त्रिदोष संतुलन से लेकर वजन नियंत्रण तक, पोषक तत्वों से भरपूर सुपरफूड ये पीला दाना
नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। पोषक तत्वों से भरपूर मेथी दाना को आयुर्वेद में अमृत के समान माना गया है। इसके छोटे-छोटे पीले बीजों में सेहत सुधारने की अद्भुत शक्ति छिपी रहती है। यह शरीर के तीनों दोषों (वात, पित्त और कफ) का नाश कर वजन नियंत्रण में भी कारगर है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, मेथी त्रिदोषनाशक है, यानी यह वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करता है। मेथी सुपरफूड से कम नहीं है। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी6 और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं।
वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि मेथी के बीजों में सैपोनिन और फेनोलिक कंपाउंड्स सूजन कम करने, ब्लड शुगर नियंत्रित करने और मेटाबॉलिज्म बेहतर बनाने में मदद करते हैं। रात भर मेथी के दानों को भिगोने पर उनके पोषक तत्व पानी में घुल जाते हैं। सुबह खाली पेट यह पानी पीने से ये तत्व शरीर में आसानी से अवशोषित हो जाते हैं।
वहीं, आयुर्वेद में बासी मुंह मेथी का पानी पीने की सलाह दी जाती है। यह सरल घरेलू उपाय कई गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करने में सक्षम है। सबसे पहले यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। पेट की गैस, एसिडिटी, कब्ज जैसी परेशानियां दूर होती हैं और आंतें साफ रहती हैं। अच्छा पाचन होने से शरीर की एनर्जी बढ़ती है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है।
मेथी के सेवन का डायबिटीज के मरीजों को भी खास फायदा होता है। वजन बढ़ने की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी मेथी का पानी बहुत कारगर है। यह मेटाबॉलिज्म तेज करता है, लंबे समय तक पेट भरा रहता है, भूख कम होती है, और अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे घटती है। दिल की सेहत के लिए भी यह उपयोगी है। मेथी का पानी खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) बढ़ाता है। इससे धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा घटता है और हृदय मजबूत रहता है।
आयुर्वेद में इसे हृदय पोषक और रक्त संचार सुधारने वाली औषधि माना जाता है। महिलाओं के लिए यह हार्मोनल संतुलन में बहुत लाभकारी है। पीसीओडी, थायरॉइड और अनियमित पीरियड्स जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। मेथी के तत्व एस्ट्रोजन को बैलेंस करते हैं, जिससे त्वचा और बाल स्वस्थ, चमकदार बनते हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालते हैं, त्वचा साफ और जवां दिखती है।
--आईएएनएस
एमटी/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
2031 तक ‘प्रबंधित गिरावट’ का खतरा, पाकिस्तान को तुरंत व्यापक सुधारों की जरूरत: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान को टैक्स का दायरा बढ़ाने, ऊर्जा क्षेत्र की अक्षमताओं को दूर करने और शासन में ‘एलीट कैप्चर’ जैसी गहरी संरचनात्मक कमजोरियों से निपटने के लिए तत्काल व्यापक सुधार करने होंगे, अन्यथा 2031 तक देश ‘प्रबंधित गिरावट’ (मैनेज्ड डिक्लाइन) की ओर बढ़ सकता है। यह चेतावनी एक नई रिपोर्ट में दी गई है।
पाकिस्तान के अखबार बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के मुताबिक, आधे-अधूरे सुधारों की स्थिति में अगले पांच वर्षों में औसत वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर 2 से 3 प्रतिशत के आसपास ही रह सकती है, जो जनसंख्या वृद्धि दर से थोड़ी ही अधिक होगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति ठहराव (स्टैगनेशन) को दर्शाती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “एक युवा आबादी वाले देश में ठहराव विस्फोटक साबित हो सकता है।” इसमें चेतावनी दी गई है कि अगले पांच साल तय करेंगे कि देश की युवा आबादी ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ बनेगी या अस्थिरता का कारण।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि रोजगार के अवसर कमजोर बने रहे तो विदेश पलायन तेज होगा। प्रवासी भारतीयों की तरह विदेश से आने वाली रेमिटेंस कुछ समय के लिए अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकती है, लेकिन ‘ब्रेन ड्रेन’ धीरे-धीरे देश की आंतरिक क्षमता को कमजोर कर देगा।
विश्लेषकों का कहना है कि स्थिरीकरण कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का समर्थन केवल अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन इससे दीर्घकालिक और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि संभव नहीं है। यदि सरकार ने निर्णायक कदम नहीं उठाए, तो रोजगार मुख्य रूप से अनौपचारिक और कम उत्पादकता वाले सेवा क्षेत्रों तक सीमित रहेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कर सुधार, राजस्व संग्रह का डिजिटलीकरण और निर्यातोन्मुखी नीतियों के जरिए 2029-30 तक विकास दर 4 से 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिससे गरीबी में मामूली कमी संभव है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दशकों से राज्य की मुख्य विफलता कर आधार का विस्तार न कर पाना और शासन में प्रभावशाली वर्गों की पकड़ को कम न कर पाना रही है। इसमें चेतावनी दी गई है कि तेल की कीमतों में उछाल, जलवायु आपदाएं और भू-राजनीतिक तनाव जैसे हर बाहरी झटके से देश फिर आपात वित्तपोषण की स्थिति में पहुंच सकता है।
एक अन्य हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान शिक्षा पर जीडीपी का केवल 1.9 प्रतिशत खर्च करता है, जो अंतरराष्ट्रीय मानक 4 से 6 प्रतिशत से काफी कम है। देश में करीब 2.62 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं। पाठ्यक्रम में डिजिटल कौशल, आलोचनात्मक सोच और व्यावहारिक शिक्षा का अभाव है, जिससे कार्यबल तकनीकी बदलावों के लिए तैयार नहीं हो पा रहा।
सर्वेक्षणों के अनुसार, 64 प्रतिशत स्नातकों को कौशल की कमी के कारण रोजगार पाने में कठिनाई होती है, जबकि युवाओं में स्नातक बेरोजगारी दर लगभग 31 प्रतिशत आंकी गई है।
रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया गया है कि 2026 से 2031 के बीच पाकिस्तान का भविष्य उसके कर्ज के स्तर, महंगाई की स्थिति और गरीबी रेखा से तय होगा। यदि ठोस और व्यापक सुधार नहीं किए गए, तो धीमी वृद्धि और ऊंची महंगाई घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाती रहेगी।
--आईएएनएस
डीएससी
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