गांवों में बदलती होली की तस्वीर, फगुआ राग से डीजे कल्चर तक
दो दशक पहले तक गांवों में होली संस्कृति, संगीत और सामूहिक परंपरा का उत्सव थी. बसंत पंचमी से फगुआ राग और गवयों की टोलियां माहौल बनाती थीं. अब पारंपरिक गीतों की जगह डीजे और अश्लील गानों ने ले ली है. होलिका दहन औपचारिक हो रहा है और अपनापन घट रहा है, जिससे होली की मूल भावना खो रही है.
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