कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 प्रतिशत निर्धारित की ब्याज दर
नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने सोमवार को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के लिए ब्याज दरों का ऐलान किया। सरकार एजेंसी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर निर्धारित की है।
यह लगातार दूसरा साल है जब ईपीएफओ ने ईपीएफ के लिए ब्याज दर को स्थिर रखा है।
ईपीएफ के लिए ब्याज दर तय करने का फैसला ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (सीबीटी) की ओर से किया जाता है।
ईपीएफओ द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दरों पर सीबीटी के फैसले को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। सरकार की मंजूरी के बाद ईपीएफओ के 7 करोड़ सब्सक्राइबर्स के खाते में ब्याज को क्रेडिट कर दिया जाएगा। इससे पहले ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 25 में भी ब्याज दरों को 8.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था।
इससे पहले के वर्षों में ब्याज दरों के कई दशकों के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इजाफा किया गया था।
वित्त वर्ष 24 में ब्याज दर को मामूली रूप से बढ़ाकर 8.25 प्रतिशत कर दिया था, जो कि वित्त वर्ष 23 में 8.15 प्रतिशत था।
वित्त वर्ष 22 और वित्त वर्ष 21 में ईपीएफओ ने ईपीएफ के लिए ब्याज दर 8.10 प्रतिशत निर्धारित की थी, जो कि करीब चार दशकों का निचला स्तर था। इससे पहले वित्त वर्ष 1978 में ब्याज दर 8 प्रतिशत थी। वहीं, ब्याज दर वित्त वर्ष 20 में 8.5 प्रतिशत थी और वित्त वर्ष 19 में 8.65 प्रतिशत थी।
ईपीएफ जमा पर ब्याज की गणना मासिक आधार पर की जाती है, लेकिन यह ग्राहकों के खातों में वित्तीय वर्ष के अंत में जमा किया जाता है।हालांकि, जो खाते 36 महीनों तक निष्क्रिय रहते हैं, उन पर कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलता क्योंकि उन्हें निष्क्रिय माना जाता है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों में तेजी के चलते जनवरी में औद्योगिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रही
नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने सोमवार को बताया कि जनवरी में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में साल-दर-साल आधार पर 4.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र में 4.8 प्रतिशत और बिजली क्षेत्र में 5.1 प्रतिशत की बढ़त के कारण हुई।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का त्वरित अनुमान जनवरी 2025 में 161.6 के मुकाबले 169.4 पर है।
जनवरी 2026 में खनन, विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों के सूचकांक क्रमशः 157.2, 167.2 और 212.1 रहे।
विनिर्माण क्षेत्र के अंतर्गत एनआईसी 2 (राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण 2) के दो अंकीय स्तर पर 23 में से 14 उद्योग समूहों ने जनवरी 2026 में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की।
जनवरी 2026 में सबसे अधिक योगदान देने वाले तीन उद्योग समूह रहे - बुनियादी धातुओं का निर्माण (13.2 प्रतिशत), मोटर वाहनों, ट्रेलरों और सेमी-ट्रेलरों का निर्माण (10.9 प्रतिशत) और अन्य गैर-धात्विक खनिज उत्पादों का निर्माण (9.9 प्रतिशत)।
उपयोग आधारित वर्गीकरण के अनुसार, जनवरी 2026 में प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक 167.9, पूंजीगत वस्तुओं का 124.4, मध्यवर्ती वस्तुओं का 182.8 और आधारभूत संरचना एवं निर्माण वस्तुओं का 227.7 रहा।
इसी प्रकार उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का सूचकांक 138.2 और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं का 160.7 दर्ज किया गया।
इससे पहले दिसंबर 2025 में भारत का औद्योगिक उत्पादन 7.8 प्रतिशत बढ़ा था, जो दो वर्षों से अधिक समय में सबसे ऊंचा स्तर था। यह वृद्धि विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों में व्यापक मजबूती के कारण हुई थी।
यह लगातार दूसरा महीना था जब औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में मजबूत सालाना वृद्धि दर्ज की गई। इससे पहले नवंबर 2025 में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
दिसंबर में विनिर्माण क्षेत्र में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। उस महीने 23 में से 16 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दिखाई थी। शीर्ष तीन योगदानकर्ताओं में बुनियादी धातुओं का निर्माण, मोटर वाहन, फार्मास्यूटिकल्स और रसायन उद्योग शामिल थे।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation















.jpg)







