स्ट्रेटेजिक एयर कॉरिडोर बंद होने से विमान सेवाएं बाधित, दुनिया भर में सैकड़ों फ्लाइट्स कैंसिल
नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते मिलिट्री तनाव के कारण वेस्ट एशिया में बड़े पैमाने पर एयरस्पेस बंद होने से ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भारी दबाव है, जिससे दुनिया भर में फ्लाइट ऑपरेशन्स में रुकावट आई है।
रविवार तक खास एयर कॉरिडोर पर इमरजेंसी सेफ्टी पाबंदियां लगाए जाने के बाद अलग-अलग इलाकों की एयरलाइंस को फ्लाइट्स कैंसिल करने या उनका रूट बदलने पर मजबूर होना पड़ा है।
एविएशन इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में 700 से ज्यादा फ्लाइट्स पहले ही कैंसिल हो चुकी हैं, जबकि सैकड़ों दूसरी फ्लाइट्स को युद्ध वाले इलाकों से बचने के लिए लंबे रूट पर भेजा गया है। जो शुरू में कम सेफ्टी उपायों के तौर पर शुरू हुआ था, वह अब एक बड़े ऑपरेशनल संकट में बदल गया है।
इंटरनेशनल एविएशन के लिए सबसे जरूरी ट्रांजिट इलाकों में से एक, वेस्ट एशिया के बड़े हिस्से या तो सिविलियन एयरक्राफ्ट के लिए पूरी तरह से बंद हैं या कड़े नेविगेशन कंट्रोल के तहत चल रहे हैं। ईरान और इजरायल समेत कई देशों का एयरस्पेस प्रभावित हुआ है, जिससे नॉर्मल फ्लाइट मूवमेंट बहुत कम हो गया है।
दुबई, अबू धाबी और दोहा समेत गल्फ इलाके के बड़े एविएशन हब ने भी ट्रैफिक रोक दिया है, जिससे देरी हो रही है जो दुनिया भर के एयरलाइन नेटवर्क में फैल रही है। एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका को जोड़ने वाली फ्लाइट्स पर खास तौर पर असर पड़ा है, क्योंकि इनमें से कई रूट मिडिल ईस्ट से होकर आसानी से गुजरने पर निर्भर हैं।
गल्फ ट्रांजिट रूट पर बहुत ज्यादा निर्भर होने के कारण इंडियन एयरलाइंस सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इंडिगो ने तीन दिन में 350 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल कर दी हैं।
एयरलाइन ने 1 मार्च को 166 फ्लाइट्स कैंसिल कीं, इसके बाद 2 मार्च को 162 और 3 मार्च को 43 फ्लाइट्स कैंसिल कीं। ये कैंसिलेशन उसके नॉर्मल रोजाना के ऑपरेशन का लगभग 7 से 8 परसेंट है, जो आमतौर पर 2,100 से 2,200 फ्लाइट्स के बीच होता है।
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस समेत दूसरी इंडियन कैरियर्स ने भी सिक्योरिटी एडवायजरी और एयरस्पेस पर रोक के बाद गल्फ और वेस्ट एशिया के लिए कई सर्विस सस्पेंड कर दी हैं या उनका रूट बदल दिया है।
दुनिया भर में इस रुकावट ने बड़ी इंटरनेशनल एयरलाइन्स पर भी दबाव डाला है। एमिरेट्स जैसी गल्फ कैरियर्स ने फ्लाइट्स कैंसिल कर दी हैं या उनका रूट बदल दिया है, जबकि लुफ्थांसा जैसे यूरोपियन ऑपरेटर्स ने पैसेंजर की सुरक्षा पक्का करने के लिए शेड्यूल में बदलाव किया है।
एयरक्राफ्ट को लंबे दूसरे रूट लेने पड़ रहे हैं। इससे एयरलाइन्स के लिए फ्लाइट का समय, फ्यूल का इस्तेमाल और कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ गई है, जिससे ऐसे समय में फाइनेंशियल स्ट्रेस बढ़ गया है जब इंडस्ट्री अभी भी पहले के ग्लोबल झटकों से उबर रही है।
--आईएएनएस
पीएसके
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत जैव-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा : डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारत जैव-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए तैयारी कर रहा है, जहां जैव प्रौद्योगिकी विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा और सतत विकास के भविष्य को आकार देगी।
केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित बीआरआईसी-राजीव गांधी जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (बीआरआईसी-आरजीसीबी) में अत्याधुनिक पुनर्संयोजित कोशिकाओं और सेंसरों के लिए केंद्रीय सुविधा का उद्घाटन करने के बाद यह बयान दिया।
उन्होंने कहा, यह नई सुविधा औषधि खोज के साथ-साथ चिकित्सा और कृषि जीनोमिक्स में भारत की क्षमताओं को मजबूत करेगी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार संभाल रहे डॉ. जितेंद्र सिंह ने संस्थान में एक समर्पित जीएमपी सुविधा की आधारशिला भी रखी।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रो. वी.पी.एन. नाम्पूरी द्वारा लिखित पुस्तक क्वांटम फिजिक्स: वन हंड्रेड मैजिकल इयर्स का विमोचन किया।
बीआरआईसी-आरजीसीबी के अक्कुलम परिसर में वैज्ञानिकों, छात्रों और उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जैव प्रौद्योगिकी को सशक्त नीतिगत समर्थन मिला है।
सिंह ने बताया, “इससे भारत को वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरने में मदद मिली है।”
हाल ही में शुरू की गई बायोई3 नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है जिन्होंने जैव विनिर्माण और जैव-आधारित उद्योगों की ओर वैश्विक बदलाव को देखते हुए अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार पर केंद्रित एक समर्पित जैव प्रौद्योगिकी नीति लागू की है।
इस क्षेत्र की वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में लगभग सोलह गुना बढ़ गई है।
यह लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 166 अरब डॉलर हो गई है और आने वाले वर्षों में इसके 300 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
उन्होंने आगे कहा कि जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की संख्या 2014 में लगभग 50-70 से बढ़कर आज 11,000 से अधिक हो गई है - जो नीतिगत सुधारों और वित्तीय सहायता, जिसमें डीप-टेक स्टार्टअप के लिए पहल भी शामिल है, द्वारा समर्थित एक मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती है।
केंद्रीय पुनर्संयोजक कोशिका एवं सेंसर सुविधा के बारे में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि यह वर्षों के निरंतर अनुसंधान समर्थन का प्रतीक है।
इस सुविधा में दीर्घकालिक सरकारी वित्त पोषित कार्यक्रमों के माध्यम से विकसित इंजीनियर पुनर्संयोजक कोशिकाओं और उन्नत स्क्रीनिंग प्रणालियों का एक बड़ा समूह मौजूद है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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