'हमारे साथियों की सुरक्षा शर्तों पर निर्भर नहीं', यूएन में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई को ठहराया सही
नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में भीषण हमलों के बीच संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका का नया बयान सामने आया है। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि यूएस के साथियों की सुरक्षा शर्तों पर निर्भर नहीं है।
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी मीटिंग के दौरान ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का बचाव किया। अमेरिकी दूत माइक वाल्ट्ज ने कहा, ईरान का एडवांस्ड मिसाइल क्षमता की लगातार कोशिश करना और डिप्लोमैटिक मौकों के बावजूद न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने से इनकार करना, एक गंभीर और बढ़ता हुआ खतरा है।
ईरान के न्यूक्लियर हथियार हासिल करने को लेकर अमेरिकी दूत ने यूएस की सोच को एक बार फिर से दोहराया और कहा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने लंबे समय से एक आसान और जरूरी सिद्धांत की पुष्टि की है। ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकता। यह सिद्धांत राजनीति का मामला नहीं है। यह वैश्विक सुरक्षा का मामला है और इसी मकसद से, अमेरिका कार्रवाई कर रहा है।
वाल्ट्ज ने तर्क दिया कि वॉशिंगटन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में बार-बार डिप्लोमैटिक कोशिशें की थीं, लेकिन उन्होंने ईरान को उनके पालन न करने के लिए दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, अमेरिकी डिप्लोमेसी की कोशिश बार-बार और अच्छी नीयत से की गई। डिप्लोमेसी तब सफल नहीं हो सकती, जब हमला रोकने की कोई सच्ची इच्छा न हो, जहां शांति के लिए कोई सच्चा साझेदार न हो।
उन्होंने ईरान पर परिषद की विश्वसनीयता कम करने का आरोप लगाया और कहा, दुख की बात यह है कि यही सरकार आज हमें मानवाधिकार और कानून के राज के बारे में भाषण देने की कोशिश करेगी। इस काउंसिल में इसकी मौजूदगी यूएन का मजाक उड़ाती है।
कुवैत, यूनाइटेड अरब अमीरात, बहरीन, कतर और जॉर्डन जैसे क्षेत्रीय साझेदारों पर ईरान के हमलों का जिक्र करते हुए वॉल्ट्ज ने कहा कि ये एक्शन दिखाते हैं कि अमेरिका के कदम क्यों जरूरी हैं।
उन्होंने कहा, जो लोग हमारे साथ हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि उनकी सुरक्षा पर कोई मोल-भाव नहीं हो सकता। हमारे साथियों की सुरक्षा शर्तों पर नहीं है। यह पक्की है। शांति उन लोगों को खुश करके नहीं बनी रहती जो इसे खतरा पहुंचाते हैं। शांति आतंक का सामना करने में ताकत से बनी रहती है।
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई को दोहराया है। रविवार को ट्रूथ सोशल पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा, ईरान ने अभी कहा है कि वे आज बहुत जोरदार हमला करेंगे, जितना पहले कभी नहीं हुआ। लेकिन बेहतर होगा कि वे ऐसा न करें, क्योंकि अगर वे ऐसा करते हैं, तो हम उन पर ऐसी ताकत से हमला करेंगे, जो पहले कभी नहीं देखी गई।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान पर हमले में रक्षा मंत्री और आईआरजीसी कमांडर की मौत
तेहरान, 1 मार्च (आईएएनस)। ईरान पर किए गए अमेरिका-इजरायल के हमलों में ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दुल रहीम मौसवी की मौत हो गई। यह जानकारी देश के सरकारी टीवी चैनल इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) ने रविवार को दी।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के प्रमुख कमांडर मोहम्मद पाकपुर, देश की रक्षा परिषद के सचिव अली शमखानी और रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह भी मारे गए। इस घटना से पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ गया है।
आईडीएफ के अनुसार, यह ऑपरेशन इजरायली एयरफोर्स (आईएएफ) ने तब अंजाम दिया, जब सैन्य खुफिया निदेशालय ने तेहरान में दो अलग-अलग स्थानों की पहचान की, जहां ईरान के उच्च पदस्थ सुरक्षा अधिकारी एकत्र थे।
इस बीच आईआरजीसी ने सरकारी टेलीविजन की ओर से सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद हत्यारों को दंडित करने की कसम खाई है और अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ इतिहास का सबसे उग्र आक्रामक अभियान चलाने का वादा किया है।
अपने आधिकारिक टेलीग्राम पेज पर जारी एक बयान में आईआरजीसी ने कहा, “खामेनेई के हत्यारों को नहीं छोड़ेंगे।”आईआरजीसी, सशस्त्र बल और बसीज बल अपने नेता की विरासत की रक्षा के मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ते रहेंगे, आंतरिक और बाहरी साजिशों के खिलाफ डटे रहेंगे और इस्लामी मातृभूमि के खिलाफ आक्रामकता करने वालों को सबक सिखाने वाली सजा देंगे।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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