगे तो अतिरिक्त साक्ष्य मांगने के लिए आरएफई जारी कर सकते हैं। यूएससीआईएस ने विशेष रूप से यह चिंता जताई कि कुछ आवेदक जानबूझकर अधूरे आवेदन दाखिल कर रहे थे ताकि मूल आवेदन पर अंतिम फैसला आने तक वे रोजगार परमिट जैसे अन्य आव्रजन लाभ हासिल कर सकें।

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  Sports

मुख्य कोच Andrew McDonald का बड़ा फैसला, भारत के खिलाफ Test सीरीज से पहले नहीं होगा अभ्यास मैच

ऑस्ट्रेलिया के मुख्य कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने कहा है कि उनकी टीम अगले वर्ष भारत के खिलाफ होने वाली बहुचर्चित बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी टेस्ट श्रृंखला से पहले कोई अभ्यास मैच नहीं खेलेगी। उनका मानना है कि उपमहाद्वीप जैसी परिस्थितियों में छोटा तैयारी शिविर टीम के लिए अधिक उपयोगी साबित होगा। पांच टेस्ट मैचों की यह बहुप्रतीक्षित श्रृंखला 21 जनवरी से नागपुर में शुरू होगी।

मैकडोनाल्ड ने ‘क्रिकेट डॉट कॉम डॉट एयू’ से कहा, ‘‘हमें लगता है कि परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इसलिए हम कोई अभ्यास मैच नहीं खेलेंगे। हमारा पूरा ध्यान ऐसी जगह तैयारी करने पर होगा, जहां भारत जैसी परिस्थितियां मिल सकें।

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उन्होंने बताया, ‘‘ टीम के सामने दो विकल्प हैं। ऑस्ट्रेलिया पहले संयुक्त अरब अमीरात में भी तैयारी कर चुका है और 2023 के भारत दौरे से पहले बेंगलुरु में शिविर लगाया था। फिलहाल टीम प्रबंधन इस बात पर विचार कर रहा है कि खिलाड़ियों की तैयारी के लिए कौन-सा विकल्प सबसे उपयुक्त रहेगा।’’ उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत दौरे के लिए संभावित खिलाड़ियों में से जो खिलाड़ी उससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट श्रृंखला का हिस्सा नहीं होंगे, उन्हें उस दौरान बिग बैश लीग खेलने के बजाय भारत दौरे की तैयारी पर ध्यान देना होगा।

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रिपोर्ट के अनुसार मैथ्यू कुहनेमैन, टॉड मर्फी, कूपर कोनोली, पीटर हैंड्सकॉम्ब और मैथ्यू रेनशॉ भारत दौरे के लिए संभावित खिलाड़ियों में शामिल हैं। मैकडोनाल्ड ने कहा कि न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला के बाद खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। भारत की परिस्थितियों के अनुरूप कुछ अलग कौशल वाले खिलाड़ियों को भी टीम में शामिल किया जा सकता है।

इसलिए जरूरी नहीं कि न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला में शामिल टीम ही भारत दौरे पर जाए। उन्होंने कहा कि कुछ खिलाड़ियों को अतिरिक्त तैयारी की आवश्यकता होगी और इसकी शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में ही कर दी जाएगी। साथ ही बिग बैश लीग और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच संतुलन भी बनाया जाएगा।

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गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत में पिछली बार 2004-05 सत्र में टेस्ट श्रृंखला जीती थी। इसके बाद से वह भारतीय सरजमीं पर कोई टेस्ट श्रृंखला अपने नाम नहीं कर सका है।

Thu, 06 Aug 2026 10:23:00 +0530

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