ईरान के नए सुप्रीम कमांडर का ऐलान कर दिया गया है। अली रजा अराफी कार्यकारी लीडर बनाए गए हैं। अली रजा अराफी को अभी कार्यकारी लीडर बनाया गया है। खामनई की मौत के बाद अब कमान इनके हाथों में है। अब इजराइल और अमेरिका से किस तरीके से निपटना है इसकी रणनीति अब यह बनाते हुए नजर आएंगे। ईरानी सेना का यह स्टेटमेंट बताता है कि मिडिल ईस्ट में जारी जंग अयातुल्लाह अली खामनेई की हत्या के साथ खत्म नहीं हुई। यह अभी और भी गंभीर होने वाली है। अमेरिका इसराइल की बमबारी में खामई की मौत की पुष्टि के बाद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर्स ने यह स्टेटमेंट जारी किया। हमारे दुश्मनों को अब पछताना पड़ेगा कि हमने ईरान पर हमला कर कितनी बड़ी गलती की। हम ऐसे हथियारों से उन्हें निशाना बनाएंगे जिन्हें आज तक दुनिया ने नहीं देखा।
कमांडर के बयान के फौरन बाद इजराइल से लेकर सऊदी अरब, बहरीन, क़तर, यूएई और इराक के अमेरिकी मिलिट्री बेस पर धनाधन रॉकेट और ड्रोन बरसने लगे। ईरान के नए ठिकानों पर हमले का दावा इजराइली एजेंसियों ने किया। लेकिन ईरान के पलटवार ने अमेरिका में खलबली मचा दी। अमेरिकी सीक्रेट एजेंसियों ने सभी पूर्व राष्ट्रपतियों की सुरक्षा बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास वाइट हाउस का सुरक्षा घेरा अब और सख्त हो चुका है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीक्रेट बंकर में ले जाया गया है। तो वहीं ईरानी सेना का कहना है कि उनके पहले टारगेट पर नेतन्याहू ही हैं।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई
अयातुल्ला के दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में मशहद में हुआ। प्रभावशाली शिक्षकों द्वारा उन्हें प्रशिक्षित किया गया। इसके साथ ही मोजतबा ने धर्मशास्त्र का अध्ययन किया और अपने पिता की राह पर चलते हुए मौलवी बन गए थे। वो आज भी ईरान के सबसे बड़े इस्लामी मदरसा क़ोम सेमिनरी में धर्मशास्त्र पढ़ाते हैं। मोजतबा खामेनेई काफी हद तक लोगों की नजरों से दूर रहे हैं। हालांकि पिछले दो वर्षों में तेहरान में उनका महत्व बढ़ा है। मोजतबा खामेनेई ईरानी राजनीति में अधिक सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने शासन में निर्णय लेने में भूमिका निभाई है। 2005 और 2009 में हुए चुनावों में मोजतबा खामेनेई ने महमूद अहमदीनेजाद का समर्थन किया। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने 2009 में राष्ट्रपति की जीत में भूमिका निभाई थी और कथित तौर पर चुनाव के बाद ईरान में भड़के विरोध प्रदर्शनों को दबाया था। हालाँकि, अहमदीनेजाद द्वारा मोजतबा पर सरकारी खजाने से धन के गबन का आरोप लगाने के बाद दोनों के बीच संबंधों में खटास आ गई। 2021 में मोजतबा खामेनेई को अयातुल्ला की उपाधि दी गई, जो ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में सेवा करने के लिए एक संवैधानिक आवश्यकता है।
विशेषज्ञों की सभा
साल 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद से अब तक सिर्फ़ दो लोग सर्वोच्च नेता के पद तक पहुँचे हैं। इनमें से पहले ईरानी गणतंत्र के संस्थापक अयातुल्लाह रुहोल्ला ख़ुमैनी थे और दूसरे उनके उत्तराधिकारी अयातोल्लाह अली ख़ामेनेई हैं। सर्वोच्च नेता ईरान की सशस्त्र सेनाओं का प्रधान सेनापति होता है। सर्वोच्च नेता के अलावा ईरान में संसद और विशेषज्ञों की समिति भी है। ईरान में 290 सदस्यों वाली संसद मजलिस को हर चार सालों में आम चुनाव के माध्यम से चुना जाता है। विशेषज्ञों की समिति 88 सदस्यों की मज़बूत संस्था है, जिसमें इस्लामिक शोधार्थी और उलेमा शामिल होते हैं। इस संस्था का काम सर्वोच्च नेता की नियुक्ति से लेकर उनके प्रदर्शन पर नज़र रखना होता है।
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मौजूदा चैंपियन भारतीय टीम ने टॉस जीतकर रविवार को आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप के सुपर आठ के करो या मरो वाले मुकाबले में दो बार की चैंपियन वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले फील्डिंग करने का फैसला किया। यह रोमांचक सुपर आठ मुकाबला कोलकाता के प्रतिष्ठित ईडन गार्डन्स में खेला जा रहा है। भारत और वेस्टइंडीज के बीच इस रोमांचक मुकाबले का विजेता दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के साथ सेमीफाइनल में पहुंचेगा। टी20 विश्व कप के इतिहास में भारत और वेस्टइंडीज के बीच चार मैच खेले जा चुके हैं। भारतीय टीम ने तीन मैच जीते हैं, जबकि वेस्टइंडीज ने एक मैच जीता है। कैरेबियन टीम ने 2009, 2010 और 2016 संस्करणों में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर दबदबा बनाया था। भारत की एकमात्र जीत 2014 में आई थी, जब उनके गेंदबाजों का प्रदर्शन निर्णायक रहा था। टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत और वेस्टइंडीज 30 बार एक-दूसरे के खिलाफ खेल चुके हैं। भारत ने 19 बार जीत हासिल की है, जबकि 10 बार हार का सामना करना पड़ा है। एक मैच का कोई नतीजा नहीं निकला। वेस्ट इंडीज और भारत कोलकाता में आमने-सामने होंगे, जो मुंबई में खेले गए 2016 टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल मुकाबले की याद दिलाएगा।
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