चुनाव आयोग ने छह राज्यों में SIR की समयसीमा बढ़ाई:तीसरे चरण में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में हो रहा है SIR
निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नगालैंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्यक्रम में संशोधन किया है। यह बदलाव संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के अनुरोध के बाद किया गया है। निर्वाचन आयोग ने समयसीमा बढ़ाने के बारे में पांच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली को अलग-अलग पत्र लिखे। SIR के तीसरे चरण में हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) हो रहा है। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन होगा। SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। पांच राज्यों में अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित होगी दिल्ली में दावे और आपत्तियां अब 30 अक्टूबर के बजाय 25 नवंबर तक दाखिल की जा सकेंगी। दावों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर से बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दी गई है। अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 26 अक्टूबर से बढ़ाकर 13 नवंबर कर दी गई है। नोटिस जारी करने और दावों के निपटारे की प्रक्रिया अब 25 नवंबर तक चलेगी और अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। मसौदा सूची 31 अगस्त को जारी हुई थी और दावों के निपटारे की समयसीमा पहले 10 नवंबर तय की गई थी। आंध्र प्रदेश और हरियाणा में नोटिस और निपटारे की अवधि अब 20 नवंबर को समाप्त होगी। नगालैंड में यह अवधि 25 नवंबर और तेलंगाना में 26 नवंबर तक होगी। इन चारों राज्यों में अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। विभिन्न कारणों से एसआईआर का कार्यक्रम पहले भी कई बार बढ़ाया जा चुका है। 3 राज्यों-UT को छोड़कर पूरे देश में पूरा होगा SIR SIR के तीसरे फेज के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में SIR प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। तीनों बचे हुए राज्यों में खराब मौसम और जनगणना के कारण SIR के शेड्यूल की घोषणा बाद में की जाएगी। तीसरे फेज में SIR वाले राज्यों में महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा वोटर हैं। दादरा और नगर हवेली एवं दमन-दीव में वोटरों की संख्या सबसे कम है। SIR फेज 1-2 : 10 राज्य, 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हुए चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। पहले फेज के तहत, बिहार में सबसे पहले SIR हुआ था। दूसरे फेज के तहत 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हुआ। चुनाव आयोग ने बताया कि पहले दो फेज में करीब 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया था। इस दौरान 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA प्रक्रिया में शामिल हुए। SIR: भारत में 21 साल बाद हो रहा वोटर लिस्ट का रिविजन SIR (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है, जिसमें वोटर लिस्ट की पूरी तरह से जांच और अपडेट किया जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि वोटर लिस्ट में सिर्फ पात्र और सही मतदाताओं के नाम हों। भारत में SIR करीब 21 साल बाद हो रहा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इससे पहले देशभर में ऐसा बड़ा अभियान 2002 से 2004 के बीच चला था। चुनाव आयोग ने बताया था कि देश में SIR की प्रक्रिया आठवीं बार हो रही है। -------------- ये खबर भी पढ़ें... एमपी-यूपी सहित 17 राज्यों-UT में वोटर लिस्ट अपडेट होगी:चुनाव आयोग का आदेश चुनाव आयोग ने गुरुवार को 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) कराने का निर्देश दिया है। इनमें मध्यप्रदेश, यूपी, पंजाब , गोवा और उत्तराखंड भी शामिल हैं, यहां अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। पूरी खबर पढ़ें…
किरण रिजिजू बोले- नहीं पता था ये इतने खतरनाक हैं:नसीरुद्दीन शाह के बयान पर कसा तंज, कहा- उनके असली चरित्र का देर से पता चला
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्टर नसीरुद्दीन शाह के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वह अब तक नसीरुद्दीन शाह को केवल एक कलाकार के रूप में जानते थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनकी सोच ऐसी है। गुरुवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत में रिजिजू ने कहा- मुझे नहीं पता था कि नसीरुद्दीन शाह की सोच इस तरह की है। मैं उन्हें सिर्फ एक कलाकार समझता था। मुझे लगता था कि वह एक अच्छे और सभ्य कलाकार हैं। लेकिन अब पता चला कि वह खुद भी मानसिक रूप से नक्सल हैं।” इससे पहले बुधवार को रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी नसीरुद्दीन शाह की आलोचना की थी। उन्होंने लिखा था कि वह शाह को एक साधारण अभिनेता समझते थे और उनका सम्मान करते थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वह एक खतरनाक शहरी ‘दिमागी नक्सल’ हैं। अशोक पंडित ने कहा- शाह का यह व्यवहार उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहा है फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी नसीरुद्दीन शाह के बयान की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि शाह अपनी हताशा और असुरक्षा की भावना के कारण इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका सार्वजनिक व्यवहार उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। पंडित ने कहा कि कैमरे पर शाह के व्यवहार से उनकी हताशा दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनेता को मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। ये अशोक पंडित के आरोप और निजी टिप्पणियां हैं। नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था? नसीरुद्दीन शाह ने मंगलवार को अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वे कहते हैं- "मैं फख्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं। दिमागी नक्सल के अलावा मालूम नहीं क्या-क्या लकब (उपनाम) दिए हैं चौकीदार ने मुझ जैसे लोगों को, एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और मालूम नहीं क्या-क्या।" उन्होंने आगे कहा, "टुकड़े-टुकड़े गैंग अगर इस मुल्क में कोई है, तो वो ये नाजायज हुकूमत है और मैं इस हुकूमत से एक सवाल पूछना चाहता हूं। और क्या-क्या करोगे तुम? हमारे मुल्क के नौजवानों की हिम्मत को तोड़ने के लिए, शिक्षा संस्थानों को बर्बाद करने के लिए और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए, कितना करोगे? तुम और तुमने अपने इर्द-गिर्द जो बेवकूफ, बेईमानों की पलटन इकट्ठी की है, कहां तक जाओगे?" उन्होंने यह भी कहा कि पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU), फिर सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और अब जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों पर जो जुल्म किया जा रहा है, वो याद रखा जाएगा। सब याद रखा जाएगा। नसीरुद्दीन शाह ने अपने वीडियो में मीडिया और बीजेपी आईटी सेल के लिए अपशब्दों का भी प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि तमाम कोशिशों के बावजूद देश के युवाओं का हौसला नहीं टूटेगा, शिक्षा संस्थान बर्बाद नहीं होंगे और लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ेगा। वीडियो के आखिर में उन्होंने देश के युवाओं को सलाम किया और कहा कि उनकी दुआएं उनके साथ हैं। नसरुद्दीन शाह के बयान पर नेताओं के बयान केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा- नसीरुद्दीन शाह एक अच्छे फिल्म एक्टर हैं, जिन्होंने कई आर्टिस्टिक फिल्मों में भी काम किया है और उनमें समाज के लिए सोच है। हालांकि, उनकी सोच नक्सली जैसी नहीं होनी चाहिए। उन्हें समाज की भलाई के लिए सरकार को सुझाव देने का हक है, लेकिन उन्हें BJP की बुराई करने का कोई हक नहीं है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा- नसीरुद्दीन शाह इन दिनों जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिस तरह से पहले उनके बयान आए हैं, देश विरोधी बयान आए हैं, और पाकिस्तान के पक्ष में बयान आए हैं, और इस बार जिस तरह से उन्होंने पश्चिम बंगाल के बारे में बात की है, उससे पता चलता है कि उनकी सोच कैसे एक ऐसी सोच को बढ़ावा दे रही है जो देश में अराजकता पैदा करना चाहती है। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा- अभिनेता ने सिर्फ अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त किए हैं। नसीरुद्दीन शाह बहुत बड़े और सम्मानित अभिनेता हैं। भाजपा को लोगों का विचार व्यक्त करना पसंद नहीं है। यही वजह है कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उनके बयान की आलोचना की है। केरलम से कांग्रेस की राज्यसभा सांसद जेबी माथेर ने कहा- जो भी व्यक्ति ऐसी बात कहता है जो भाजपा को पसंद नहीं आती या उनकी नीतियों से मेल नहीं खाती, उसे पार्टी तुरंत अलग-अलग नाम दे देती है। सरकार की आलोचना करने वालों को 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' या 'अर्बन नक्सल' कहना भाजपा की पुरानी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। बीजेपी के लिए अपशब्द कहे थे; झूठी पार्टी बताया था इससे पहले नसीरुद्दीन शाह ने शनिवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो शेयर किया था। अभिनेता ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत के बाद बीजेपी उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जो उसकी विचारधारा और नीतियों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के छात्रों का मुद्दा भी उठाया। शाह ने वीडियो में कहा था कि संस्थान के छात्र प्रशासन से जवाब मांग रहे थे। इसके बदले उन्हें कारण बताओ नोटिस दिए गए, निगरानी में रखा गया और धमकियां दी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को हॉस्टल खाली करने के लिए कहा गया है। अभिनेता ने बीजेपी पर आरोप लगाया था कि वह अपने पक्ष में प्रचार को बढ़ावा दे रही है और असहमत लोगों को डराने या उनकी सोच बदलने की कोशिश कर रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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