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भारत जैव-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारत जैव-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए तैयारी कर रहा है, जहां जैव प्रौद्योगिकी विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा और सतत विकास के भविष्य को आकार देगी।

केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित बीआरआईसी-राजीव गांधी जैव प्रौद्योगिकी केंद्र (बीआरआईसी-आरजीसीबी) में अत्याधुनिक पुनर्संयोजित कोशिकाओं और सेंसरों के लिए केंद्रीय सुविधा का उद्घाटन करने के बाद यह बयान दिया।

उन्होंने कहा, यह नई सुविधा औषधि खोज के साथ-साथ चिकित्सा और कृषि जीनोमिक्स में भारत की क्षमताओं को मजबूत करेगी।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार संभाल रहे डॉ. जितेंद्र सिंह ने संस्थान में एक समर्पित जीएमपी सुविधा की आधारशिला भी रखी।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रो. वी.पी.एन. नाम्पूरी द्वारा लिखित पुस्तक क्वांटम फिजिक्स: वन हंड्रेड मैजिकल इयर्स का विमोचन किया।

बीआरआईसी-आरजीसीबी के अक्कुलम परिसर में वैज्ञानिकों, छात्रों और उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जैव प्रौद्योगिकी को सशक्त नीतिगत समर्थन मिला है।

सिंह ने बताया, “इससे भारत को वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरने में मदद मिली है।”

हाल ही में शुरू की गई बायोई3 नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है जिन्होंने जैव विनिर्माण और जैव-आधारित उद्योगों की ओर वैश्विक बदलाव को देखते हुए अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार पर केंद्रित एक समर्पित जैव प्रौद्योगिकी नीति लागू की है।

इस क्षेत्र की वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में लगभग सोलह गुना बढ़ गई है।

यह लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 166 अरब डॉलर हो गई है और आने वाले वर्षों में इसके 300 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

उन्होंने आगे कहा कि जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की संख्या 2014 में लगभग 50-70 से बढ़कर आज 11,000 से अधिक हो गई है - जो नीतिगत सुधारों और वित्तीय सहायता, जिसमें डीप-टेक स्टार्टअप के लिए पहल भी शामिल है, द्वारा समर्थित एक मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती है।

केंद्रीय पुनर्संयोजक कोशिका एवं सेंसर सुविधा के बारे में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि यह वर्षों के निरंतर अनुसंधान समर्थन का प्रतीक है।

इस सुविधा में दीर्घकालिक सरकारी वित्त पोषित कार्यक्रमों के माध्यम से विकसित इंजीनियर पुनर्संयोजक कोशिकाओं और उन्नत स्क्रीनिंग प्रणालियों का एक बड़ा समूह मौजूद है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अफगानिस्तान ने बगराम एयरबेस पर नाकाम की पाक‍िस्‍तान की साजिश, हवाई हमलों का द‍िया करारा जवाब

काबुल, 1 मार्च (आईएएनएस)। अफगानिस्तान ने दावा क‍िया कि उसने बगराम एयरबेस पर पाक‍िस्‍तानी सेना की ओर से क‍िए गए हवाई हमले की कोशिश को नाकाम कर दिया है।

पझवोक अफगान न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल परवन में पुलिस मुख्‍यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि पाकिस्तानी सेना के कई फाइटर जेट्स ने सुबह करीब पांच बजे बगराम एयरबेस के एयरस्पेस में हवाई हमला क‍िया।

प्रोविंशियल पुलिस हेडक्वार्टर ने कहा कि बगराम की बहादुर रक्षा और वायु सेनाओं की तत्काल और पेशेवर प्रतिक्रिया से, जिको वन और टू माइल डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया और दुश्मन की हरकतों को बेअसर कर एक जरूरी और निर्णायक जवाब दिया गया।

इलाके में किसी के हताहत होने या सामान के नुकसान की खबर नहीं है और स्थिति पूरी तरह से सिक्योरिटी और डिफेंस फोर्स के कंट्रोल में है।

पझवोक अफगान न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय ने कहा कि अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करना एक मौलिक और गैर-परक्राम्य जिम्मेदारी है। यदि देश की भूमि, जनता या मूल्यों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है तो उसके ल‍िए निर्णायक और कानूनी जवाब की चेतावनी भी दी गई।

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी सेनाओं ने जवाबी हमलों के बाद पाकिस्तान की चार सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया।

डिफेंस मिनिस्ट्री के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान 32 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।

अफगानिस्तान की खामा प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने झड़पों के दौरान दो पाकिस्तानी ड्रोन मार गिराने का भी दावा किया। बताया गया कि ये हमले पाकिस्तान के पक्तिया, कंधार, खोस्त और नंगरहार प्रांतों में हुए।

27 फरवरी को, अफगानिस्तान ने 21 फरवरी को नंगरहार और पक्तिता में इस्लामाबाद के एयरस्ट्राइक के जवाब में डूरंड लाइन पर पाकिस्तानी आर्मी पोस्ट और मिलिट्री सेंटर पर हमले किए।

अफगानिस्तान के हमलों के बाद पाकिस्तान ने “ऑपरेशन गजब लिल-हक” शुरू किया। पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक डॉन के अनुसार, यह उसने कई बॉर्डर सेक्टर में अफगान सेना की बिना उकसावे की फायरिंग के जवाब में किया।

पाकिस्तान एयर फोर्स (पीएफ) ने काबुल, कंधार और पक्तिया में मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले क‍िए।

हाल के महीनों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार हमलों और आतंकवादी समूहों को शरण देने के आरोप लगाते रहे हैं।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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