ZIM VS SA: जिम्बाब्वे ने मैच हारकर भी जीता दिल, साउथ अफ्रीका ने 5 विकेट से अपने नाम किया मैच
ZIM VS SA: टी-20 विश्व कप 2026 का 51वां मुकाबला जिम्बाब्वे और साउथ अफ्रीका के बीच दिल्ली में खेला गया. इस मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे की टीम ने 154 रनों का लक्ष्य खड़ा किया था. जवाब में अफ्रीकी टीम ने 5 विकेट गंवाकर ही लक्ष्य हासिल कर लिया. भले ही जिम्बाब्वे इस मैच को हार गई हो, लेकिन उसने फैंस का दिल जीतते हुए टूर्नामेंट का अंत किया है.
साउथ अफ्रीका ने 5 विकेट से जीता मैच
जिम्बाब्वे के दिए 154 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए साउथ अफ्रीका को अच्छी शुरुआत नहीं मिल पाई थी. जिम्बाब्वे ने पावर प्ले में ही 3 विकेट झटक लिए थे. मगर, फिर अफ्रीकी टीम ने वापसी की और 5 विकेट के नुकसान पर ही लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया.
साउथ अफ्रीका के लिए सबसे बड़ी पारी डेवाल्ड ब्रेविस ने खेली, जो 42 रन बनाकर आउट हुए. उनके अलावा रयान रिकेल्टन ने 31, डेविड मिलर ने 22 रन बनाकर आउट हुए. आखिर में ट्रिस्टन स्टब्स 21 और जॉर्जे लिंडे 30 रन बनाकर अपनी टीम को जीत दिलाकर वापस लौटे. इस तरह साउथ अफ्रीका ने इस मैच को 5 विकेट से जीता और अब विजयरथ पर सवार रहते हुए ही सेमीफाइनल मैच खेलेगी.
South Africa extend their unbeaten run in the 2026 #T20WorldCup with a comfortable victory over Zimbabwe ????
— ICC (@ICC) March 1, 2026
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जिम्बाब्वे ने बना थे 153/7 रन
साउथ अफ्रीका के साथ खेले गए मुकाबले में टॉस जीतकर जिम्बाब्वे ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था. दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने आई जिम्बाब्वे की टीम ने 7 विकेट के नुकसान पर 153 रन बोर्ड पर लगाए थे.
इस मैच में कप्तान सिकंदर रजा ने 43 गेंदों पर 73 रन बनाए, जो सबसे बड़ी पारी रही. रजा के अलावा कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका. जहां, सिकंदर रजा ने अकेले 73 रन बनाए, वहीं पूरी टीम ने मिलकर 75 रन बनाए, जबकि 5 रन एक्स्ट्रा से आए.
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'हमारे साथियों की सुरक्षा शर्तों पर निर्भर नहीं', यूएन में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई को ठहराया सही
नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में भीषण हमलों के बीच संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका का नया बयान सामने आया है। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि यूएस के साथियों की सुरक्षा शर्तों पर निर्भर नहीं है।
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी मीटिंग के दौरान ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का बचाव किया। अमेरिकी दूत माइक वाल्ट्ज ने कहा, ईरान का एडवांस्ड मिसाइल क्षमता की लगातार कोशिश करना और डिप्लोमैटिक मौकों के बावजूद न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने से इनकार करना, एक गंभीर और बढ़ता हुआ खतरा है।
ईरान के न्यूक्लियर हथियार हासिल करने को लेकर अमेरिकी दूत ने यूएस की सोच को एक बार फिर से दोहराया और कहा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने लंबे समय से एक आसान और जरूरी सिद्धांत की पुष्टि की है। ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकता। यह सिद्धांत राजनीति का मामला नहीं है। यह वैश्विक सुरक्षा का मामला है और इसी मकसद से, अमेरिका कार्रवाई कर रहा है।
वाल्ट्ज ने तर्क दिया कि वॉशिंगटन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में बार-बार डिप्लोमैटिक कोशिशें की थीं, लेकिन उन्होंने ईरान को उनके पालन न करने के लिए दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, अमेरिकी डिप्लोमेसी की कोशिश बार-बार और अच्छी नीयत से की गई। डिप्लोमेसी तब सफल नहीं हो सकती, जब हमला रोकने की कोई सच्ची इच्छा न हो, जहां शांति के लिए कोई सच्चा साझेदार न हो।
उन्होंने ईरान पर परिषद की विश्वसनीयता कम करने का आरोप लगाया और कहा, दुख की बात यह है कि यही सरकार आज हमें मानवाधिकार और कानून के राज के बारे में भाषण देने की कोशिश करेगी। इस काउंसिल में इसकी मौजूदगी यूएन का मजाक उड़ाती है।
कुवैत, यूनाइटेड अरब अमीरात, बहरीन, कतर और जॉर्डन जैसे क्षेत्रीय साझेदारों पर ईरान के हमलों का जिक्र करते हुए वॉल्ट्ज ने कहा कि ये एक्शन दिखाते हैं कि अमेरिका के कदम क्यों जरूरी हैं।
उन्होंने कहा, जो लोग हमारे साथ हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि उनकी सुरक्षा पर कोई मोल-भाव नहीं हो सकता। हमारे साथियों की सुरक्षा शर्तों पर नहीं है। यह पक्की है। शांति उन लोगों को खुश करके नहीं बनी रहती जो इसे खतरा पहुंचाते हैं। शांति आतंक का सामना करने में ताकत से बनी रहती है।
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई को दोहराया है। रविवार को ट्रूथ सोशल पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा, ईरान ने अभी कहा है कि वे आज बहुत जोरदार हमला करेंगे, जितना पहले कभी नहीं हुआ। लेकिन बेहतर होगा कि वे ऐसा न करें, क्योंकि अगर वे ऐसा करते हैं, तो हम उन पर ऐसी ताकत से हमला करेंगे, जो पहले कभी नहीं देखी गई।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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