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पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास ने कांसुलेट पर हमलों के बाद वीजा अपॉइंटमेंट और अन्य सेवाएं कैंसिल की

इस्लामाबाद, 2 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कराची में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। इस बीच इस्लामाबाद में स्थित अमेरिकी दूतावास ने सोमवार को ऐलान किया है कि पिछले दिन हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद वीजा अपॉइंटमेंट के साथ-साथ अमेरिकी नागरिक सेवाएं भी आज के लिए कैंसिल कर दी गई हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिकी दूतावास ने कहा, आज, 2 मार्च को इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास और कराची और लाहौर में अमेरिकी कांसुलेट जनरल में यूएस वीजा और अमेरिकी नागरिक सेवाओं के सभी अपॉइंटमेंट कैंसिल कर दिए गए हैं।

बता दें, रविवार को कराची और लाहौर में अमेरिकी कांसुलेट जनरल के बाहर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। इसके अलावा, इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास और पेशावर में कांसुलेट जनरल में भी प्रदर्शन की योजना बनाई गई।

दरअसल, खामेनेई की मौत को लेकर शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में प्रदर्शन करने के लिए बाहर आए। अमेरिकी दूतावास ने पाकिस्तान में अमेरिकी नागरिकों को लोकल खबरों पर नजर रखने और व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर सलाह दी है।

इस बीच, पाकिस्तान के बड़े अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे पाकिस्तान में झड़पों में कम से कम 23 प्रदर्शनकारी मारे गए। इनमें कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट के बाहर 10 लोग और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान के स्कार्दू जिले में 11 लोग शामिल हैं। गिलगित बाल्टिस्तान में भीड़ ने यूएन ऑफिस में आग लगा दी, जबकि इस्लामाबाद में दो लोग मारे गए।

सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो में कराची में अमेरिकी कांसुलेट के दरवाजे और खिड़कियां तोड़कर आग लगा दी गईं और कॉन्सुलेट परिसर के बाहर अफरा-तफरी का माहौल दिखा, जिसमें प्रदर्शनकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे और सिक्योरिटी वालों से भिड़ रहे थे।

प्रदर्शनकारियों को खिड़कियां तोड़ते और गार्ड एरिया पर लाठियों से हमला करते देखा गया। इसके बाद लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों को जोरदार जवाब दिया। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पीओजीबी के स्कार्दू और गिलगित इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने भारत और पाकिस्तान में यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री ऑब्जर्वर ग्रुप (यूएनएमओजीआईपी) के ऑफिस में आग लगा दी।

प्रदर्शनकारियों ने एक स्कूल, पुलिस अधीक्षक के ऑफिस और आगा खान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम (एकेआरएसपी) के ऑफिस में भी आग लगा दी। पीओजीबी पुलिस ने स्कार्दू में कर्फ्यू लगाने का ऐलान किया है।

--आईएएनएस

केके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Holi 2026: अनोखा गांव, जहां 150 साल से नहीं खेली गई है होली, जानिए क्या है इसके पीछे की कहानी?

Holi 2026: भारत में होली का नाम लेते ही रंगों, गुलाल और खुशियों की तस्वीर सामने आ जाती है. फाल्गुन का महीना आते ही हर तरफ उत्सव का माहौल बन जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव भी है, जहां होली मनाना पूरी तरह वर्जित है? 

यह अनोखा गांव है खरहरी गांव, जो झांसी जिला में स्थित है. यहां पिछले करीब 150 सालों से न तो होली खेली जाती है और न ही होलिका दहन होता है. आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी.

क्या है 150 साल पुरानी घटना?

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, करीब डेढ़ सौ साल पहले होली के दिन गांव में एक बड़ा हादसा हुआ था. होलिका दहन के दौरान आग अचानक फैल गई. इस आग की चपेट में कई घर आ गए. गांव को भारी नुकसान झेलना पड़ा. इस हादसे के कुछ समय बाद गांव के एक प्रतिष्ठित परिवार में अचानक मौत हो गई. गांव वालों ने इन घटनाओं को अशुभ माना. इसके बाद पंचायत ने सामूहिक फैसला लिया कि भविष्य में गांव की सीमा के अंदर कभी भी होली नहीं मनाई जाएगी.

होलिका दहन पर पूरी तरह रोक

जहां देशभर में होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, वहीं खरहरी गांव में यह परंपरा पूरी तरह बंद है. न लकड़ियां इकट्ठा की जाती हैं. न कोई धार्मिक आयोजन होता है. गांव उस दिन बिल्कुल सामान्य रहता है.

फिर त्योहार कैसे मनाते हैं लोग?

गांव के लोग इस परंपरा का सम्मान करते हैं. कुछ साल पहले गांव में इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश की गई थी. उसी दौरान गांव में बीमारी फैलने की बातें सामने आईं. इसके बाद लोगों का विश्वास और भी मजबूत हो गया कि यह नियम गांव की सुरक्षा से जुड़ा है.

खरहरी गांव आज भी अपनी 150 साल पुरानी परंपरा को पूरी आस्था के साथ निभा रहा है. यह गांव दिखाता है कि भारत में त्योहार सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि विश्वास और इतिहास से भी जुड़े होते हैं.

यह भी पढ़ें: Holi 2026: होली पर घर में बनाएं ये 5 तरह की रंग-बिरंगी मिठाइयां, त्योहार के मजे को कर देगी दोगुना

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योगेश कथुनिया: माता-पिता डॉक्टर बनाना चाहते थे, बेटे ने डिस्कस थ्रो में देश को दिलाया पदक

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। योगेश कथुनिया देश के एक प्रसिद्ध पैराएथलीट हैं। उनके माता-पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन योगेश ने खेल के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाया है और देश को पैरालंपिक में रजत पदक दिलाया है। Mon, 2 Mar 2026 15:06:49 +0530

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